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Vastu Tips for Jaipur : प्रोफेसर विनोद शास्त्री के बताया कि वास्तु शास्त्र प्राचीन वैज्ञानिक शास्त्र है, जो मानव के लिए सुख शांति एवं समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है, वास्तु के स्थूल रूप से तीन भेद हैं-आवासीय व्यावसायिक एवं देव मंदिर आदि. राजस्थान की बात करें तो तीन-चार तरह के क्षेत्र उपलब्ध हैं. अरावली पर्वत श्रृंखला में पर्वतीय वास्तु की आवश्यकता है जैसे सिरोही माउंट आबू कुंभलगढ़ उदयपुर चित्तौड़गढ़ आदि.
प्रोफेसर विनोद शास्त्री बताते हैं कि राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्र में मिट्टी पत्थर एवं छप्पर के घरों की विशेष वास्तु शास्त्रीय व्यवस्था होती है, पानी की प्रचुरता वाले प्रदेश जैसे कोटा, उदयपुर ,बांसवाड़ा ,बूंदी आदि में पानी की अधिकता होने से भिन्न प्रकार का वास्तु भवन निर्माण में काम आता है.
वहीं जयपुर शहर एक ऐसा शहर है जहां पानी भी है रेगिस्तान भी है तो पर्वत श्रृंखला भी है. जयपुर जब बसा तो पूरे वास्तु शास्त्र के अनुसार शहर की बनावट बनाई गयी थी. ये ही वजह है राजस्थान के सबसे अमीर जिलों में जयपुर नंबर वन है और यहां रह रहे लोगों की औसत आय भी ज्यादा तुलनात्मक रूप से ज्यादा होती है.
जयपुर शहर में उत्तर पूरब पश्चिम दक्षिण सभी दिशाओं को देखते हुए भवन मंदिर एवं शासकीय भवन निर्मित किए गए और अधिकतर दक्षिण मुखी भवन वाले लोगों को प्रगति एवं प्रतिष्ठा प्राप्त हुई. हालांकि ऐसा उत्तर मुखी भवनों के लिए ऐसा नहीं कहा जा सकता है.
प्रोफेसर विनोद शास्त्री मानते हैं कि जयपुर के पूर्व मुखी एवं पश्चिम मुखी भवन वाले लोग भी बहुत प्रगति कर रहे हैं. हालांकि यहां ये बताना जरूरी है कि राशि नक्षत्र एवं गृह योगी के आधार पर भी भावनाओं का स्थान निर्धारण हर व्यक्ति को सुबह-सुबह फल प्रदान करता है.
प्रोफेसर विनोद शास्त्री
महासचिव
राजस्थान ज्योतिष परिषद एवं शोध संस्थान
जयपुर
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