स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 में इस तरह होगा अंकों का मूल्यांकन, हर गलती पर कटेगा नंबर!

Jaipur News: अब सिर्फ सड़क चमकाना काफी नहीं होगा. स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26 में अच्छी रैंकिंग चाहिए तो शहरों को अपनी सोच और काम दोनों बदलने होंगे. इस बार केंद्र सरकार की नजर सिर्फ कॉलोनियों या मुख्य सड़कों पर नहीं, बल्कि उन हर जगहों पर होगी, जहां लोग ज्यादा पहुंचते हैं. चाहे वो टूरिस्ट स्पॉट हों, हेरिटेज एरिया, धार्मिक स्थल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन या बाजार. यही नहीं, स्कूलों में बच्चों का व्यवहार कैसा है, ये भी रैंकिंग तय करेगा.
 

स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 में इस तरह होगा अंकों का मूल्यांकन, हर गलती पर कटेगा नंबर!
Image Credit: Jaipur News

स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-2026 अब सिर्फ सफाई की नहीं, बल्कि शहर की सोच, व्यवहार और जिम्मेदारी की परीक्षा बनने जा रहा है. इस बार अच्छी रैंकिंग पाने के लिए शहरों को केवल सड़कों और कॉलोनियों तक सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि उन हर जगह पर फोकस करना होगा जहां सबसे ज्यादा भीड़ पहुंचती है. चाहे वह टूरिस्ट स्पॉट हों, हेरिटेज साइट्स, धार्मिक स्थल हों या बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और बड़े बाजार. केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय की ओर से जारी नई टूलकिट ने साफ कर दिया है कि अब स्वच्छता को इवेंट नहीं, बल्कि आदत की तरह परखा जाएगा.

सर्वेक्षण टीम इस बार उन जगहों पर ज्यादा नजर रखेगी, जहां रोज हजारों लोग आते-जाते हैं. यानी अगर शहर के प्रवेश द्वार, बाजार या धार्मिक स्थल गंदे मिले, तो पूरी रैंकिंग पर असर पड़ना तय है. इस बार सर्वेक्षण की सबसे बड़ी खासियत है नागरिकों की निर्णायक भूमिका. अब रैंकिंग अफसरों की फाइलों से नहीं, बल्कि लोगों के मोबाइल फोन और फीडबैक से तय होगी. कुल 12,500 अंकों में से 1,000 अंक सीधे सिटीजन फीडबैक से जुड़े हैं. मतलब साफ है अगर नागरिक संतुष्ट हैं तो शहर आगे बढ़ेगा, और अगर नाराज हैं तो सफाई के सारे दावे धरे रह जाएंगे.

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स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 में अंकों का मूल्यांकन इस तरह होगा-
ओडीएफ-ओडीएफ -ओडीएफ वॉटर 1,000 अंक.
गार्बेज फ्री सिटी: 1,000 अंक.
ग्राउंड असेसमेंट सिटीजन फीडबैक-10,500 अंक.
ग्राउंड असेसमेंट और फीडबैक को भी चार फेज में बांटा गया है और हर फेज के बाद अंक दिए जाएंगे.


2026 से जमीनी हकीकत की असली परीक्षा शुरू होगी
स्वच्छता सर्वेक्षण की स्वच्छता की नई पहल, बढ़ाएं हाथ, करें सफाई साथ थीम रखी गई है. यानी यह सिर्फ नगर निगम का काम नहीं, बल्कि पूरे शहर की सामूहिक जिम्मेदारी है. नागरिक अब सिर्फ दर्शक नहीं, बल्कि जज की भूमिका में होंगे. एक अच्छा फीडबैक शहर को टॉप रैंकिंग की ओर ले जा सकता है, वहीं लापरवाही पूरे साल की मेहनत पर पानी फेर सकती है. मार्च 2026 से जमीनी हकीकत की असली परीक्षा शुरू होगी. फील्ड असेसमेंट के दौरान केंद्र की टीम शहर की सड़कों, मोहल्लों, सार्वजनिक स्थलों और बाजारों का मौके पर निरीक्षण करेगी. जो दिखेगा वही माना जाएगा. अगर किसी भी स्तर पर गलत जानकारी दी गई, तो सीधे अंकों में कटौती होगी. नई टूलकिट में एक और बड़ा बदलाव किया गया है. स्वच्छ शहर जोड़ी’ नाम से नई अवॉर्ड कैटेगरी.

स्वच्छता की शुरुआत अब किताबों और कक्षाओं से होगी
अब एक स्वच्छ शहर अपने आसपास के किसी शहर को स्वच्छता के गुर सिखाकर, दोनों मिलकर अवॉर्ड जीत सकेंगे. इससे प्रदेश के बेहतर प्रदर्शन करने वाले शहरों को अतिरिक्त बढ़त मिल सकती है. इस बार स्कूलों को भी स्वच्छता की रैंकिंग से जोड़ दिया गया है. बच्चों के व्यवहार में बदलाव को एक नए इंडिकेटर के रूप में शामिल किया गया है. यानी स्कूलों में स्वच्छता की आदतें, खुले में शौच और यूरिनेशन रोकने की जागरूकता, कचरा इधर-उधर न फेंकने की सीख ये सब अब शहर की रैंकिंग तय करेंगे. साफ है कि स्वच्छता की शुरुआत अब किताबों और कक्षाओं से होगी. खुले में शौच और यूरिनेशन रोकने के लिए भी नया इंडिकेटर जोड़ा गया है. निकायों को जरूरत के मुताबिक यूरिनल्स की व्यवस्था करनी होगी, खासकर बड़े शहरों में. यह संकेत है कि अब स्वच्छता केवल सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता से भी जुड़ गई है.

बहरहाल, अंकों के गणित की बात करें तो ओडीएफ, गार्बेज फ्री सिटी और ग्राउंड असेसमेंट के साथ सिटीजन फीडबैक को सबसे ज्यादा वेटेज दिया गया है. कुल मूल्यांकन को चार चरणों में बांटा गया है और हर चरण के बाद अंकों का आकलन होगा. यानी पूरे साल शहर की परफॉर्मेंस पर नजर रखी जाएगी. सबसे अहम बात यह है कि नागरिक पूरे साल ऑनलाइन फीडबैक दे सकेंगे. यानी स्वच्छता अब किसी एक दिन की कवायद नहीं, बल्कि साल भर की जिम्मेदारी है.

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Sandhya Yadav

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संध्या यादव एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया में 8 वर्षों का एक्सपीरिएंस है. वर्तमान में वे Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में सीनियर सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. संध्या की मुख्य Expertise राजस्थान की क्षेत्रीय राजनीति, क्राइम, प्रशासनिक फैसलों और हाइपरलोकल खबरों की सटीक एवं इन-डेप्थ कवरेज में है. लखनऊ यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर्स की डिग्री हासिल करने वाली संध्या ने Zee News से पहले Newstrack और ETV Bharat जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल न्यूज़ संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं. जमीनी खबरों की गहरी समझ रखने वाली संध्या ने राजस्थान विधानसभा चुनाव, पंचायत चुनाव, गहलोत-पायलट राजनीतिक संकट और कोविड-19 महामारी समेत कई बड़े और जटिल घटनाक्रमों की बेहतरीन कवरेज की है. आप संध्या यादव से सीधे SANDHYA.YADAV@zeemedia.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा राजस्थान की खबरों के रियल-टाइम अपडेट्स के लिए आप उनसे एक्स (https://x.com/Journosandhya) और लिंक्डइन (https://in.linkedin.com/in/sandhya-yadav-5734ba144) पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.
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