Raksha Bandhan 2025: ‘भद्रा’ से आजादी..! 90 साल बाद राखी का सबसे शुभ दिन, पूरे दिन सजेगी स्नेह की डोर

Raksha Bandhan 2025: रक्षाबंधन सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते का जश्न है जो इस बार बिना किसी बाधा का उत्सव बनने जा रहा है. इस बार ऐसा संयोग बना है जब राखी के दिन ‘भद्रा’ का साया नहीं होगा और बहनें सुबह से लेकर शाम तक भाइयों की कलाई पर स्नेह और सुरक्षा की डोर बांध सकेंगी.

Raksha Bandhan 2025: ‘भद्रा’ से आजादी..! 90 साल बाद राखी का सबसे शुभ दिन, पूरे दिन सजेगी स्नेह की डोर
Image Credit: Raksha Bandhan 2025

Rajasthan News: कभी पतंग के धागे में उलझे थे, कभी स्कूल के रास्ते में झगड़े करते-करते भी साथ चलते थे और कभी चुपके से एक-दूसरे का राज भी संभाल लिया करते थे. भाई-बहन का रिश्ता ऐसा है, जिसमें लड़ाई भी होती है और लाड़ भी, शिकायत भी होती है और सबसे बड़ी सिफारिश भी. इस बार रक्षाबंधन सिर्फ कैलेंडर पर दर्ज एक तारीख नहीं, बल्कि रिश्तों के नाम सबसे बड़ा उपहार लेकर आ रहा है, जिसमें न वक्त की कोई पाबंदी है, न आकाश में कोई बाधा. ज्योतिष के हिसाब से ऐसा दुर्लभ संयोग 90 साल बाद बन रहा है, जिसमें सौभाग्य योग, शोभन योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, बुधादित्य योग और श्रवण नक्षत्र एक साथ आएंगे. न भद्रा का साया, न ग्रहण की रोक, बस भाई-बहन के रिश्ते को मनाने के लिए खुला आसमान और पूरा दिन.

ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इस बार सुबह से रात तक राखी बांधने का हर लम्हा शुभ है। लेकिन प्रदोष काल (शाम 7:05 से 9:16 बजे) और अपराह्न काल (दोपहर 1:51 से 4:28 बजे) को सबसे श्रेष्ठ माना गया है. सूर्योदय के बाद पूर्णिमा तिथि दो घंटे 24 मिनट से अधिक हो तो उस दिन रक्षाबंधन का पर्व पूरे दिन मनाया जा सकता है. रक्षाबंधन के दिन का शुभ चौघड़िया सुबह 7:35 से 9:15 तक रहेगा, जबकि चर, लाभ और अमृत का चौघड़िया दोपहर 12:32 से शाम 5:26 तक रहेगा. इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:08 से 12:56 तक रहेगा. इस बार दोपहर तक पूर्णिमा होने से रक्षाबंधन पर्व पूरे दिन मनाया जाएगा.

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बाजार में मेटल की ‘राम राखी’ से लेकर बच्चों के लिए डोरेमोन, स्पाइडर मैन, म्यूजिक और चॉकलेट वाली राखियां धूम मचा रही हैं. पहले राखी सिर्फ रेशम का धागा होती थी, अब यह चॉकलेट की मिठास और डिजाइन की चमक के साथ रिश्तों का तोहफा बन चुकी है. लेकिन असली मिठास डिजाइन में नहीं, उस पल में है. जब बहन, राखी बांधते हुए भाई की कलाई पर बचपन की शरारतें, हंसी की गूंज और दुआओं का स्पर्श छोड़ जाती है. इस बार वक्त की कोई पाबंदी नहीं, तो दूर रहने वाले भाई-बहन भी सफर तय कर मिल सकते हैं. 90 साल बाद बना यह संयोग कहता है रिश्तों को समय दीजिए, बाकी शुभता अपने आप आ जाएगी. गांव से शहर तक, आंगन से छत तक हर जगह राखी का रंग और रिश्तों की खुशबू बिखरेगी. किसी घर में छोटी बहन अपने बड़े भाई को हंसी-खुशी बांधेगी, तो कहीं पर परदेस से लौटे भाई को देख बहन की आंखों में बरसों का इंतजार छलक पड़ेगा. रक्षाबंधन केवल एक रस्म नहीं, ये भाई की सुरक्षा और बहन के सम्मान का आजीवन वचन है. घर-आंगन में बहनें अपने भाइयों को राखी बांधते हुए न सिर्फ रक्षा का वचन लेंगी, बल्कि अपने बचपन की अनगिनत यादें भी ताज़ा करेंगी.

बहरहाल, रिश्तों की गिनती तारीखों से नहीं, निभाने से होती है और इस बार वक्त ने भाई-बहन को एक पूरा दिन दिया है, बिना किसी रोक-टोक के. राखी का ये धागा सिर्फ कलाई पर नहीं, दिल पर बंधता है जहां हर गांठ में बचपन की शरारतें, मां की डांट और दूरियों के बावजूद साथ होने का वादा छुपा होता है. इस सावन की पूर्णिमा पर, जब सूरज, चांद और सितारे सब इस बंधन को आशीर्वाद दे रहे हैं, तो क्यों न हम भी अपने रिश्तों को वक्त का सबसे कीमती तोहफा दें. अपनी मौजूदगी, अपनी मुस्कान और अपना भरोसा. क्योंकि राखी सिर्फ धागा नहीं, ये वो वचन है जो वक्त के हर इम्तिहान में अटूट रहता है.

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Pratiksha Maurya

Pratiksha Maurya

मैं प्रतीक्षा मौर्या जी राजस्थान न्यूज में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं और राजस्थान से जुड़ी हर बड़ी से बड़ी और छोटी से छोटी न्यूज पर पकड़ रखती हूं . मुझे डिजिटल मीडिया का 2 साल से ज्यादा का अनुभव है. इससे पहले मैं जी बिहार में अपनी सेवाएं दे चुकी हूं.
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