Ramgarh Dam News: जयपुर के रामगढ़ बांध में पानी लाने की योजना को अमलीजामा पहनाने से पहले बांध की मरम्मत और सौंदर्यीकरण का काम शुरू किया जाएगा. इस परियोजना का उद्देश्य न केवल बांध की संरक्षा और कार्यक्षमता में सुधार करना है, बल्कि इसके आसपास के क्षेत्र को भी आकर्षक और सुंदर बनाना है. इस कार्य के पूरा होने के बाद, बांध में पानी लाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिससे क्षेत्र के लोगों को लाभ मिलेगा और जल संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा.
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Ramgarh Dam News: जयपुर के रामगढ़ बांध में पानी लाने की कवायद शुरू हो गई है, लेकिन उससे पहले बांध की मरम्मत और सौंदर्यीकरण का काम किया जाएगा. जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत शुक्रवार को बांध की पाल पर इस काम का शिलान्यास करेंगे. लगभग 2.52 करोड़ रुपये की लागत से यह काम एक साल में पूरा करने का लक्ष्य है. इस परियोजना के तहत बांध की पाल पर बनी दो किलोमीटर लंबी क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत की जाएगी और बजट घोषणा के अनुसार पैरापेट वॉल का निर्माण भी किया जाएगा.
रामगढ़ बांध को ईआरसीपी (पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना) के तहत ईसरदा बांध से जोड़ा जाएगा, जिससे 13 जिलों के किसानों को लाभ होगा और जल संसाधनों में सुधार होगा. यह परियोजना न केवल जल संकट को कम करेगी, बल्कि क्षेत्र के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. पिछले कुछ वर्षों में, रामगढ़ बांध में पानी की आवक शुरू हो गई है, जिससे सूखे पड़े बांधों में पानी की कमी दूर हो रही है.
रामगढ़ बांध को राम जल सेतु लिंक परियोजना (संशोधित पीकेसी-ईआरसीपी) के तहत ईसरदा बांध से जोड़ा गया है. इस परियोजना का उद्देश्य रामगढ़ बांध तक पानी पहुंचाना है, जिससे क्षेत्र के जल संसाधनों में सुधार हो सके. दोनों बांधों के बीच की दूरी लगभग 120 किलोमीटर है, जिसे नहर रूट के आधार पर मापा गया है. निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब इस परियोजना के क्रियान्वयन की तैयारी है, जिससे रामगढ़ बांध में पानी की आवक सुनिश्चित हो सके.
इस परियोजना के तहत, 35 किलोमीटर की दूरी में नहर और शेष 85 किलोमीटर में पाइपलाइन बिछाई जाएगी. जब बांध में पानी आएगा, तो यह लगभग 3.50 लाख लोगों को पानी पिलाने की व्यवस्था सुनिश्चित करेगा. यह परियोजना न केवल जल संसाधनों में सुधार करेगी, बल्कि क्षेत्र के लोगों को स्वच्छ और पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
बांध के बारे में यह जानना भी जरूरी...
निर्माण: यह बांध रियासत काल में वर्ष 1903 में बाणगंगा नदी पर बनाया गया था.
जलग्रहण क्षेत्र: इसका जलग्रहण क्षेत्र 841.14 वर्ग किमी है, जो जमवारामगढ़, आमेर, शाहपुरा और विराटनगर तक फैला हुआ है.
भराव क्षमता: इसकी कुल भराव क्षमता 75.04 मिलियन क्यूबिक मीटर है.
उद्देश्य: वर्ष 1978 में राज्य सरकार ने निर्णय लिया कि इस बांध का पानी केवल पीने के उद्देश्य से उपयोग किया जाएगा.