नाहरगढ़ और आमेर किले में सैलानियों की बढ़ी संख्या, बघेरों की चलकदमी से डर रहे लोग
X

नाहरगढ़ और आमेर किले में सैलानियों की बढ़ी संख्या, बघेरों की चलकदमी से डर रहे लोग

नाहरगढ़ अभयारण्य वन क्षेत्र में बघेरे के अलावा सियार, लोमड़ी समेत कई अन्य प्रजातियों के वन्यजीव प्रवास करते हैं. 

नाहरगढ़ और आमेर किले में सैलानियों की बढ़ी संख्या, बघेरों की चलकदमी से डर रहे लोग

Jaipur: अब कोरोना (Corona) का संक्रमण घटते ही नाहरगढ़ किले (Nahargarh Fort) और आमेर किले (Amer Fort) पर सैलानियों की आवाजाही बढ़ गई है. वहीं, दूसरी ओर यहां इन दिनों बघेरों की चहलकदमी भी बढ़ गई है.

वॉच टावर, वाटर पॉइंट पर लगातार देखे जा रहे हैं, जिससे भय की स्थिति भी बनी हुई है. कारण कि कभी भी अनहोनी हो सकती है.

यह भी पढे़ं- जयपुर: 5 दिनों से सैलानियों के लिए बंद है नाहरगढ़ फोर्ट, जानिए वजह

 

नाहरगढ़ वन अभयारण्य क्षेत्र (Nahargarh Forest Sanctuary Area) में करीबन 20 से ज्यादा बघेरे प्रवास कर रहे हैं. हाल हीं में कई जगह शावक भी नजर आ रहे हैं. जैसे आमेर के वॉच टावर पर शावकों के साथ तो कभी जोडे के साथ बघेरों की चहलकदमी देखी जा रही है. ऐसे में साफ है. यहां लगातार इनकी संख्या भी बढ़ रही है. इनमें शामिल चार-पांच बघेरे नाहरगढ़ किले के बाउंड्री में ही रहते हैं और वे पहले कभी कभार ही दिखते थे, लेकिन यहां पर लॉकडाउन के दौरान लोगों की आवाजाही घटी तो, वे किले के आसपास दिन में भी घूमते दिखे हैं.

यह भी पढे़ं- Rajasthan Weather Update: करीब डेढ़ दर्जन जिलों में बारिश का यलो अलर्ट जारी

 

इन दिनों वॉच टावर के आसपास एक बघेरा का जोड़ा लगातार दिख रहा है. कई बार सैलानियों ने उनके वीडियो बनाकर भी सोशल साइट्स पर अपलोड किए हैं. नाहरगढ़-आमेर किले पर लगातार इनकी बढ़ रही चलकदमी लोगों के लिए महंगी साबित हो सकती है क्योंकि किले पर अलसुबह से देर शाम तक लोगों की आवाजाही बरकरार रहती है. कई लोग बच्चों के साथ यहां दौड़ते भी नजर आते हैं तो कई पहाड़ियों पर चढ़ते भी दिखते हैं. अल सुबह लोग मॉर्निंग वॉक के लिए नाहरगढ रोड और आमेर रोड मावठा पर दौडते देखे जा सकते हैं. ऐसे में कभी भी बघेरे और मानव के आमना-सामना हो सकता हैं, जिससे कभी भी बड़ी घटना हो सकती है. नाहरगढ़ किले की सैर महंगी पड़ सकती है. 

क्या कहना है वन अधिकारियों का
वन अधिकारी का कहना है कि मानव ने इनके तमाम जगहों पर कब्जा कर रहा है. अब लोग इनके वन क्षेत्रों में घुस रहे हैं. मॉर्निंग वॉक हो या भ्रमण के लिए जा रहे. पहले आदिमानव इन जानवरों के साथ रहते था. अब एक वक्त फिर से आ रहा है. इन जानवरों के साथ रहना होगा.

10 साल में प्रदेशभर के जंगलों का संरक्षण बेहतर होगा
वन विभाग लगातार वनों की रक्षा और वन्यजीवों की रक्षा के लिए प्रयासरत है लेकिन अब वन विभाग के साथ आमजन का भी कर्तव्य बनता है. धीरे-धीरे नाहरगढ़ और आमागढ़ वन क्षेत्रों का संरक्षण सहित आने वाले 10 साल में प्रदेशभर के जंगलों का संरक्षण बेहतर होगा. वनों का संरक्षण इस लिए नहीं किया जा रहा कि पर्यटन बढ़े, संरक्षण इसलिए किया जा रहा है कि वनो, वन्यजीवों और जैव विविधता का संरक्षण हो. संरक्षण पर ही मानव का अस्तिव है. भविष्य में वनों और वन्यजीवों का संरक्षण दिखाई देगा. इन दिनों थोडी़ ज्यादा साइटिंग हो रही है. इस वजह से लोग जंगल में न जाए इसको लेकर सख्ती बरत रहे है, किले पर भी मॉनिटरिंग कर रहे है, ताकि कोई अनहोनी न हों. साथ ही जंगल में घुसने पर जुर्माना भी कर रहे हैं.

विभाग ने किए कई इंतजाम
नाहरगढ़ अभयारण्य वन क्षेत्र में बघेरे के अलावा सियार, लोमड़ी समेत कई अन्य प्रजातियों के वन्यजीव प्रवास करते हैं. विभाग ने इनकी भोजन को लेकर इंतजाम किए. किले के वाटर पाइंट बने है तो, कई जगह लोग पानी की कुंडी रखे हुए हैं, जहां इन वन्यजीवों को पानी मिल जाता है. साथ ही आबादी के समीप होने से प्रेबेस (भोजन) भी मिल जाता है.

 

Trending news