ओरण बचाने साधु-संत भी आए आगे, 26 सिंतबर को जैसलमेर में बड़ी जनाक्रोश रैली

Jaisalmer News : जैसलमेर में ओरण भूमि को बचाने के लिए अब साधु संत भी आगे आ गये है. 26 सिंतबर को बड़ी जनाक्रोश रैली के बाद कलेक्टर को सीएम के नाम ज्ञापन सौंपा जायेगा.
 

ओरण बचाने साधु-संत भी आए आगे, 26 सिंतबर को जैसलमेर में बड़ी जनाक्रोश रैली
Image Credit: Oran Bachao Andolan JaisalmerSource: ज़ी न्यूज़ डेस्क

Oran Bachao Andolan : जैसलमेर में ओरण-गोचर भूमि को रेवेन्यू रिकॉर्ड में दर्ज करवाने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन ने अब जनआंदोलन का रूप ले लिया है. इसी कड़ी में 26 सितम्बर को जैसलमेर में जनाक्रोश रैली निकाली जाएगी. यह रैली गड़ीसर से शुरू होकर कलेक्ट्रेट तक पहुंचेगी. जहां जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन सौंपा जाएगा. जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण, पर्यावरण प्रेमी, सामाजिक कार्यकर्ता और साधु-संत शामिल होंगे.

पर्यावरण प्रेमी सुमेर सिंह ने बताया कि वे पिछले 10 दिनों से कलेक्ट्रेट के सामने धरने पर बैठे हैं और ओरण-गोचर की जमीन को राजस्व अभिलेखों में दर्ज करने की मांग कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह लड़ाई आने वाली पीढ़ियों और पर्यावरण संरक्षण के लिए बेहद जरूरी है.

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वही इस जनाक्रोश रैली को जैसलमेर के साधु-संतों का भी समर्थन मिल रहा है. म्याजलार के ख्याला मठ के गुरु गोरखनाथ ने लोगों से अधिक से अधिक संख्या में रैली में शामिल होने की अपील की है. उन्होंने कहा कि ओरण-गोचर भूमि सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और पारिस्थितिक दृष्टि से भी अमूल्य धरोहर है.

गजरूप सागर मठ,के महंत बाल भारती महाराज के साथ जिले. के कही मठ मंदिरो के महंतो का कहना है कि यदि ओरण-गोचर की भूमि को सुरक्षित नहीं किया गया तो आने वाले समय में पशुओं के लिए चारागाह खत्म हो जाएंगे और पर्यावरणीय संकट गहराएगा. रैली से पहले विभिन्न गांवों और समुदायों के लोग आपस में जुड़ते जा रहे हैं. स्थानीय स्तर पर इस आंदोलन को युवाओं और सामाजिक संगठनों का भी सहयोग मिल रहा है.

पर्यावरण प्रेमी सुमेर सिंह पर्यावरण प्रेमियों और ग्रामीणों के साथ पिछले आठ दिनों से कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर धरने पर बैठे हैं. उनकी मुख्य मांग है कि जैसलमेर और आसपास के इलाकों में मौजूद ओरण-गोचर की जमीन को रेवेन्यू रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए, ताकि उस पर अवैध कब्जों और दोहन को रोका जा सके.

सुमेर सिंह का कहना है यह धरना सिर्फ जमीन के कागजों का सवाल नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के जीवन से जुड़ा हुआ है. अगर ओरण और गोचर नहीं बचेंगे तो रेगिस्तान में मवेशियों के लिए चारा नहीं बचेगा और जैव विविधता खत्म हो जाएगी.

सुमेर सिंह का कहना है कि वर्षों से ओरण और गोचर की जमीन पर धीरे-धीरे अवैध कब्जे बढ़ते जा रहे हैं. कई जगह इनका रेवेन्यू रिकॉर्ड ही नहीं है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा नहीं मिल पाती. कई निजी कंपनियों को सरकार सोलर और विंड के लिए ये जमीनें अलॉट कर रही है जो सरासर अन्याय है.

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