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जैसलमेर: छात्रसंघ चुनाव में जीत के बाद भी राजनीति में जगह नहीं बना पाते विश्वविद्यालय के छात्र

छात्रसंघ चुनाव कम से कम जैसलमेर के संदर्भ में तो चार दिन की चांदनी ही साबित होते रहे हैं. चुनाव से कुछ दिन पहले और उसके कुछ दिन बाद तक इसकी चर्चा होती है. 

जैसलमेर: छात्रसंघ चुनाव में जीत के बाद भी राजनीति में जगह नहीं बना पाते विश्वविद्यालय के छात्र
फाइल फोटो

मनीष रामदेव, जैसलमेर: प्रतिवर्ष होने वाले महाविद्यालयी छात्रसंघ चुनाव की कड़ी में इस बार भी महीने के आखिर में चुनाव होने वाले हैं. इसमें जोर आजमाइश करने के लिए कई छात्र, छात्राएं कमर भी कस चुके हैं लेकिन सीमावर्ती जिले में कोई ढाई दशक से लगातार हो रहे इन चुनावों में भाग लेने वालों का मूल राजनीति में सितारा उतना नहीं चमक पाया है. जैसा विश्वविद्यालयों में देखने में आता है. जिले में प्रतिवर्ष निर्वाचित होने वाले छात्र नेताओं में से कुछ को ही आगे चलकर ज्यादा से ज्यादा राजनीतिक पार्टियों में काम करने का अवसर मिल पाता है और उनमें से कुछेक संगठनों में पदाधिकारी ही बन सके हैं. छात्र राजनीति का कोई नाम विधायक जिला प्रमुख और नगरपरिषद सभापति तो दूर पंचायत समिति प्रधान तक भी नहीं बन सका. अधिकांश अध्यक्ष तो सार्वजनिक जीवन में कहीं नजर ही नहीं आते.

छात्रसंघ चुनाव कम से कम जैसलमेर के संदर्भ में तो चार दिन की चांदनी ही साबित होते रहे हैं. चुनाव से कुछ दिन पहले और उसके कुछ दिन बाद तक इसकी चर्चा होती है. दो प्रमुख छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और एनएसयूआई के उम्मीदवारों की सूची पर भी दिलचस्पी रहती है. चुनाव परिणाम आने पर विजयी जुलूस और कुछ दिन तक महाविद्यालयों में सरगर्मियों के बाद जीते हुए पदाधिकारी भी लगभग निष्क्रिय होकर रह जाते हैं. अगले साल नए पदाधिकारी निर्वाचित होते हैं और यह सिलसिला ही लगातार चल रहा है।. यह ओर बात है कि कुछ दिनों की सरगर्मियों का हिस्सा बनने के लिए भी कई छात्र पूरे मनोयोग से प्रयास करते हैं. 

जैसलमेर में छात्र राजनीति के रास्ते सार्वजनिक जीवन में सफलता के कुछ सोपान तय करने वालों में कुछ ही नाम याद आते हैं. इनमें शुरुआती समय में एसबीके कॉलेज छात्रसंघ के अध्यक्ष बने शरद व्यास वर्तमान में सीमाजन कल्याण समिति में जिलामंत्री हैं. ऐसे ही 2011 में उपाध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुए जयंत व्यास हैं जो पिछले लम्बे समय से छात्र राजनीति में सक्रिय हैं और भाजपा के युवा मोर्चा में भी अपनी महत्ती भूमिका निभा रहे हैं. वहीं छात्रजीवन में कभी चुनाव न लड़ने वाले लालूसिंह सोढ़ा प्रतिवर्ष सक्रिय दिखते हैं और बजरंग दल के विभाग संयोजक बने हुए हैं. 2003 में अध्यक्ष बने महेश पुरोहित ने कुछ अर्से तक अभाविप और भाजयुमो में काम किया. 2004 में अध्यक्ष निर्वाचित मनोहरसिंह दामोदरा वर्तमान में भाजयुमो के जिलाध्यक्ष हैं.वर्ष 2010 से निर्वाचित अध्यक्षों में जालमसिंह मनोहरसिंह भादरिया नरेंद्रसिंह सोढ़ा पुष्पेंद्रसिंह श्रवणसिंह सोढ़ा गोपसिंह सिंहड़ार ललित गर्ग दुर्जनसिंह क्रम से 2018 तक अध्यक्ष बने. इनमें से ज्यादातर अब कॉलेज चुनावों में भी सक्रिय नहीं दिखते और न ही इनका सक्रिय राजनीति में कोई सरोकार नजर आता है.