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Jaisalmer News : जैसलमेर जिले के लखा गांव में हाइटेंशन तारों की चपेट में आए वीरमसिंह के समर्थन में चल रहा धरना सातवें दिन भी जारी है. घायल वीरमसिंह का जोधपुर के MDM अस्पताल में इलाज चल रहा है. धरना स्थल पर शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी और RLP नेता थानसिंह डोली ने रात गुजारी, जिससे प्रदर्शनकारियों का हौसला बढ़ा. तीसरे दौर की वार्ता भी नाकाम रही, जिसमें कंपनी अधिकारी और जिला प्रशासन मौके पर पहुंचे, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी. परिजन और ग्रामीण 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता की मांग पर अड़े हुए हैं. धरना स्थल पर पूर्व विधायक रूपाराम मेघवाल, फतेहगढ़ प्रधान जनकसिंह भाटी सहित कई नेता पहुंचे और समर्थन जताया. ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, धरना जारी रहेगा. यह मामला प्रशासन और कंपनी के लिए चुनौती बना हुआ है, क्योंकि वीरमसिंह की हालत गंभीर बनी हुई है.
जैसलमेर जिले के लखा गांव में निजी कम्पनी के खिलाफ चल रहा ग्रामीणों का आंदोलन लगातार जारी है. सातवे दिन भी गांव के बाहर कम्पनी के गेट के सामने बड़ी संख्या में ग्रामीण डटे रहे. 19 सितम्बर को हाइटेंशन तार की चपेट में आने से घायल हुए गांव के वीरमसिंह का इलाज फिलहाल जोधपुर के MDM अस्पताल में चल रहा है. इस पूरे मामले में घायल वीरमसिंह के बेटे पारेश्वर सिंह राजपुरोहित ने थानाधिकारी झिनझिनयाली को लिखित निवेदन सौंपा है.
इसमें साफ कहा गया है कि 19 सितम्बर को दोपहर करीब 2 बजे मेरे पिता वीरमसिंह पुत्र जीवराजसिंह गांव लखा स्थित घर से खेत पर पशुओं का चारा लेने जा रहे थे. रास्ते में हाईटेंशन तार डालने वाली कंपनी ने लापरवाही से खुले तार जमीन से कुछ ऊंचाई पर छोड़ दिए थे. कंपनी ने न तो सुरक्षा के लिए कोई बैरक लगाया और न ही कोई जिम्मेदार व्यक्ति मौके पर खड़ा किया. इसी कारण मेरे पिताजी की मोटरसाइकिल उन तारों से टकरा गई और वे गंभीर रूप से घायल होकर बेहोश हो गए. उनके सिर व शरीर पर घातक चोटें आई हैं और वर्तमान में वे जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं. कंपनी की इस लापरवाही से पहले भी कई हादसे हो चुके हैं.”
वही धरना स्थल पर रविवार की रात शिव विधायक रविंद्रसिंह भाटी और RLP नेता थानसिंह डोली ने ग्रामीणों के साथ समय बिताया. दोनों नेताओं ने रात यहीं गुजारकर आंदोलन को मजबूत करने का संदेश दिया. उनके साथ पूर्व विधायक रूपाराम मेघवाल, फतेहगढ़ प्रधान जनकसिंह भाटी सहित कई जनप्रतिनिधि भी पहुंचे और ग्रामीणों की मांगों को जायज ठहराते हुए सरकार और प्रशासन पर त्वरित कार्रवाई का दबाव बनाने की बात कही वही धरना खत्म कराने के लिए प्रशासन और कंपनी अधिकारियों ने अब तक तीन दौर की बातचीत की है. लेकिन ग्रामीणों की ओर से उठाई जा रही आर्थिक सहायता और जवाबदेही की मांग पर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने से वार्ता बेनतीजा रही. सोमवार शाम हुई बातचीत में भी प्रशासनिक अधिकारी और कंपनी प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे, लेकिन समझौता नहीं हो पाया.
ग्रामीणों का कहना है कि घायल वीरमसिंह को गंभीर चोटें आई हैं और उसका जीवन अब सामान्य नहीं रह सकता. ऐसे में उसके परिवार के भरण-पोषण और भविष्य को देखते हुए कम से कम 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए. साथ ही कंपनी की लापरवाही को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है. धरना स्थल पर मौजूद ग्रामीणों ने कहा कि जब तक लिखित समझौता नहीं होगा और सहायता राशि घोषित नहीं होगी, आंदोलन जारी रहेगा.
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