अक्षय तृतीया पर ठाकुरजी की हुई खास पूजा, कलंगी श्रृंगार संग लगा शीतल व्यंजनों का भोग

अक्षय तृतीया का अबूझ मुहूर्त होने के साथ ठाकुरजी की नित्य सेवा में बदलाव हुआ. ठाकुरजी ने जामा-पायजामा के बजाय धोती-दुपट्टा धारण किया. 

अक्षय तृतीया पर ठाकुरजी की हुई खास पूजा, कलंगी श्रृंगार संग लगा शीतल व्यंजनों का भोग
अक्षय तृतीया का अबूझ मुहूर्त होने के साथ ठाकुरजी की नित्य सेवा में बदलाव हुआ.

Jaipur: कोरोना (Corona) का साया अक्षय तृतीया (Akshay Tritiya) पर होने से न तो मंदिरों में भक्त पहुंच सके और न ही शहनाई की गूंज सुनाई दे रही है. 

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अक्षय तृतीया का अबूझ मुहूर्त होने के साथ ठाकुरजी की नित्य सेवा में बदलाव हुआ. ठाकुरजी ने जामा-पायजामा के बजाय धोती-दुपट्टा धारण किया. 

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मौसम में बदलाव के अनुसार, ठाकुरजी को शीतल व्यंजनों का भोग लगना शुरू हुआ, तो ठंडे इत्रों की सेवा भी शुरू हुई. ठाकुरजी को चंदन का लेप हुआ. मिश्री, सत्तु का भोग लगाया गया. मलमल और सूती की पोशाक धारण करवाई गई. सिर पेच हटकर कलंगी शृंगार हुआ. 

क्या कहना है पुजारी का
गोविंददेवजी मंदिर प्रवक्ता मानस गोस्वामी (Manas Goswami) ने बताया कि शहर के आराध्य गोविंददेवजी मंदिर में अक्षय तृतीया पर ठाकुरजी को पोशाक में पीले रंग की धोती-दुपट्टा धारण करवाई गई. इसके बाद ठाकुरजी को ठंडे व्यंजनों में शर्बत, ठंडाई, सत्तु, भीगी हुई चना दाल और पंचमेवा के साथ तरबूज आदि का भोग लगाया गया. अब श्रावण मास में झूला झांकी तक ठाकुरजी को धोती—दुपट्टा धारण करवाया जाएगा. वहीं, ठंडे व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा. 

लगाया गया कई व्यंजनों का भोग
मंदिर श्री आनंदकृष्ण बिहारीजी में अक्षय तृतीया पर ठाकुरजी को ठंडाई, शरबत, सत्तु, आमरस, खरबूजा, मतीरा आदि ठंडे व्यंजनों का भोग लगाया. वहीं ठाकुरजी को नरवर रूप की पोशाक धारण करवाई गई. चौडा रास्ता स्थित मंदिरश्री दामोदरजी में भी ठाकुरजी के पहनावे और भोग राग में बदलाव हुआ.