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World Elephant Day: क्या आपने कभी किसी फैशन शो में हाथियों को रैंप वॉक करते देखा है. वो भी सिर से पांव तक पारंपरिक गहनों, प्राकृतिक रंगों और हस्तनिर्मित पोशाकों में सजे हुए. जयपुर के हाथी गांव में इस बार विश्व हाथी दिवस पर कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिलेगा. जब धरती के सबसे विशाल जीव राजसी ठाठ के साथ रैंप पर उतरेंगे.
जयपुर की ऐतिहासिक धरा एक अनूठे और यादगार आयोजन की साक्षी बनने जा रही है. इस बार विश्व हाथी दिवस पर हाथियों के लिए फैशन शो का आयोजन किया जाएगा, वो भी पूरे पारंपरिक शाही श्रृंगार और पोशाक के साथ... राजधानी के हाथी गांव में 12 अगस्त को ये आयोजन होगा, जिसमें धरती के सबसे विशाल जीव हाथी और हथिनी रैंप पर शाही ठाठ के साथ वॉक करते नजर आएंगे.
ये आयोजन न केवल पशु प्रेम का संदेश देगा, बल्कि जयपुर की विलुप्त होती पारंपरिक कला और शाही संस्कृति को भी जीवित रखेगा. हाथी गांव के हाथीपालक आसिफ खान ने बताया कि हाथियों के श्रृंगार की कहानी जयपुर की सदियों पुरानी परंपरा से जुड़ी है. राजा-महाराजाओं के जमाने से ही हाथियों को प्राकृतिक रंगों से सजाया जाता रहा है.
हाथियों के चेहरे और शरीर पर विशेष चित्रकारी की जाती है, जिसमें फूल, बेलबूटे, धार्मिक चिह्न और राजसी प्रतीक शामिल होते हैं. उन्होंने बताया कि ये श्रृंगार केवल सजावट नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान है. हाथियों को सजाकर उन्होंने अपनी कला और परंपरा को जीवंत रखा हुआ है.
हाथी गांव विकास समिति के अध्यक्ष बल्लू खान बताते हैं कि उनकी हथिनी चंदा इस आयोजन की सबसे खास प्रतिभागी होगी. चंदा को हस्तकला से तैयार ''झूल'' भी पहनाई जाएगी, जिस पर शेर, हिरण और मोर जैसी कलात्मक कढ़ाई की गई है. इसके साथ ही 62 किलो चांदी के जेवर पहनाए जाएंगे, जो कि पांच पीढ़ी पहले उसके पूर्वजों को जयपुर राजघराने से उपहार स्वरूप मिले थे.
इन गहनों में कंठा, श्री (माथे का गहना), पायजेब, कनगोजा (कानों के आभूषण) और धूमची (पूंछ का गहना) शामिल हैं. हाथीपालक आसिफ ने बताया कि हाथी विशाल होते हुए भी शांत और समझदार जीव हैं. इन्हें प्रेम और सम्मान दिया जाए, तो ये बेहद सौम्य स्वभाव के होते हैं. इस आयोजन का एक मुख्य उद्देश्य जनमानस में पशु प्रेम को बढ़ावा देने का भी है. हर हाथी का डाइट प्लान तय होता है.
मौसम के अनुसार उन्हें ज्वार-बाजरा, रोटियां, गन्ना और फल दिए जाते हैं. साथ ही आयुर्वेदिक दवाओं और वेटनरी डॉक्टर की निगरानी से उनका मूड और स्वास्थ्य संतुलित रखा जाता है. महावत नीटू सिंह भी अपने हाथी मारुति के साथ इस इवेंट में भाग लेंगे. उन्होंने इस फैशन शो के लिए विशेष रूप से नए आभूषण और खास पोशाक तैयार करवाए हैं.
उन्होंने बताया कि इस तरह के आयोजन खास होते हैं, वो चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा पर्यटक इस आयोजन को देखें और ये शो वैश्विक स्तर पर पहचान बनाए. आयोजन में पुष्पा, बाबू, मारुति, राजकली, चमेली जैसे 15 हाथी और हथिनी भाग लेंगे. जयपुर पर्यटन के मानचित्र पर पहले से ही अपनी सभ्यता, संस्कृति, हवेलियों, किलों और शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध है.
अब हाथियों का ये फैशन शो इस सूची में नया और अनोखा आकर्षण जोड़ सकता है. आपको बता दें कि जयपुर का हाथी गांव देश का एकमात्र ऐसा गांव है, जो विशेष रूप से हाथियों के लिए बसाया गया है, यहां के हर परिवार का जीवन हाथियों से जुड़ा हुआ है, फिर चाहे वो देखभाल हो, शृंगार हो या खान-पान हो.
बहरहाल, 12 अगस्त को होने वाला ये फैशन शो महज एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि जयपुर की समृद्धशाली सांस्कृतिक विरासत, परंपरा और पशु प्रेम का जीवंत उत्सव होगा. जब चंदा अपने जेवरों में सजेगी और मारुति नई पोशाक पहन रैंप पर उतरेगी तो न केवल पर्यटकों की निगाहें थम जाएंगी, बल्कि विश्व को राजस्थान की ये शाही परंपरा का दर्शन भी मिलेगा.
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