Jaipur Greater के सबसे साफ़ Ward को मिलेगा 30 लाख का Prize, जानिए क्या करना होगा...

स्वच्छता सर्वेक्षण (Hygiene Survey) में जनभागीदारी निभाने के लिए ग्रेटर नगर निगम (Jaipur Greater Nagar Nigam) की ओर से वार्ड स्तर पर प्रतियोगिता (Clean Ward Competition) शुरू की जाएगी. 

Jaipur Greater के सबसे साफ़ Ward को मिलेगा 30 लाख का Prize, जानिए क्या करना होगा...
फाइल फोटो

जयपुर: स्वच्छता सर्वेक्षण (Hygiene Survey) में जनभागीदारी निभाने के लिए ग्रेटर नगर निगम (Jaipur Greater Nagar Nigam) की ओर से वार्ड स्तर पर प्रतियोगिता (Clean Ward Competition) शुरू की जाएगी. इसमें सर्वश्रेष्ठ तीन वार्डों को पुरस्कृत भी किया जाएगा. जल्द ही इसके लिए पार्षदों से आवेदन लिए जाएंगे. आवेदन करने के बाद पार्षद अपने वार्ड को सर्वश्रेष्ठ बनाएंगे और निगम उनका सहयोग करेगा. जिन वार्डों में हूपर और सफाईकर्मियों की कमी है, वहां पर तुरंत व्यवस्था करवाई जाएगी. पहले तीन वार्डों को पुरस्कार राशि के रूप में 30 लाख रुपए तक के अतिरिक्त काम कराकर दिया जाएगा.

स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 को देखते हुए नगर निगम ग्रेटर ने सभी वार्डों (Jaipur News) में स्वच्छ वार्ड प्रतियोगिता कराने का फैसला किया है. इस प्रतियोगिता में प्रथम आने वाले वार्ड को 30 लाख रुपए का पुरस्कार मिलेगा. निगम मेयर डॉ. सौम्या गुर्जर ने बताया कि प्रतियोगिता में 150 वार्ड भाग लेंगे. वार्ड के लोग अपने वार्ड को स्वच्छ बनाएंगे. इसके लिए वार्ड के जनप्रतिनिधि, एनजीओ, निजी ट्रस्ट सामाजिक संस्थाओं के 10 या इससे अधिक समूह को इसकी जिम्मेवारी दी जाएगी. 

वार्डों के चयन के लिए मुख्यालय स्तर पर टीम बनेगी. इसमें प्रोजेक्ट शाखा, स्वास्थ्य शाखा के अलावा पार्षदों को शामिल किया जाएगा. उनकी रिपोर्ट के आधार पर सर्वश्रेष्ठ वार्ड का चुनाव होगा. निगम के मापदंडों के अनुरूप सफाई कार्य का मूल्यांकन किया जाएगा. इसमें उत्कृष्ट तीन वार्डों को स्वच्छ  पुरस्कार मिलेगा. निगम अधिकारियों की मानें तो पहले चरण में वार्ड और दूसरे चरण में व्यापार मंडलों को इस अभियान से जोड़ा जाएगा.

शहरवासियों को स्वच्छता अभियान से जोडऩे के लिए सर्वश्रेष्ठ वार्ड अभियान की शुरुआत की जाएगी. इससे जन भागीदारी बढ़ेगी जो सर्वश्रेष्ठ वार्ड चुनकर आएंगे, उन वार्डों में अतिरिक्त 30 लाख रुपए तक के विकास कार्य कराए जाएंगे. पहले स्थान पर रहने वाले वार्ड में 30 लाख, दूसरे स्थान पर 20 लाख और तीसरे स्थान पर रहने वाले वार्ड में 10 लाख रुपए की राशि निगम खर्च करेगा. 

दरअसल निगम अब तक गीला सूखा कचरा अलग करने में नाकाम रहा है. ऐसे में लोगों को आगे व्यवस्था को बनाना चाहिए. अधिकतर हूपर में अलग-अलग कचरा डालने के बॉक्स बने हुए हैं. लोगों को कचरा अलग करके देना होगा. मेयर ने बताया कि स्वच्छता सर्वेक्षण में सिटीजन वॉइस में 1800 अंक निर्धारित हैं. इनमें सिटीजन फीडबैक, लोगों से जुड़ाव, स्वच्छता एप का उपयोग और कुछ नया करने के अंक मिलते हैं. सर्विल लेवल प्रोग्रेस के 2000 अंकों में से 1200 अंक सफाई व्यवस्था रखने और गीला-सूखा अलग-अलग करके देने के हैं.

बहरहाल, इस बार स्वच्छ सर्वेक्षण में शहरों की रैंकिंग तीन कैटेगरी के आधार पर तय होगी. वहीं, डायरेक्ट ऑब्जरवेशन को हटाते हुए इसे पब्लिक फीडबैक से जोड़ दिया गया है. यानी सर्वे के लिए आने वाली टीमें आम लोगों से चर्चा करके उनके फीडबैक के आधार पर ही तय करेंगी कि शहर धूल मुक्त और कचरा मुक्त है या नहीं. साथ ही शहर के विभिन्न क्षेत्रों में डस्टबिन के इंतजाम को भी जांचा जाएगा. स्वच्छ भारत मिशन 2021 के तहत जारी सरकार की नई गाइड लाइन में कई तरह के बदलाव करने के साथ ही पारदर्शिता पर पूरा जोर दिया गया है.

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