Rajasthan Siyassi Kissa: वसुंधरा राजे को राजस्थान में लाने वाले पूर्व उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत थे. शेखावत ने वसुंधरा की मां विजया राजे सिंधिया से उनके भविष्य के बारे में चर्चा की. इस चर्चा के बाद, शेखावत ने विजया को सलाह दी कि… पढ़ें राजनितिक किस्सा, वो भी विस्तार से…
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Rajasthan Siyassi Kissa: वसुंधरा राजे को राजस्थान में लाने वाले पूर्व उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत थे. शेखावत ने वसुंधरा की मां विजया राजे सिंधिया से उनके भविष्य के बारे में चर्चा की. इस चर्चा के बाद, शेखावत ने विजया को सलाह दी कि वे वसुंधरा को अपने ससुराल धोलपुर भेज दें. धोलपुर से वसुंधरा ने 1985 में चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. यह उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत थी.
वसुंधरा राजे का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है. वे दो बार राजस्थान की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं और भाजपा की वरिष्ठ नेता हैं. उनके अनुभव और राजनीतिक कौशल को देखते हुए, उन्हें एक मजबूत नेता माना जाता है.
वसुंधरा राजे को राजस्थान की राजनीति में लाने वाले पूर्व उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत थे. उन्होंने वसुंधरा राजे के राजनीतिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वसुंधरा राजे ने अपना पहला चुनाव 1984 में मध्य प्रदेश के भिंड लोकसभा क्षेत्र से लड़ा, लेकिन वह हार गईं. इसके बाद, उनकी मां विजयाराजे सिंधिया ने भैरों सिंह शेखावत से उनके भविष्य के बारे में चर्चा की. भैरों सिंह शेखावत ने विजयाराजे को सलाह दी कि वे वसुंधरा को अपने ससुराल धौलपुर भेज दें, जहां से उन्हें 1985 में चुनाव लड़ने का अवसर मिलेगा.
इस सलाह का पालन करते हुए, वसुंधरा राजे धौलपुर चली गईं और वहां से चुनाव लड़ा, जिसमें उन्हें सफलता मिली. इसके बाद, वसुंधरा राजे ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और राजस्थान की राजनीति में अपनी एक अलग पहचान बनाई. वे दो बार राजस्थान की मुख्यमंत्री बनीं और भाजपा की वरिष्ठ नेता बनीं.
वसुंधरा राजे ने एक दिलचस्प किस्सा साझा किया था, जब भैरो सिंह शेखावत ने उनके लिए एक बड़ा फैसला लिया. वसुंधरा राजे ने बताया कि वह धौलपुर से चुनाव जीत गई थीं, लेकिन भैरो सिंह शेखावत ने बिना उनसे पूछे मंच से घोषणा कर दी कि वह झालावाड़ से लोकसभा का चुनाव लड़ेंगी. यह खबर सुनकर वसुंधरा राजे घबरा गईं और अपनी माँ राजमाता को फोन किया, जिन्होंने उन्हें भैरो सिंह शेखावत से बात करने की सलाह दी. वसुंधरा राजे को यह बदलाव पसंद नहीं आया क्योंकि वह धौलपुर में खुश थीं और झालावाड़ के बारे में ज्यादा नहीं जानती थीं.
वसुंधरा राजे ने रोते हुए अपने राजनीतिक गुरु भैरों सिंह शेखावत को फोन किया, जिन्हें वह प्यार से बाबोसा कहती थीं. वसुंधरा ने कहा, "ये आपने क्या कर दिया? मैं तो झालावाड़ के बारे में कुछ भी नहीं जानती हूं, आप मुझे कहां भेज रहे हो?" भैरों सिंह शेखावत ने वसुंधरा की बात सुनकर उन्हें समझाया कि राजनीति में रिस्क लेना जरूरी है और यह उनके लिए एक अच्छा अवसर हो सकता है. उन्होंने कहा, "सांसद बनना कोई छोटी बात नहीं है." भैरों सिंह शेखावत की बात मानकर वसुंधरा राजे झालावाड़ गईं और भारी मतों से चुनाव जीतीं. यह जीत वसुंधरा राजे के राजनीतिक जीवन में एक नए अध्याय की शुरुआत थी.