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Sikar News: राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार की बजट घोषणा के मुताबिक, लक्ष्मणगढ़ के राजकीय जिला चिकित्सालय में कैंसर केयर यूनिट (डे केयर सेंटर) शुरू किया गया है.
जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्साधिकारी डॉ. अटल भास्कर ने बताया कि निदेशालय से प्राप्त निर्देशानुसार कैंसर जांच, निदान, उपचार, फॉलोअप किमोथेरेपी एवं पैलेटिव केयर आदि सुविधाओं हेतु आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए डेडिकेट ओपीडी एवं बेड रिजर्व कर डे केयर सेंटर यूनिट शुभारंभ किया है.
कैंसर केयर यूनिट (डे केयर सेंटर) का नोडल अधिकारी वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ मनोज कुमार को लगाया गया है , जिनको राज्य सरकार द्वारा तुलसी रिजनल कैंसर सेन्टर, मेडिकल कॉलेज बीकानेर में विशेष प्रशिक्षण दिया गया है. नोडल अधिकारी प्रभारी डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि प्रारम्भिक अवस्था में पहचान होने पर कैंसर का उपचार संभव है.
अतः किसी भी मरीज मे कैंसर के लक्षण पाए जाने पर मरीज को सर्वप्रथम एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर या एसपी मेडिकल कॉलेज बीकानेर भेजा जाएगा, जहां एक बार इलाज शुरू करने के पश्चात उसका ना केवल फॉलोअप लक्ष्मणगढ़ जिला चिकित्सालय में किया जा सकेगा. साथ ही एडवांस स्टेज वाले मरीजों की पेलिएटव केयर भी यहां पर की जा सकेगी.
इस प्रकार मरीज को अनावश्यक बार-बार जयपुर या बीकानेर नहीं जाना पड़ेगा और इससे मरीज को मानसिक, शारीरिक एवं आर्थिक रूप से राहत मिलेगी. इस अवसर पर उपनियंत्रक डॉ. शीशराम चौधरी, डे केयर सेंटर नर्सिंग प्रभारी मोहन खींची आदि उपस्थित रहे.
पढ़िए राजस्थान की एक और खबर
Jaipur News: शिक्षा विभाग ने स्कूलों में नामांकन बढ़ाने को लेकर नई पहल शुरू की है. कोविड के बाद प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कम हुए नामांकन को बढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग ने अब नई पहल शुरू करते हुए घुमंतू प्रजाति के बच्चों को बिना किसी दस्तावेज के स्कूलों में प्रवेश देने का निर्णय लिया है.
इसके चलते शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के निर्देश पर प्राथमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने प्रदेश के सभी संयुक्त निर्देशकों को लेटर जारी कर निर्देश दिए हैं. प्रवेश उत्सव के दौरान प्रदेश के सभी राजकीय स्कूल में घुमंतु प्रजाति के बच्चों को बिना किसी दस्तावेज के प्रवेश दिया जाए.
इसमें घुमंतु अर्ध घुमंतु विमुक्त व समाज कल्याण विभाग में की सूची में रजिस्टर्ड उन तमाम जातियां को शामिल किया गया है. इसके लिए शिक्षा विभाग ने एक प्रारूप जारी किया है, जिसमें प्रवेश लेने वाले बच्चों से संबंधित जानकारी भरी जाएगी.
इसके तहत बच्चों का जिला तहसील गांव माता-पिता का नाम एवं जाति को भरकर उन्हें स्कूल में प्रवेश दिया जाएगा. इस पहल के पीछे शिक्षा विभाग उन घुमंतू प्रजाति के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने व कॉविड के बाद कम हुए नामांकन को बढ़ाने का प्रयास कर रहा है.
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