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Rajasthan Politics News: विधानसभा सत्र से पहले जारी बुलेटिन को लेकर पूर्व सीएम अशोक गहलोत के आरोपों पर आज विधानसभा स्पीकर वासुदेव देवनानी ने पलटवार किया. देवनानी ने गहलोत के बयान को तथ्य से परे बताया और साफ कहा कि उनके पिछले कार्यकाल में स्पीकर सीपी जोशी ने जो नियम बनाये थे, उनमें किसी भी तरह का रद्दोबदल नहीं किया गया है. गहलोत को इस तरह आरोप लगाने से पहले आत्म अवलोकन कर लेना चाहिए था.
गहलोत ने सोशल मीडिया पर लिखा था:
"राजस्थान विधानसभा के आगामी सत्र के लिए जारी किए गए नए दिशा-निर्देश अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और संसदीय लोकतंत्र की मूल भावना के विपरीत हैं. माननीय विधानसभा अध्यक्ष @VasudevDevnani जी, आपने किसकी सलाह से ऐसा फैसला किया, जिसको लेकर सभी विधायकों एवं जनता में प्रतिक्रिया तथा आक्रोश होना स्वाभाविक है.
विधायक केवल एक क्षेत्र विशेष का ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश का प्रतिनिधि होता है. उसे राज्य स्तर के नीतिगत विषयों या 5 साल पुराने मामलों पर प्रश्न पूछने से रोकना, और मंत्रियों को जवाबदेही से 'छूट' देना, सदन की गरिमा को कम करने जैसा है.
लोकतंत्र में विपक्ष और विधायकों का काम सरकार की जवाबदेही तय करना है. यदि प्रश्न पूछने की स्वतंत्रता ही नहीं रहेगी, तो विधानसभा का औचित्य क्या रह जाएगा? यह अलोकतांत्रिक व्यवस्था कतई स्वीकार्य नहीं है. विधायिका का काम कार्यपालिका पर अंकुश रखना है, न कि कार्यपालिका की सुविधा अनुसार अपने अधिकार कम करना.
ऐसा आदेश संभवतः देश में पहली बार निकाला गया होगा, जिससे विधायकों के अधिकारों को कम किया जा रहा है. बाक़ी विधानसभाएं अपने सदस्यों के अधिकार बढ़ाने का प्रयास करती हैं, परन्तु यहां इसके विपरीत देखने को मिल रहा है.
विधायकों को राज्य स्तर के सवाल पूछने से रोकना और मंत्रियों को जवाबदेही से मुक्त करना लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है. ऐसे आदेश को अविलंब वापस लेना चाहिए."
गहलोत के बयान पर स्पीकर वासुदेव देवनानी ने प्रेस कांफ्रेंस की. गहलोत की ओर से उठाए गए एक-एक सवाल का मीडिया के सामने जवाब दिया. देवनानी ने साल 2020 के बुलेटिन संख्या 26 का जिक्र किया. कहा - "उस बुलेटिन के आधार पर ही नए बुलेटिन जारी हुए हैं. ज्यादा कुछ भी नया नहीं जोड़ा गया है. हमारी कोशिश बस यही है कि ज्यादा विस्तारित प्रश्न न हों.
पिछले 5 साल से पहले की जानकारी न मांगी जाए. इस तरह के परंतु पहले भी जारी बुलेटिन में लगाए गए हैं."
देवनानी ने गहलोत पर पलटवार किया. कहा, "साल 2020 में जारी हुए बुलेटिन के बाद अब जाकर उनको 2026 में ही इसकी याद कैसे आई?"
देवनानी ने नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की आपत्ति को भी सिरे से खारिज किया. कहा, "वो उस वक्त तत्कालीन सरकार में कैबिनेट मंत्री थे. तब उन्होंने ध्यान क्यों नहीं दिया?" विपक्ष के 'तुच्छ' शब्द पर आपत्ति पर भी देवनानी ने अपनी बात रखी. स्पीकर बोले, "यह शब्द लोकसभा की व्यवस्था से लिया गया है. सदन हमेशा नियमों, परंपराओं और परिपाटी से चलता है. पिछले चार सत्रों में किसी ने भी इस पर ना आपत्ति जताई, ना चर्चा की. तो क्या यह मान लिया जाए कि यह बुलेटिन इन लोगों ने नहीं पढ़े? और अगर पढ़े, तो क्या यह मान लिया जाए कि अब उन्होंने सिर्फ राजनीतिक आधार पर ये बयान दिया है?"
विधानसभा अध्यक्ष ने पूर्व सीएम गहलोत को आत्म अवलोकन तक की नसीहत दे डाली. देवनानी बोले, "अशोक गहलोत को दूसरे को नसीहत देने से पहले खुद को आत्म अवलोकन करना चाहिए. मुझे आत्म अवलोकन के लिए कहते हैं, लेकिन शायद खुद इस बात को अमल में नहीं लाते."
स्पीकर ने साफ कहा कि विधानसभा अध्यक्ष को प्रक्रिया निर्धारित करने का पूरा अधिकार है. हालांकि इस बार भी जारी बुलेटिन में 2020 के बुलेटिन की ही गाइडलाइन को फॉलो किया गया है. बस कोशिश यह की जा रही है कि एक घंटे में ज्यादा से ज्यादा सवाल विधायक पूछ सकें. अध्यक्ष विधानसभा के भीतर और बाहर दोनों जगह अध्यक्ष होता है. ऐसे में सदन की गरिमा की पालना करना सभी सदस्यों के लिए विधानसभा के बाहर भी अपेक्षित है.
गहलोत और देवनानी में विधानसभा सत्र से पहले की बयानबाजी साफ इशारा कर रही है कि विधानसभा का बजट सत्र खासा हंगामेदार रहेगा. विपक्ष सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं चूकेगा. इसलिए स्पीकर पर अभी से विपक्ष के कददावर नेता दबाव बनाने में जुट गए हैं. जुबानी जंग आने वाले दिनों में और आक्रामक होती नजर आएगी.
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