Jaisalmer News: सेना से प्रेरित चूज़े! जैसलमेर में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ बना पहचान

Rajasthan News: तपते थार के बीच एक नई उम्मीद जन्म ले रही है — गोडावण की चहचहाहट के साथ. राजस्थान के जैसलमेर में चल रहे गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) संरक्षण प्रयासों ने अब एक नई ऊंचाई छू ली है.

Jaisalmer News: सेना से प्रेरित चूज़े! जैसलमेर में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ बना पहचान
Image Credit: godawan chicks

Jaisalmer News: तपते थार के बीच एक नई उम्मीद जन्म ले रही है — गोडावण की चहचहाहट के साथ. राजस्थान के जैसलमेर में चल रहे गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) संरक्षण प्रयासों ने अब एक नई ऊंचाई छू ली है. इस साल अब तक कुल 21 नवजात गोडावण चूज़ों का जन्म दर्ज किया गया है, जिसमें 1 जून को देखा गया एक और नवजात शामिल है. खास बात यह है कि इन नवजातों को देश की सैन्य सफलता ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़े नाम दिए गए हैं, जिससे इस पुनर्जन्म को एक नई देशभक्ति की भावना मिली है.

तकनीक और समर्पण से जन्मी उम्मीद
कभी भारत के कई हिस्सों में घूमने वाला गोडावण अब सिर्फ राजस्थान के सीमित क्षेत्रों में दिखाई देता है. शिकार, प्राकृतिक आवास की कमी और मानवीय हस्तक्षेप के कारण यह प्रजाति विलुप्ति की कगार पर पहुंच गई थी. लेकिन भारत सरकार और राजस्थान वन विभाग के संयुक्त प्रयासों से इस संकटग्रस्त प्रजाति को पुनर्जीवित करने की दिशा में अहम सफलता मिली है. 2018 में शुरू हुए प्रोजेक्ट GIB के तहत जैसलमेर के सुदासरी और सम ब्रीडिंग सेंटरों में संरक्षण कार्य हो रहा है.

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AI तकनीक का इस्तेमाल
इन केंद्रों में AI तकनीक, तापमान नियंत्रित इनक्यूबेशन चैंबर और सेंसर आधारित निगरानी तंत्र का उपयोग किया जा रहा है. जिससे अंडों को सुरक्षित रूप से सेने और नवजातों को बड़ा करने में मदद मिली है. अब तक जैसलमेर में कुल 65 चूज़ों का जन्म हो चुका है. मई 2025 में ही 1, 3, 5, 9, 19, 23 और 24 तारीख को 7 नवजात गोडावण सामने आए. इन चूज़ों को धीरे-धीरे प्राकृतिक वातावरण में प्रशिक्षण देकर खुले रेगिस्तान में छोड़ने की योजना है.

‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़े नाम: जब देशभक्ति बनी पहचान
इस साल गोडावण पुनर्जन्म की सबसे खास बात यह रही कि जैसलमेर वन विभाग ने इन नवजातों के नाम देश की सैन्य उपलब्धियों से जोड़े. ‘ऑपरेशन सिंदूर’, जिसमें पाकिस्तान की सीमा पार हरकतों का करारा जवाब दिया गया, उसी अभियान से प्रेरणा लेकर इन पक्षियों को विशेष नाम दिए गए हैं.

गोडावण को दिए गए नाम
5 मई का ‘सिंदूर’ – सैन्य अभियान का प्रतीक.
9 मई का ‘एटम’ – ऑपरेशन की सामरिक शक्ति को समर्पित.
19 मई का ‘मिश्री’ – साइबर जासूसी के खिलाफ काम करने वाले गुप्तचर अधिकारी (कोडनेम मिश्री) को श्रद्धांजलि.
23 मई का ‘व्योम’ – विंग कमांडर व्योमिका सिंह के नाम पर, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर की आधिकारिक मीडिया ब्रीफिंग का नेतृत्व किया.
24 मई की ‘सोफिया’ – कर्नल सोफिया कुरैशी के नाम पर, जिन्होंने महिला सैन्य नेतृत्व की मिसाल पेश की.

ये नाम सिर्फ प्रतीक नहीं हैं, बल्कि उन मूल्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं जिनके लिए हमारी सेनाएं संघर्ष करती हैं — संकल्प, शौर्य और सेवा.

वन विभाग की मेहनत लाई रंग
डीएफओ बृजमोहन गुप्ता के अनुसार, "इस वर्ष की सबसे खास बात यह रही कि तकनीक और समर्पण के साथ देशभक्ति की भावना को जोड़ते हुए हमने नवजातों को ऐसे नाम दिए हैं, जो भारत की रक्षा गाथा को जीवित रखते हैं." उन्होंने बताया कि सम ब्रीडिंग सेंटर में हाल ही में तीन अंडों से सफलतापूर्वक चूज़े बाहर आए हैं, जिससे पूरे विभाग में उत्साह का माहौल है. AI आधारित निगरानी से हर अंडे की स्थिति पर सतत नजर रखी जाती है, और किसी भी संकट की स्थिति में त्वरित उपचार की सुविधा भी उपलब्ध है.

जैसलमेर बन रहा वन्यजीव संरक्षण का उदाहरण
कभी सिर्फ रेगिस्तान और सीमा के लिए पहचाना जाने वाला जैसलमेर अब वन्यजीव संरक्षण की दिशा में अंतरराष्ट्रीय मिसाल बनता जा रहा है. गोडावण की यह नई पीढ़ी सिर्फ राजस्थान की नहीं, पूरे भारत की उम्मीद है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही रफ्तार बनी रही तो जल्द ही खुले रेगिस्तान में फिर से गोडावण विचरण करते दिखाई देंगे. जैसलमेर की रेत में पनप रही यह नई जान, न सिर्फ जैव विविधता की जीत है, बल्कि यह राष्ट्रप्रेम से जुड़ी एक प्रेरक कहानी भी है – जिसमें प्रकृति, विज्ञान और देशभक्ति का अद्भुत संगम दिखाई देता है.

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रिपोर्टर -शंकर दान

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