Jaipur News: जयपुर जिला परिषद की साधारण सभा की बैठक आज उस ‘विकास’ का आईना बन गई, जिसकी बातें मंचों से तो खूब होती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में जिम्मेदारी कहीं खो जाती है.
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Jaipur News: जयपुर जिला परिषद की साधारण सभा की बैठक आज उस ‘विकास’ का आईना बन गई, जिसकी बातें मंचों से तो खूब होती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में जिम्मेदारी कहीं खो जाती है. तय समय सुबह 11 बजे की बैठक डेढ़ घंटे देरी से तब शुरू हो पाई, जब कोरम पूरा करने के लिए सदस्यों को तलाशा जा रहा था. सवाल यह उठ खड़ा हुआ. क्या विकास की दिशा तय करने वाले मंच अब केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं.
बोर्ड बैठक में दिखी गंभीरता की कमी
जिला स्तर की विकास योजनाओं पर चर्चा के लिए बुलाई गई इस बैठक में ना जनप्रतिनिधि समय पर पहुंचे ना ही अधिकारी... नतीजा यह रहा कि कोरम पूरा होने में ही डेढ़ घंटे लग गए. 91 सदस्यों वाले सदन में महज 40 सदस्य ही उपस्थित रहे. सुबह 11 बजे शुरू होने वाली बैठक करीब 12:30 बजे जाकर शुरू हो सकी.
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इतने समय तक अधिकारी और सदस्य एक-दूसरे का इंतजार करते रहे. बैठक के शुरू होते ही सदस्यों ने अधिकारियों की गैर-मौजूदगी पर नाराजगी जताई. कई सदस्यों ने सवाल उठाया कि क्या बैठक सिर्फ साइनो के लिए बुलाई जाती है. जब अधिकारी ही नहीं आते, तो फिर जनता की समस्याएं किसे बताई जाएं.
91 में से सिर्फ 40 सदस्य पहुंचे
91 में से सिर्फ 40 सदस्य ही पहुंचे. 13 विधायकों में से केवल चौमूं विधायक शिखा बराला मील मौजूद रहीं, जबकि 5 सांसदों में से सिर्फ सीकर सांसद अमराराम ने उपस्थिति दर्ज कराई. जिला प्रमुख रमा देवी चौपड़ा ने कहा कि अनुपस्थित अधिकारियों को नोटिस भेजा जाएगा और सदस्यों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर गंभीरता से कार्यवाही होगी.
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जनहित के मुद्दों पर गरमा गया सदन सड़क, पेयजल और बिजली जैसे जनहित के मुद्दे बैठक में छाए रहे. चौमूं विधायक शिखा बराला मील ने प्रहार करते हुए कहा जेडीए का क्षेत्र बढ़ रहा है, लेकिन विकास पीछे छूट गया है. सड़कें नहीं बन रहीं, नलों में पानी नहीं आ रहा. अधिकारी काम कम और राजनीति ज़्यादा कर रहे हैं. पहली बजट घोषणाओं का काम भी धरातल पर नहीं दिख रहा.
सीकर सांसद अमराराम ने भी चोमू क्षेत्र की समस्याओं पर आवाज उठाई घर-घर नल तो लगा दिए, पर उनमें पानी नहीं आता. विकास सिर्फ कागजों में रह गया है. वहीं उप जिला प्रमुख मोहन नगर ने कहा विकास की चर्चा तब हो, जब अधिकारी मौजूद हों. गांवों में सड़कें नहीं हैं, लोग कीचड़ में चलने को मजबूर हैं और अधिकारी सिर्फ फाइलों में विकास दिखा रहे हैं.
बैठक में पंचायतीराज संस्थाओं को हस्तांतरित विभागों की कार्यप्रगति, मनरेगा 2025-26 की पूरक कार्ययोजना और पट्टा प्रस्तावों पर चर्चा तो हुई, लेकिन जो सवाल सदन के बाहर गूंजा, वह यह था जब प्रतिनिधि और अधिकारी ही अपनी जिम्मेदारी से गैरहाज़िर हैं, तो आमजन तक विकास कैसे पहुंचेगा.
बैठक खत्म, सवाल बाकी
बैठक भले ही औपचारिकताओं के साथ संपन्न हो गई हो, लेकिन हकीकत यही है कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उदासीनता अब जनता के धैर्य की परीक्षा लेने लगी है. जब विकास पर चर्चा से ज्यादा वक्त कोरम पूरा करने में बीत जाए, तो यह साफ संकेत है कि सिस्टम में कहीं न कहीं गंभीरता खो गई है.
विकास के वादों और हकीकत के बीच की दूरी अब चौमूं से लेकर आमेर तक हर सड़क और हर सूखे नल में साफ दिखाई दे रही है. सवाल यही है क्या आज की बैठक को ‘औपचारिकता’ बना देने वाले कल जनता के सवालों का जवाब दे पाएंगे.
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