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Jaisalmer News: जापान की कलाकार मामी सातो उर्फ 'राजस्थानी मधु' को राजस्थान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (RIFF) 2026 का सांस्कृतिक राजदूत (कल्चरल एंबेसडर) नियुक्त किया गया है. 31 जनवरी से 4 फरवरी तक जोधपुर में आयोजित होने वाले RIFF के 12वें संस्करण से पहले वे भारत पहुंच चुकी हैं और इन दिनों जैसलमेर में अभ्यास कर रही हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के दौरान उनके सामने दी गई राजस्थानी भजन प्रस्तुति के बाद मधु को वैश्विक पहचान मिली, जिसके चलते उन्हें RIFF 2026 की यह अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है.
जापान से राजस्थान तक लोकसंस्कृति का सफर
जब जापान की गलियों में घूमर और 'केसरिया बालम' की धुन गूंजती है, तो उसके पीछे राजस्थानी मधु की वर्षों की साधना छिपी है. मामी सातो ने खुद को पूरी तरह राजस्थान की लोक संस्कृति से जोड़ लिया है. आज वे न केवल एक कलाकार हैं, बल्कि भारत और जापान के बीच एक सशक्त सांस्कृतिक सेतु बन चुकी हैं. RIFF 2026 में कल्चरल एंबेसडर के रूप में उनकी भूमिका को लेकर स्वर्णनगरी जैसलमेर में खास उत्साह देखा जा रहा है.
प्रधानमंत्री मोदी के सामने प्रस्तुति बनी टर्निंग पॉइंट
मधु के करियर का सबसे अहम मोड़ पिछले वर्ष जापान में आया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने उन्होंने पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा में 'वारी जाऊं रे बलिहारी जाऊं रे' भजन प्रस्तुत किया. मधु बताती हैं कि प्रधानमंत्री जी के सामने उस प्रस्तुति के बाद मुझे दुनिया भर के राजस्थानियों ने अपनी बेटी के रूप में स्वीकार किया. उसी सम्मान का परिणाम है कि आज मुझे RIFF 2026 जैसे प्रतिष्ठित मंच की सांस्कृतिक राजदूत बनने का अवसर मिला.
गड़ीसर झील किनारे अभ्यास बना आकर्षण
RIFF 2026 की तैयारियों के तहत मधु जैसलमेर की ऐतिहासिक गड़ीसर झील के किनारे घूमर नृत्य और गायन का अभ्यास कर रही हैं. राजस्थानी वेशभूषा में उनका अभ्यास देखने के लिए सैलानी और स्थानीय लोग रुक जाते हैं. रेगिस्तान की सुनहरी धूप और झील की लहरों के बीच उनके घूमर के कदम आने वाले महोत्सव की भव्यता का संकेत दे रहे हैं.
RIFF 2026 में देंगी स्पीच और प्रस्तुतियां
31 जनवरी को जोधपुर के मिराज सिनेमा और ऐतिहासिक मेहरानगढ़ किले में RIFF 2026 का शुभारंभ होगा. इस दौरान मधु मुख्य अतिथि के रूप में स्पीच देंगी और घूमर नृत्य के साथ राजस्थानी लोक गीत प्रस्तुत करेंगी. अपनी गायकी को और निखारने के लिए वे प्रसिद्ध लोक गायक जलाल खान से ‘जहीर मीर बरसे मेघ’ गीत का अभ्यास कर रही हैं.
जापान में कॉर्पोरेट जॉब, फिर भी लोककला से अटूट रिश्ता
जापान में मधु एक निजी कंपनी में सेल्स और मार्केटिंग से जुड़ी हैं, लेकिन लोककला के प्रति उनका जुनून कम नहीं हुआ. वे वहां राजस्थानी नृत्य भी सिखाती हैं और वर्तमान में 50 से अधिक जापानी छात्र उनसे राजस्थान की लोक कला सीख रहे हैं. पति और दो बच्चों के सहयोग को वे अपनी सबसे बड़ी ताकत मानती हैं।
टोक्यो पैलेस बना जैसलमेर में दूसरा घर
मधु पिछले कई वर्षों से जैसलमेर आती रही हैं. यहां होटल टोक्यो पैलेस उनके लिए सिर्फ ठहरने की जगह नहीं, बल्कि अपनत्व का प्रतीक है. होटल मालिक मठार खान को वे परिवार जैसा मानती हैं. उनका कहना है कि जैसलमेर में उन्हें घर जैसी सुरक्षा और भरोसा मिलता है, इसी कारण वे अकेले जापान से भारत आ पाती हैं.
13 साल पहले कालबेलिया से शुरू हुआ सफर
करीब 13 वर्ष पहले एक फिल्म में कालबेलिया नृत्य देखकर मधु भावुक हो गई थीं. वहीं से इस कला को सीखने की इच्छा जागी. सोशल मीडिया पर उन्होंने जोधपुर की प्रसिद्ध कालबेलिया डांसर आशा सपेरा को देखा और उन्हें गुरु मान लिया. इसके बाद वे राजस्थान आईं और जोधपुर में आशा सपेरा से विधिवत कालबेलिया नृत्य की तालीम ली.
भारत-जापान के बीच सांस्कृतिक सेतु
RIFF के संस्थापक सोमेंद्र हर्ष के अनुसार, इस वर्ष की थीम ‘सिनेमास्थान’ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती देने में राजस्थानी मधु की भूमिका महत्वपूर्ण होगी. आज राजस्थानी मधु केवल कलाकार नहीं, बल्कि भारत और जापान के बीच एक जीवंत सांस्कृतिक सेतु बन चुकी हैं. उनकी कहानी यह साबित करती है कि सच्चे समर्पण के आगे सात समंदर की दूरी भी छोटी पड़ जाती है. अब जोधपुर उस पल का इंतजार कर रहा है, जब जापान की यह बेटी मरुधरा की धरती पर अपनी कला के रंग बिखेरेगी.
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