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Jaipur News: राजस्थान में भरतपुर के बयाना के बाद अब श्रीमाधोपुर के अजीतगढ़ गांव में भी खांसी की सरकारी दवा पीने के बाद दो मासूम बच्चों की तबीयत बिगड़ गई. मंडा हाथी दे CHC पर इलाज के दौरान दी गई डेक्सट्रोमेथॉरफन हाइड्रोब्रोमाइड सिरप से 3 साल का किट्टू और डेढ़ साल का टिंकू अचानक बेहोश हो गए.
परिजन घबरा गए और तुरंत निजी अस्पताल ले गए, जहां से दोनों बच्चों को गंभीर हालत में जयपुर के जेके लोन अस्पताल रेफर किया गया. मां सोनम ने बताया कि बच्चों को सर्दी-खांसी थी. इसलिए गांव के पास के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पर डॉक्टर को दिखाया. डॉक्टर ने सिरप सहित कुछ दवाएं दीं, लेकिन दवा देने के कुछ ही मिनटों बाद दोनों बच्चे बेहोश हो गए.
जेके लोन अस्पताल में बच्चों को ICU में दो दिन भर्ती रखा गया. डॉक्टरों के अनुसार, बच्चों की हालत अब स्थिर है और शनिवार को उन्हें छुट्टी दी जा सकती है. संयोग से आज किट्टू का जन्मदिन भी है, जिसे अस्पताल में ही बिताना पड़ा. इस मामले ने एक बार फिर प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं. क्योंकि इसी तरह का मामला हाल ही में बयाना में सामने आया था, जहां सरकारी दवा पीने से बच्चों समेत डॉक्टर की भी तबीयत बिगड़ गई थी.
CMHO भरतपुर गौरव कपूर ने भी माना कि संबंधित डॉक्टर ने खुद भी वही दवा ली थी, जिससे तबीयत खराब हुई. अब सवाल उठता है कि क्या बच्चों को दी गई दवा असली थी या खराब स्टॉक का हिस्सा... चिकित्सा विभाग अभी तक चुप है. परिजन बेहाल हैं और पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं. दवा वितरण में लापरवाही की जांच अब अनिवार्य हो गई है. दवा विभाग ने फिलहाल संदिग्ध डेक्सट्रोमेथॉरफन सिरप पर रोक लगा दी है और सैंपल लैब जांच के लिए भेजे हैं, लेकिन सवाल यही है.
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