Eid-Al-Adha 2025: सुनहरे रेगिस्तान की धरती जैसलमेर में आज ईद-उल-अज़हा का पर्व पूरी श्रद्धा, उत्साह और भाईचारे के साथ मनाया गया. सुबह से ही शहर की रौनक देखते ही बन रही थी.
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Jaisalmer News: सुनहरे रेगिस्तान की धरती जैसलमेर में आज ईद-उल-अज़हा का पर्व पूरी श्रद्धा, उत्साह और भाईचारे के साथ मनाया गया. सुबह से ही शहर की रौनक देखते ही बन रही थी. मुस्लिम समुदाय के लोग पारंपरिक परिधानों में ईदगाहों और मस्जिदों की ओर रुख करते नज़र आए. शहर की प्रमुख ईदगाहों और मस्जिदों में हजारों की संख्या में लोगों ने एक साथ ईद की नमाज़ अदा की.
नमाज़ के दौरान हुईं विशेष प्रार्थनाएं
मस्जिदों के इमामों ने अपने खुतबे (प्रवचन) में बलिदान, समर्पण और मानवता के संदेश पर प्रकाश डाला. नमाज़ के दौरान विशेष प्रार्थनाएं की गईं, जिनमें देश-दुनिया में अमन, चैन और इंसानियत के लिए दुआएं मांगी गईं. ईद-उल-अज़हा के इस पावन मौके पर शहर के सभी धर्मों के लोगों ने मुस्लिम समुदाय को मुबारकबाद दी. गले मिलकर एक-दूसरे को ईद की शुभकामनाएं देने का दृश्य जैसलमेर की गंगा-जमुनी तहज़ीब का प्रतीक बना.
दिखा भाईचारा
हिन्दू, सिख, ईसाई समुदायों के प्रतिनिधियों ने भी मुस्लिम भाइयों से मिलकर भाईचारे का परिचय दिया. ईद के मौके पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे. पुलिस और प्रशासन की ओर से शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष टीमें तैनात की गई थीं. किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए निगरानी रखी जा रही थी.
क्या सिखाती है ईद-उल-अज़हा?
ईद-उल-अज़हा हमें सिखाता है कि सच्चा बलिदान वही है जो इंसानियत के हित में हो. जैसलमेर ने आज यह दिखा दिया कि विविधता में एकता ही भारत की असली ताकत है. धार्मिक सीमाओं से परे, यह पर्व आपसी प्रेम, सहयोग और भाईचारे का प्रतीक बन गया. ईद-उल-अज़हा से पहले जैसलमेर के बाज़ारों में जबरदस्त रौनक देखने को मिली. कपड़े, मिठाइयां, इत्र, टोपी और अन्य त्योहार संबंधी वस्तुओं की दुकानों पर भीड़ लगी रही.
बच्चों ने कपड़े और खिलौने खरीदे
बच्चों ने खास तौर पर नए कपड़े और खिलौने खरीदे. बकरों की मंडियों में भी रौनक रही, जहां लोग कुरबानी के लिए बकरे खरीदते नज़र आए. जैसलमेर के युवाओं ने ईद की खुशियों को सोशल मीडिया पर भी खूब साझा किया. इंस्टाग्राम, फेसबुक और व्हाट्सएप पर बधाइयों का सिलसिला दिनभर चलता रहा. लोगों ने एक-दूसरे के साथ तस्वीरें और वीडियो साझा किए. इस बार की ईद जैसलमेर में धार्मिक सौहार्द और सामाजिक समरसता की मिसाल बनकर सामने आई. विभिन्न समुदायों के लोगों ने एक-दूसरे के घर जाकर शुभकामनाएं दीं और त्योहार में भागीदारी की. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और हर साल इसे और मजबूती मिल रही है.
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रिपोर्टर - शंकर दान