लखा गांव में 7वें दिन भी धरना, पीड़ित को न्याय के लिए रविंद्र भाटी ने खड़ी कर दी खाट

Jaisalmer News : जैसलमेर के लखा गांव में करंट की चपेट में आए पीड़ित के परिवार के लोग 1 करोड़ की आर्थिक मदद के साथ ही जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं. धरने के समर्मथ में अब शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी भी आ चुके हैं. 
 

लखा गांव में 7वें दिन भी धरना, पीड़ित को न्याय के लिए रविंद्र भाटी ने खड़ी कर दी खाट
Image Credit: Ravindra Bhati News

Ravindra Bhati News : जैसलमेर जिले के लखा गांव में निजी कम्पनी के खिलाफ चल रहा ग्रामीणों का आंदोलन लगातार जारी है. सातवे दिन भी गांव के बाहर कम्पनी के गेट के सामने बड़ी संख्या में ग्रामीण डटे रहे. 19 सितम्बर को हाइटेंशन तार की चपेट में आने से घायल हुए गांव के वीरमसिंह का इलाज फिलहाल जोधपुर के MDM अस्पताल में चल रहा है. इस पूरे मामले में घायल वीरमसिंह के बेटे पारेश्वर सिंह राजपुरोहित ने थानाधिकारी झिनझिनयाली को लिखित निवेदन सौंपा है.

इसमें साफ कहा गया है -19 सितम्बर को दोपहर करीब 2 बजे मेरे पिता वीरमसिंह पुत्र जीवराजसिंह गांव लखा स्थित घर से खेत पर पशुओं का चारा लेने जा रहे थे. रास्ते में हाईटेंशन तार डालने वाली कंपनी ने लापरवाही से खुले तार जमीन से कुछ ऊंचाई पर छोड़ दिए थे.

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कंपनी ने ना तो सुरक्षा के लिए कोई बैरक लगाया और न ही कोई जिम्मेदार व्यक्ति मौके पर खड़ा किया. इसी कारण मेरे पिताजी की मोटरसाइकिल उन तारों से टकरा गई और वे गंभीर रूप से घायल होकर बेहोश हो गए. उनके सिर व शरीर पर घातक चोटें आई हैं और वर्तमान में वे जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं. कंपनी की इस लापरवाही से पहले भी कई हादसे हो चुके हैं.

वही धरना स्थल पर रविवार की रात शिव विधायक रविंद्रसिंह भाटी और RLP नेता थानसिंह डोली ने ग्रामीणों के साथ समय बिताया. दोनों नेताओं ने रात यहीं गुजारकर आंदोलन को मजबूत करने का संदेश दिया. उनके साथ पूर्व विधायक रूपाराम मेघवाल, फतेहगढ़ प्रधान जनकसिंह भाटी सहित कई जनप्रतिनिधि भी पहुंचे और ग्रामीणों की मांगों को जायज ठहराते हुए सरकार और प्रशासन पर त्वरित कार्रवाई का दबाव बनाने की बात कही.

वही धरना खत्म कराने के लिए प्रशासन और कंपनी अधिकारियों ने अब तक तीन दौर की बातचीत की है. लेकिन ग्रामीणों की ओर से उठाई जा रही आर्थिक सहायता और जवाबदेही की मांग पर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने से वार्ता बेनतीजा रही. सोमवार शाम हुई बातचीत में भी प्रशासनिक अधिकारी और कंपनी प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे, लेकिन समझौता नहीं हो पाया.

ग्रामीणों का कहना है कि घायल वीरमसिंह को गंभीर चोटें आई हैं और उसका जीवन अब सामान्य नहीं रह सकता. ऐसे में उसके परिवार के भरण-पोषण और भविष्य को देखते हुए कम से कम 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए. साथ ही कंपनी की लापरवाही को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है. धरना स्थल पर मौजूद ग्रामीणों ने कहा कि जब तक लिखित समझौता नहीं होगा और सहायता राशि घोषित नहीं होगी, आंदोलन जारी रहेगा।

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