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Raksha Bandhan 2025: भाई-बहन का स्नेह का पर्व रक्षाबंधन 9 अगस्त को आने वाला है और डाकघरों में जज्बातों का सैलाब उमड़ पड़ा है. बहनें लाइन में हैं, भाई की कलाई तक वक्त पर राखी पहुंचाने की उम्मीद लिए. लेकिन इस बार राखी की डोर को समय से बांधने में सबसे बड़ी अड़चन बन गया है डाक विभाग का आईटी 2.0 सॉफ्टवेयर. काउंटर के बाहर लिखा है धैर्य रखें कृपया धैर्य रखें. आईटी 2.0 सॉफ्टवेयर लॉन्च होने के कारण सिस्टम धीरे चल रहा है और ये ही सिस्टम बहनों की धैर्य की परीक्षा भी ले रहा हैं. बहनों का उत्साह वैसा ही है जैसे हर साल होता है.
राखी भेजने के लिए डाकघर काउंटर की कतार में लगी विशाखा का कहना हैं कि भाई सूरत में रहता है. गिफ्ट तो पहले मिल चुका हैं, लेकिन राखी भेजने अब डाकघर आई हूं. भले ही भाई दूर रहता हो लेकिन रक्षाबंधन पर उसकी कलाई पर बहन की भेजी हुई राखी बंधी होनी चाहिए. इसी तरह से बुजुर्ग शारदा बताती है भाई-भतीजे मुंबई, अकोला, बस्सी में रहते हैं. आना नहीं होता है लेकिन राखी हर साल भेजती हूं. राखी वक्त से पहुंचे, ताकि भाई भी उसे खोलते वक्त हमारा प्यार महसूस कर सकें और भाई की कलाई पर वह वक्त पर बंधे. राखी सिर्फ एक धागा नहीं, भरोसे और प्रेम का प्रतीक होती है, लेकिन इस बार बहनों को सिर्फ पोस्ट ऑफिस की कतार नहीं, बल्कि तकनीकी अड़चनों की चुपचाप लड़ाई भी लड़नी पड़ रही है.
डाक विभाग भी इस भावना को समझता है. इसी वजह से तैयारियां भी वैसी ही की गईं वाटरप्रूफ लिफाफे, मिठाई और गिफ्ट बॉक्स के लिए खास पैकेजिंग, स्पेशल काउंटर, स्टाफ में बढ़ोतरी, और देश-विदेश तक डिलीवरी के इंतजाम. राजस्थान सर्किल के 11,047 पोस्ट ऑफिस सक्रिय हैं। 47 हेड पोस्ट ऑफिस, 1270 सब हैड पोस्ट ऑफिस, 9730 ब्रांच ऑफिस और हर जगह से देश-विदेश के लिए भारी संख्या में राखियां बुक हो रही हैं अमेरिका, यूके, जापान, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, यहां तक कि चीन और रूस तक. बहनों की भावना तो सीमाएं लांघ रही है, लेकिन तकनीक उसे थाम रही है. डाक विभाग में आईटी 2.0 सॉफ्टवेयर अपग्रेडेशन के बाद जो हालात बने हैं, वे बहनों की उम्मीदों पर पानी फेर सकते हैं. पहले जहां एक मिनट में 4 डाक बुक हो रही थीं, अब 1 ही हो रही है. पुराने कंप्यूटरों पर नया सॉफ्टवेयर बार-बार हैंग हो रहा है, प्रिंटर और स्कैनर सपोर्ट नहीं कर रहे. जयपुर सिटी के सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पोस्ट ऑफिस मोहन सिंह मीणा ने कहा की हमारी पूरी कोशिश है कि बहनों की राखी समय पर और सुरक्षित पहुंचे. नया सिस्टम आया है तो थोड़ी परेशानी आती है लेकिन हम समाधान पर काम कर रहे हैं.
बहरहाल, इस बार रक्षाबंधन बहनों के लिए सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि धैर्य और भरोसे की परीक्षा भी बन गया है. डाकघर के बाहर इंतजार करती आंखें यह नहीं जानतीं कि स्क्रीन क्यों फ्रीज हो गई है उन्हें सिर्फ इतना पता है कि उस लिफाफे में उनकी ममता बंधी है और वह भाई तक वक्त पर पहुंचनी चाहिए. एक ही उम्मीद है कि तकनीक दुरुस्त हो और बहनों की भावना वक्त से उड़ान भर सके.
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