सतीश पूनिया ने गहलोत सरकार पर साधा निशाना, कहा- शिक्षा मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए था
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सतीश पूनिया ने गहलोत सरकार पर साधा निशाना, कहा- शिक्षा मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए था

पूनिया ने डोटासरा के इस्तीफे के साथ ही इस मामले में एसीबी की तरफ से एफआईआर दर्ज किए जाने की मांग की है. 

सतीश पूनिया ने गहलोत सरकार पर साधा निशाना, कहा- शिक्षा मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए था

Jaipur: राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में भ्रष्टाचार (Corruption) को लेकर सवाल गूंज रहे हैं. दरअसल बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया (Satish Poonia) ने शिक्षा विभाग में लगे भ्रष्टाचार के आरोपों, मुख्यमंत्री के सामने शिक्षकों की तरफ से आरोपों की पुष्टि के बाद सरकार पर निशाना साधा है. पूनिया ने डोटासरा के इस्तीफे के साथ ही इस मामले में एसीबी की तरफ से एफआईआर दर्ज किए जाने की मांग की है. इसके साथ ही बीजेपी (BJP) की पूर्ववर्ती सरकारों के समय शिक्षा मंत्रियों पर लगे आरोपों के जवाब में पूनिया ने यहां तक कह दिया कि आरोप लगे थे तो उनकी पार्टी ने भी सत्ता से बाहर होकर नतीजा भुगत लिया. 

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भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई जा रही है लेकिन इस बार आवाज सरकार से ज्यादा विपक्ष उठा रहा है. खुद बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने मुख्यमन्त्री के दावों को ही आधार बनाते हुए कहा कि जीरो टॉलरेन्स की बात करने वाले मुख्यमंत्री (CM Ashok Gehlot) के सामने शिक्षकों ने तबादलों के लिए पैसे देने की बात कही. पूनिया ने कहा कि खुले तौर पर स्वीकारोक्ति हुई और पब्लिक डोमेन में इतना बड़ा खुलासा होने के बाद अब तक तो एसीबी को एफआईआर दर्ज कर लेनी चाहिए थी. बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि इस मामले में नैतिकता के आधार पर ही शिक्षा मंत्री (Education Minister) को ही इस्तीफा दे देना चाहिए था लेकिन अगर उन्होंने इस्तीफा नहीं भी दिया तो शुचिता, लोकतन्त्र और जीरो करप्शन की बात करने वाले मुख्यमंत्री को तुरन्त ही गोविन्द सिंह डोटासरा (Govind Singh Dotasara) को हटा देना चाहिए था. 

पूनिया ने कहा कि राजस्थान की सरकार के लिए यह बेहद शर्मनाक था लेकिन लगता है इस सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोपों का कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा है. राजस्थान की जनता भी यह जानना चाहती है कि भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेन्स की बात करने वाले मुख्यमंत्री की नाक के नीचे अगर कोई भ्रष्टाचार हो रहा तो उसका कारण क्या है? पूनिया ने कहा कि पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक भरत सिंह (Bharat Singh) खुद कई बार अपनी ही सरकार के मंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा चुके हैं. दीपेन्द्र सिंह शेखावत भी इन्हीं डोटासरा के सामने भ्रष्टाचार की बात कह चुके हैं लेकिन सरकार कोई कार्रवाई क्यों नहीं कर रही?

पूनिया ने शिक्षा मंत्री डोटासरा पर सवाल उठाए तो उनकी सरकारों के समय के शिक्षा मंत्रियों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर भी सवाल हुए. इस पर पूनिया ने कहा कि उनकी सरकार के समय आरोप लगे थे तो उनकी पार्टी सत्ता से बाहर हो गई. पूनिया ने कहा कि कहीं कोई कमजोरी रही होगी, जिसके कारण उनकी पार्टी सत्ता में नहीं आई लेकिन इन सबसे पल्ला झाड़ने से कुछ नहीं होगा. बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि अगर धुंआ है तो कही आग भी लगी ही होगी. साथ ही पूनिया ने कहा कि भ्रष्टाचार के आरोपों की कोई प्रतिस्पर्द्धा नहीं हो सकती. इसके साथ ही उन्होंने पहले लगे आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि अबकी बार तो खुद मुख्यमंत्री की मौजूदगी में आरोप लगे हैं. 

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सतीश पूनिया के साथ ही बीजेपी के दूसरे नेता सरकार (Rajasthan Government) की घेराबंदी कर रहे हैं लेकिन उधर कांग्रेस की टीम भी पूर्ववर्ती सरकार को लेकर सोशल मीडिया पर सक्रिय हो रही है. इन सबके बीच सवाल यह उठ रहे हैं कि कौन भ्रष्टाचारी है और कौन नहीं? क्या किसी एक के भ्रष्टाचार से दूसरे को भी ऐसा करने का लाइसेन्स मिल जाता है और सवाल यह भी कि क्या भ्रष्टाचार का नतीजा किसी भी पार्टी को सिर्फ चुनावों में भुगतना होता है और उससे पहले मनमानी करने की छूट होती है?

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