Rajasthan News: अब राजस्थान के लिए खुशखबरी! पंजाब के हरिके बैराज से ओवरफ्लो होकर पाकिस्तान जा रहा पानी अगले साल से राजस्थान को मिलने लगेगा. इससे राज्य के जल संसाधनों में वृद्धि होगी और सिंचाई समेत अन्य कार्यों में मदद मिलेगी.
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Rajasthan News : पंजाब के हरिके बैराज से ओवरफ्लो होकर पाकिस्तान जा रहा पानी अब राजस्थान को अगले साल से मिलने लगेगा, जिससे राज्य के कई जिलों को जबरदस्त फायदा मिलेगा. यह पानी मिलने से राजस्थान के जल संसाधनों में वृद्धि होगी और इससे सिंचाई और अन्य कार्यों में मदद मिलेगी.
अब राजस्थान को पंजाब के हरिके बैराज से अतिरिक्त पानी मिलने की राह आसान हो गई है. अगले साल जुलाई से राजस्थान को 3500 क्यूसेक पानी इंदिरा गांधी कैनाल में मिलने लगेगा, जबकि बाकी 3000 क्यूसेक पानी की आपूर्ति 2 साल में पूरी होगी. कुल मिलाकर राजस्थान को 6500 क्यूसेक अतिरिक्त पानी मिलेगा. जल संसाधन विभाग ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद राजस्थान फीडर और इंदिरा गांधी कैनाल के नहरी तंत्र को सुधारने का काम समय से पहले पूरा करने का प्लान बनाया है. इसके पूरा होने से 13 जिलों के लाखों लोगों को पेयजल और कृषि के लिए अतिरिक्त पानी मिल सकेगा.
राजस्थान फीडर और इंदिरा गांधी नहर के सुधार कार्य तेजी से चल रहे हैं. पंजाब हिस्से में 97 किमी के पहले फेज में अब केवल 15.37 किमी का काम बाकी है, जबकि 53 किमी हिस्से के लिए डीपीआर बनाने के लिए 5 करोड़ रुपए स्वीकृत हो गए हैं. हरियाणा हिस्से में 18 किमी का काम पूरा हो गया है. इंदिरा गांधी नहर में 179.53 किमी में से केवल 2.62 किमी का काम बाकी है, जिसे 20 मई तक पूरा करने का दावा है.
नहरी तंत्र के 2498 किमी में से 1.22 किमी का सुदृढ़ीकरण बाकी है. इसके अलावा मुख्य कैनाल पर 8 ब्रिज के पुनरुद्धार और माइक्रो इरीगेशन प्रोजेक्ट के तहत 5040 पंप लगाने का काम भी प्रगति पर है. पानी रिसाव के 8 कार्यों में से 5 का काम शुरू हो गया है, जिस पर 114 करोड़ रुपए खर्च होंगे और अगले वर्ष जुलाई तक पूरा होगा.
इंदिरा गांधी नहर के जरिए 18500 क्यूसेक पानी लाने की क्षमता है, लेकिन फीडरों की खराब स्थिति के कारण केवल 12000 क्यूसेक पानी ही आ पा रहा है. इससे बाकी पानी पाकिस्तान की ओर छोड़ना पड़ता है. फीडरों के सुदृढ़ीकरण और क्षमता बढ़ने के बाद यह अतिरिक्त पानी भी राजस्थान को मिलेगा. यह काम पिछले 6-7 साल से चल रहा है और इसके पूरा होने से राज्य को जल संसाधनों में वृद्धि होगी.