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Jaipur News: राजस्थान की राजधानी जयपुर में जलदाय विभाग में एक बार फिर से घोटालों की जांच पर हलचल तेज हो गई है. क्योंकि इस बार कार्रवाई रोकने के गंभीर आरोप लगे है. पूरे मामले की शिकायत मुख्य सचिव दफ्तर तक पहुंची तो अब जांचों के लिए जांच बैठाई गई. आखिरकार कौन कौन से घोटालों की जांचे रुकी हैं.
गंभीर आरोप पर एमडी के पास जांच
PHED में करोड़ों के घोटालों की जांच तो होती है, लेकिन कार्रवाई पर ब्रेक लगा रहता है. क्वालिटी कंट्रोल विंग से फाइल संयुक्त सचिव दफ्तर तो पहुंचती है, लेकिन एक्शन नहीं होता. जलदाय विभाग के संयुक्त सचिव प्रवीण लेखरा और क्वालिटी कंट्रोल चीफ इंजीनियर आरके मीणा पर कुछ इस तरह के गंभीर आरोप लगे है. मुख्य सचिव दफ्तर ने संयुक्त सचिव प्रवीण लेखरा और चीफ इंजीनियर आरके मीणा के खिलाफ जांच के निर्देश दिए. सीएस दफ्तर के आदेश पर जेजेएम एमडी ने जांच शुरू कर दी है. इस पूरे मामले पर प्रवीण लेखरा का कहना है कि ये सभी आरोप निराधार है. जबकि आरके मीणा ने कहा इंजीनियर्स के खिलाफ चार्जशीट भेज दी गई है. जबकि फर्मों के खिलाफ अतिरिक्त मुख्य अभियंता अलवर को लिखा गया है. हालांकि दोनों अफसरों ने खुद पर लगे आरोपों के लिए कैमरे पर बोलने से साफ इंकार कर दिया. उधर पूरे मामले की जांच पर MD रविंद्र गोस्वामी ने चुप्पी साध ली.
बिना प्रशासनिक स्वीकृति के ही मिले करोडों के काम
अलवर NCR-2 में बिना प्रशासनिक स्वीकृति के दो फर्मों को हैंडपंप और नलकूपों का काम देने की जांच हुई. अधीक्षण अभियंता रमेश चंद सैनी की अध्यक्षता में हुई. जांच में भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ, जिसमें इंजीनियर्स ने मिलीभगत कर बिना प्रशासनिक स्वीकृति के ही खोडा कंस्ट्रक्शन और समीक्षा फर्म को हैंडपंप और नलकूप के करीब 1.50 करोड के काम दिए. इंजीनियर्स ने फर्जीवाड़ा करते हुए एफडी पेड आईडी को A&F सेंशन नंबर बनाकर कार्य करवाए. हैरानी की बात ये है कि जांच टीमों को नलकूपों को गहरा करने का कोई साक्ष्य नहीं मिला. यानी बिना नलकूपों को गहरा करवाए ही मैसर्स समीक्षा कंस्ट्रक्शन और मैसर्स खोडा कंस्ट्रक्शन को करोडों का भुगतान कर दिया. इस पूरे मामले में अब आरोप ये लगे है कि तत्कालीन एक्सईएन राजेश मीणा समेत अन्य इंजीनियर्स और फर्मों के खिलाफ अब तक कार्रवाई नहीं हुई. जबकि पूरे मामले की जांच रिपोर्ट 3 महीने पहले ही आ गई थी.
8 करोड के कार्यों में भारी अनियमित्ताएं
अधीक्षण अभियंता आलोक कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में अलवर एनसीआर 2 डिवीजन में 8 करोड के 6 योजनाओं की जांच की गई थी. जिसमें भारी अनियमित्ताएं सामने आई. बिना अनुमोदन के पाइप का भुगतान, नियमों को ताक पर रखकर एसबीसी टेस्टिंग करवाई, फर्मों को कार्य के मुताबिक ज्यादा भुगतान किया, सोईल कंवर नियमों के मुताबिक नहीं मिले, साइट पर क्यूब टेस्ट उपलब्ध नहीं, एचडीपीई पाईपों का सेक्शन टेस्टिंग का रिकॉर्ड नहीं मिला, बिना भूजल वैज्ञानिकों की अनुमति के दूसरी जगह नलकूपों का निर्माण किया गया. इस घोटाले की जांच दो साल पहले हुई थी, लेकिन मामले में कार्रवाई नहीं करने के आरोप लगे हैं.
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