कर्ज भरी सड़क पर ट्रक चलाने को मजबूर ट्रांसपोर्टर्स, सफर के अंत में मिलता है तो बस नुकसान

देश में पहले कोरोना ने और लगातार डीजल के बढ़ते दामों ने ट्रांसपोर्टर्स (Transporters) की कमर तोड़कर रख दी है.

कर्ज भरी सड़क पर ट्रक चलाने को मजबूर ट्रांसपोर्टर्स, सफर के अंत में मिलता है तो बस नुकसान
फाइल फोटो

Jaipur : देश में पहले कोरोना ने और लगातार डीजल के बढ़ते दामों ने ट्रांसपोर्टर्स (Transporters) की कमर तोड़कर रख दी है. बाकी कसर प्रदेश में पुलिस और परिवहन विभाग चालान बनाकर जीना दुभर कर दिया है. अब यहां तक नौबत आ गई कि ट्रक ट्रांसपोर्टर्स आत्महत्या करने को मजबूर हो रहा है. क्योंकि सड़क पर ट्रक चलाना दुभर हो गया है. जबकि केंद्र सरकार की ओर से 31 अक्टूबर तक छूट दे रखी है, फिर भी ट्रांसपोटर्स को लूटने की कोशिश की जा रही है. ऐसे में ट्रांसपोर्टर्स 6 से अधिक प्रकार टैक्स देने के बाद भी कहीं कोई राहत नहीं मिल रही है. ऐसे में ट्रक ट्रांसपोटर्स कर्ज के नीचे दबता जा रहा है.

जयपुर ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स एसोसिएशन (Jaipur Transport Operators Association) के अध्यक्ष अनिल आनंद ने बताया कि देशा में सबसे पहले कोरोना ने दो साल से ट्रांसपोटर्स की कमर तोडकर रख दी है. अब बाजार में ट्रांसपोर्ट नहीं मिलने से गाड़ियां खड़ी है. ऐसे में ट्रक मालिकों के सामने उनकी बैंक किश्त देना मुश्किल हो रहा है तो वहीं, कुछ गाडियों में ट्रांसपोर्ट मिलता है तो सड़क पर पुलिस और परिवहन विभाग चलने नहीं देता है. ये विभााग अपने टारगेट पूरा करने के लिए ऑनलाइन चालान बना रहा है. ऐसे में ट्रांसपोटर्स पहले से कर्ज के नीचे दब रहे हैं तो पुलिस और परिवहन विभाग भ्रष्ट्राचार इतना फैला रखा है कि इनको एंट्री फीस नहीं देते हैं तो ऑनलाइन चालान बनाकर ट्रांसपोर्टर्स को आत्महत्या करने पर मजबूर कर रहे हैं. जबकि केंद्र सरकार ने 31 अक्टूबर तक ट्रांसपोर्टर्स को छूट दे रखी है तो स्पीड, फिटनेस के नाम पर वसूली कर रहे हैं. आखिर में ट्रांसपोर्टर्स जाए तो कहां जाए पहले से ही बाजार में व्यापार नहीं होने से ट्रांसपोर्ट नहीं मिल रहा है. ऐसे में कितना कर्ज कर सड़क पर गाड़ी चलाएगा, मजबूरन एक ही रास्ता बचता है कि आत्महत्या. 

ट्रक ट्रांसपोर्टर्स अतुल गुलाटी का मानना है कि 10 साल पहले जो भाड़ा लिया जाता था वही आज भी किराया—भाड़ा लिया जा रहा है जो कि ट्रक को चलाना मुश्किल हो रहा है. क्योंकि 10 साल पहले डीजल की रेट और आज डीटल की रेट कम्पयेर करे तो डीजल 100 के रूपए पार कर गया है. ऐसे में डीजल के बढ़ते दाम ट्रांसपोटर्स के लिए मुसिबत बन रहा है. ऐसे में केंद्र सरकार को डीजल—पेट्रोल को जीएसटी में लाए ताकि ट्रक संचालकों को राहत मिल सके. जब तक डीजल जीएसटी में नहीं आएगा ट्रांसपोर्टर्स इस व्यवसायिक को चला नहीं पाएगा. एक गाड़ी से 15 लोगों का रोजगार चलता है. जब डीजल महंगा होता रहेगा तो कौन ट्रक संचालित करेगा. केंद्र सरकार से हमारी मांग है कि ट्रांसपोर्टर्स व्यवसायिक को बचाना है तो डीजल को जीएसटी में लाना होगा.

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ट्रक ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि आज हालात ऐसे बने हुए हैं कि जब आरटीओ कार्यालय में फिटनेस बनाने जाए तो वहां फिटनेस बनाने से पहले ऑनलाइन चालान जमा कराने का दबाब बनाया जाता है. ये बताया जाता है कि आपके 5 चालान बने हुए हैं जबकि ऑनलाइन चालान बनाया जाता है तो इसकी ट्रांसपोर्टर्स को मैसेज नहीं दिया जाता है. ऐसे में चालान 50 हजार और 80—80 हजार के होना बताया जाता है. ऐसे में ट्रांसपोर्टर्स इन चालानों को देखकर मर जाता है. सबसे पहले तो ऑनलाइन के चालान हो तो तुरंत ट्रांसपोटर्स को तुरंत बताया जाए ताकि ट्रांसपोर्टर्स अपडेट रहे. आज हालात ये बने हुए है कि ट्रांसपोर्टर्स को रात—रात को नींद नहीं आती है. शराब पीकर सोने की कोशिश करता है. हर ट्रांसपोर्टर्स रातभर ट्रक के संचालन की स्थिति देखने के लिए जीपीएस पर देखता रहता है कहीं कोई चालान नहीं हो जाए.