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Jaipur richest district of Rajasthan: राजस्थान का प्रमुख शहर जयपुर न केवल अपनी सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यह आर्थिक दृष्टि से भी बेहद समृद्ध है. इसे भारत का सबसे अमीर शहरों में से एक माना जाता है, जिसकी अनुमानित जीडीपी करीब 22 बिलियन डॉलर है.
‘गुलाबी नगरी’ के नाम से मशहूर जयपुर अपनी अनूठी पहचान, भव्य किलों, महलों और पारंपरिक बाज़ारों के लिए जाना जाता है. यह शहर पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र होने के साथ-साथ व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों का भी एक अहम हब है. तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्था, पर्यटन उद्योग और सांस्कृतिक धरोहर की वजह से जयपुर आज न केवल राजस्थान का बल्कि पूरे देश का एक महत्वपूर्ण आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र बन चुका है.
वैसे तो भारत में कई शहर अपनी अनूठी बसावट और वास्तुकला के लिए जाने जाते हैं लेकिन राजस्थान की राजधानी जयपुर उनमें सबसे खास है. जयपुर न केवल अपने गुलाबी रंग और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए प्रसिद्ध है बल्कि इसे अक्सर दुनिया की पहली ऐसी 'प्लान्ड सिटी' भी कहा जाता है, जो वास्तु शास्त्र और ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर बसाया गया.
शिल्प शास्त्र और वास्तु शास्त्र पर रखी गई नींव
बता दें कि जयपुर की नींव 1727 में महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने रखी थी. वे केवल एक शासक ही नहीं, बल्कि एक महान खगोलशास्त्री और ज्योतिषी भी थे. उन्होंने जयपुर को बसाने के लिए बंगाल के फेस वास्तुकार विद्याधर भट्टाचार्य को आमंत्रित किया. भट्टाचार्य ने शिल्प शास्त्र और वास्तु शास्त्र की स्टडी कर शहर का नक्शा तैयार किया.
ब्रह्मांड के नौ ग्रहों को दर्शाता है जयपुर का स्ट्रक्चर
जयपुर को 'नौ खंड' यानी नवरत्न मंडल की तरह बनाया गया. यह एक तरह से ब्रह्मांड के नौ ग्रहों को दर्शाता है. शहर को नौ चौकोर ब्लॉक्स में डिवाइड किया गया, जिनमें से दो शाही महलों और प्रशासन के लिए आरक्षित थे जबकि बाकी सात आम जनता और बिजनेस के लिए बनाए गए. यह स्ट्रक्चर आज भी जयपुर की पहचान है.
दिशाओं का भी रखा गया ध्यान
वास्तु शास्त्र के अनुसार, किसी भी शहर की योजना में दिशाओं की अहमियत सबसे ज्यादा होती है. जयपुर में सड़कें इस तरह बनाई गईं कि वे उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम दिशा में एक-दूसरे को काटती हैं. इससे न केवल बैलेंस बना बल्कि शहर में रोशनी और हवा का भी संचार सही हो. जयपुर के चारों ओर विशाल दीवार और सात मुख्य दरवाजे बनाए गए. ये दरवाजे भी वास्तु शास्त्र के अनुसार विभिन्न दिशाओं में रखे गए. जैसे कि अजमेर दरवाजा पश्चिम की ओर, सूरजपोल पूर्व की ओर, चांदपोल पश्चिम में, झुन्झुनू दरवाजा उत्तर की ओर रखा गया.
पिंक कलर बन गया पहचान
जयपुर की सबसे बड़ी पहचान इसका गुलाबी रंग है. 1876 में वेल्स के प्रिंस के स्वागत के लिए शहर को गुलाबी रंग से रंगा गया था. वास्तु शास्त्र के अनुसार, गुलाबी रंग मित्रता और आतिथ्य का प्रतीक है. यही कारण है कि यह रंग जयपुर की स्थायी पहचान बन गया. शहर की चौड़ी सड़कों, बड़े चौराहों और सुनियोजित बाज़ारों की वजह से जयपुर न केवल देखने में भव्य लगता है बल्कि इसमें रहने का अनुभव भी आरामदायक है.
वास्तु विज्ञान का जीता-जागता प्रमाण
जयपुर केवल राजस्थान की राजधानी या गुलाबी नगरी ही नहीं है, बल्कि यह भारतीय ज्ञान परंपरा और वास्तु विज्ञान का जीता-जागता प्रमाण है. यहां हर गली, हर चौक और हर दरवाजे के पीछे कोई न कोई खगोल, ज्योतिष और वास्तु का रहस्य छिपा है. यही कारण है कि जयपुर आज भी दुनिया भर के आर्किटेक्ट्स और रिसर्चर्स के लिए अध्ययन का केंद्र बना हुआ है.
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