Rajasthan Siyasi Kissa: हनुमान की हुंकार से हिल गई थी राजस्थान सरकार, बेनीवाल के लिए रात 2 बजे खुले जेल के दरवाजे!

Rajasthan Siyasi Kissa: "हनुमान बेनीवाल की हुंकार से हिल गई थी राजस्थान सरकार! 1997 में छात्र नेता हनुमान बेनीवाल की गिरफ्तारी के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन देखते हुए सरकार ने रात 2 बजे जेल के दरवाजे खोल दिए थे और उन्हें रिहा कर दिया था.

Rajasthan Siyasi Kissa: हनुमान की हुंकार से हिल गई थी राजस्थान सरकार, बेनीवाल के लिए रात 2 बजे खुले जेल के दरवाजे!

Rajasthan Siyasi Kissa: 9 अगस्त 1996 की सुबह, जयपुर के सिंधी कैंप बस स्टैंड पर कुछ छात्र चाय पीते हुए अखबार पढ़ रहे थे. अखबार की पहली पन्ने पर एक बड़ी खबर छपी थी - "राजस्थान विश्वविद्यालय में बवाल, छात्रसंघ अध्यक्ष सहित एक दर्जन छात्रनेता गिरफ्तार." छात्र इस खबर को पढ़कर ठहाके लगा रहे थे और हंस रहे थे. अखबार पढ़ने के बाद, वे तह करके अपने साथ रख लिया और राजस्थान विश्वविद्यालय की तरफ बढ़ गए.

राजस्थान यूनिवर्सिटी में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से छात्र आते हैं, जहां जाति और जिला-वार गोलबंदी आम बात है. 1996 के छात्रसंघ चुनाव में नागौर ग्रुप ने बाजी मारी, जिसमें महेंद्र चौधरी नावां, नागौर से आकर राजस्थान यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष बने और हनुमान बेनीवाल बरणगांव से लॉ कॉलेज के अध्यक्ष चुने गए. इस चुनाव ने विश्वविद्यालय में नागौर ग्रुप की मजबूत उपस्थिति को दर्शाया.

जुलाई के अंत में हनुमान बेनीवाल और महेंद्र चौधरी ने छात्रसंघ का चुनाव जीता था. अगस्त के पहले सप्ताह में विधानसभा का मॉनसून सत्र शुरू होने वाला था, लेकिन उससे पहले ही विपक्ष के कई छात्र संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर यूनिवर्सिटी बंद करने का आह्वान कर दिया. राजस्थान यूनिवर्सिटी में उस समय बंद और हड़तालें आम बात थीं. हालांकि, बेनीवाल और चौधरी ने अपने चुनाव अभियान के दौरान वादा किया था कि वे आम छात्रों की पढ़ाई बाधित नहीं होने देंगे, इसलिए वे यूनिवर्सिटी बंद के खिलाफ थे.

सुबह सवा नौ बजे राजस्थान विश्वविद्यालय के गेट पर दोनों पक्ष आमने-सामने हो गए, जिससे तनाव बढ़ता जा रहा था. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया, लेकिन गुस्साए छात्रों ने पुलिस पर पत्थर बरसाने शुरू कर दिए. लगभग तीन घंटे तक चली इस झड़प में दोनों पक्षों के कई लोग घायल हो गए. स्थिति को संभालने के लिए पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की, लेकिन छात्रों का गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा था.

प्रदर्शन पर लगाम लगाने के लिए पुलिस ने एक दर्जन से ज्यादा छात्रों को गिरफ्तार किया, जिनमें महेंद्र चौधरी और हनुमान बेनीवाल भी शामिल थे. गिरफ्तार छात्रों को पहले बजाज नगर थाने ले जाया गया और फिर केंद्रीय कारागार भेज दिया गया. बताया जाता है कि जेल में इन छात्रनेताओं की लोकप्रियता इतनी थी कि जेल की बैरक से कई कैदी उन्हें देखने के लिए बाहर आ गए. हालांकि, एक अन्य घटना में राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें 12 से ज्यादा छात्र घायल हुए और 26 छात्रों को हिरासत में लिया गया.

देर रात प्रशासन को पता चला कि छात्रसंघ अध्यक्ष महेंद्र चौधरी और लॉ कॉलेज अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल की गिरफ्तारी के विरोध में विश्वविद्यालय के छात्र एकजुट हो रहे हैं. स्थिति बिगड़ने का खतरा था और प्रशासन को पता था कि अगर छात्र सड़कों पर उतर आए, तो उन्हें नियंत्रित करना मुश्किल होगा. इसे देखते हुए प्रशासन ने हालात को संभालने के लिए तुरंत कदम उठाने का फैसला किया.

भैरो सिंह शेखावत उस समय राजस्थान के मुख्यमंत्री थे और विधानसभा सत्र के दौरान राजधानी में छात्रों का कोई आंदोलन नहीं चाहते थे. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए गिरफ्तार किए गए छात्रनेताओं को तुरंत रिहा करना आवश्यक था, लेकिन जेल के नियमों के अनुसार सूरज डूबने के बाद जेल के दरवाजे नहीं खोले जा सकते थे. हालांकि, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इस नियम को नजरअंदाज कर दिया गया और रात दो बजे के करीब सभी छात्रनेताओं को रिहा कर दिया गया. जब वे जेल से बाहर आए, तो शहर के अखबार छप चुके थे और वे सिन्धी कैंप पर चाय पीते हुए अपनी ही गिरफ्तारी की खबर पढ़ रहे थे.

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