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Rajasthan News: राजस्थान सरकार की वरिष्ठ नागरिक तीर्थयात्रा योजना-2025 के तहत जयपुर जिले के 4,905 वरिष्ठ नागरिकों ट्रेन और प्लेन से तीर्थ यात्रा करेंगे. जयपुर जिला प्रभारी मंत्री जोगाराम पटेल, देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत और जयपुर कलेक्टर डॉक्टर जितेन्द्र कुमार सोनी ने ऑनलाइन लॉटरी निकालकर सफल आवेदकों का चयन किया. चयनित यात्रियों में 526 लोग हवाई मार्ग से नेपाल के काठमांडू स्थित पशुपतिनाथ मंदिर जाएंगे, जबकि 4,379 लोग रेल मार्ग से एसी ट्रेन से 15 प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा करेंगे.
इन स्थलों में रामेश्वरम-मदुरई, कामाख्या-गुवाहटी, गंगासागर-कोलकत्ता, गोवा के मंदिर एवं अन्य स्थल चर्च आदि, जगन्नाथपुरी-कोणार्क, तिरूपति-पद्मावती, द्वारकापुरी-नागेश्वर-सोमनाथ, बिहार-शरीफ, पटना साहिब, पटना, बिहार, मथुरा-वृंदावन-बरसाना-आगरा-अयोध्या, महाकालेश्वर, उज्जैन-ओंकारेश्वर-त्रयम्बकेश्वर-घृष्णेश्वर-एलोरा, वैष्णोदेवी-अमृतसर-वाघा बोर्डर, श्री हज़ूर साहिब नांदेड़, महाराष्ट्र, सम्मेदशिखर-पावापुरी-वाराणसी-सारनाथ, हरिद्वार-ऋषिकेश-अयोध्या-वाराणसी-सारनाथ शामिल हैं. पहली ट्रेन 1 सितंबर को रवाना होगी.
मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक हमारी धरोहर हैं. यह योजना सिर्फ धार्मिक स्थल दिखाने का प्रयास नहीं, बल्कि उन बुजुर्गों को आध्यात्मिक संतोष देने का प्रयास है, जिन्होंने जीवनभर परिवार और समाज के लिए त्याग किया. गौरतलब हैं कि इस बार जयपुर से 18 हजार 423 यात्रियों ने 11 हजार 378 आवेदन के जरिए यात्रा की इच्छा जताई है. ऐसे में औसतन हर चौथे यात्री को जयपुर से यात्रा का मौका मिलेगा.
देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने बताया कि वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना के तहत इस वित्तीय वर्ष में 56 हजार बुजुर्गों को ट्रेन और विमान से घर से तीर्थाटन तक सफर कराने जा रही है. 50 हजार यात्री ट्रेन से और 6 हजार यात्री हवाई जहाज से धार्मिक स्थलों के दर्शन करेंगे. देवस्थान विभाग की इस योजना के तहत प्रदेशभर में कुल 1 लाख 15 हजार 302 आवेदनों के जरिये 1 लाख 84 हज़ार 494 बुजुर्गों ने तीर्थ यात्रा पर जाने की इच्छा जताई हैं. सभी जिलों में कोटा तय होने के बाद सफल आवेदकों की लॉटरी के जरिए चयन किया जा रहा हैं.
राजस्थान सरकार ने न सिर्फ यात्रा का खर्च उठाया है, बल्कि सुरक्षा, स्वास्थ्य और सुविधा का भी पूरा ध्यान रखा है. हर दल के साथ चिकित्सा टीम, सुरक्षाकर्मी और सरकारी कर्मचारी रहेंगे. 70 वर्ष से अधिक उम्र के यात्री अपने साथ एक अटेंडेंट भी ले जा सकते हैं. साथ ही, यदि पति-पत्नी में से एक की आयु 60 वर्ष या उससे अधिक और दूसरे की आयु 58 वर्ष है तो दोनों को एक साथ यात्रा की अनुमति है. सरकार का यह प्रयास उन बुजुर्गों के लिए सम्मान का संदेश भी है, जिन्होंने पूरी जिंदगी परिवार और समाज को संभाला, पर खुद की इच्छाओं को हमेशा पीछे रखा. अब उनके चेहरे पर उम्मीद की रोशनी है, क्योंकि यह यात्रा केवल तीर्थयात्रा नहीं, सपनों की उड़ान है.
बहरहाल, इनमें कोई अपनी जवानी के दिनों की अधूरी मुराद पूरी करेगा, तो कोई जीवन के इस पड़ाव पर आध्यात्मिक शांति की तलाश में निकलेगा. कोई पहली बार रेल से इतनी लंबी यात्रा करेगा, तो किसी के लिए हवाई यात्रा का सपना सच होगा. रामेश्वरम, द्वारकापुरी, वैष्णो देवी, तिरुपति, गंगासागर, मथुरा-वृंदावन जैसे धार्मिक स्थलों की यह यात्रा सिर्फ दर्शन का अवसर ही नहीं, बल्कि बुजुर्गों के आत्मसम्मान, मानसिक सुकून और जीवन में नई ऊर्जा का माध्यम बनेगी.
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