close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

जालोर: लूनी नदी इस गांव के लिए बना मुसीबत, अब तक नहीं हुआ पुल का निर्माण

चितलवाना उपखण्ड का लालपुरा गांव लूनी नदी के किनारे बसा हुआ है. इस गांव से ही लूनी नदी गुजरती है.

जालोर: लूनी नदी इस गांव के लिए बना मुसीबत, अब तक नहीं हुआ पुल का निर्माण
गांव जाने वाले जाने वाले रास्ते के ऊपर से ही लूनी नदी गुजरती है.

बबलू मीणा/जालोर: राजस्थान की मरु गंगा कही जाने वाली लूनी नदी यूं तो रेगिस्तान के क्षेत्र के लिए वरदान मानी जाती है लेकिन चितलवाना उपखण्ड का एक ऐसा गांव जिसके लिए यह अभिशाप बन गई है. दरअसल चितलवाना उपखण्ड का लालपुरा गांव लूनी नदी के किनारे बसा हुआ है. इस गांव से ही लूनी नदी गुजरती है. लालपुरा से चितलवाना उपखण्ड मुख्यालय की दूरी महज 10 किमी है लेकिन जब लूनी नदी आती है तो यह दूरी 50 किमी हो जाती है. लालपुरा से चितलवाना जाने वाले रास्ते के ऊपर से ही लूनी नदी गुजरती है. इस रास्ते पर सालों पहले एक रपट बनी हुई थी लेकिन यह कई सालों से टूटी हुई है. इसलिए पानी इस रपट के ऊपर से ही गुजरता है. जब पानी रपट के ऊपर से गुजरना शुरु होता है तो इस गांव का उपखण्ड मुख्यालय से संपर्क टूट जाता है और इस बार भी यही हाल हुआ है. 

जब इस बार लूनी नदी का पानी आया तो पहली मुसीबत स्कूली विद्यार्थियों के लिए लेकर आया है इस गांव के 70-80 बच्चे चितलवाना पढ़ते है।फिलहाल स्कूलों में प्रथम परख चल रहे है. जब बच्चे हमेशा की भांति सुबह जल्दी स्कूल जाने की तैयारी कर रहे थे तभी सूचना मिली की लूनी नदी की रपट पर पानी आ गया इसलिए आवागमन बंद है तो विद्यार्थी स्कूल नही जा पाए और 70-80 छात्रों को प्रथम टेस्ट से वंचित रहना पड़ा. वहीं अभी यह विद्यार्थी 50 किमी का चक्कर लगाकर ही स्कूल जाएंगे.

jaipur

वहीं इस गांव में किसी भी प्रकार की मूलभूत सुविधा नहीं है हर प्रकार की सुविधा के उपखण्ड मुख्यालय पर ही है इसलिए ग्रामीणों को हर दिन चितलवाना उपखण्ड मुख्यालय जाना पड़ता है लेकिन जब आवागमन ही बंद है तो कैसे जा पाएंगे यह सोचने वाली बात है. गांव में सुविधा के नाम पर एक आठवीं स्कूल है इसके अलावा गांव में न तो कोई दुकान है और न ही अस्पताल और न ही इस गांव में आज तक कोई आवागमन का साधन है.

चितलवाना उपखंड मुख्यालय के साथ तहसील व पंचायत समिति भी है. वहीं उच्च माध्यमिक स्कूल,सरकारी अस्पताल, पशु चिकित्सालय, पुलिस थाना, बैंक सहित कई सुविधाओं के लिए चितलवाना जाना पड़ता है. यहां तक कि इस गांव की ग्राम पंचायत भी चितलवाना ही है इसलिए छोटे-छोटे काम के लिए चितलवाना 50 किमी घूमकर जाना पड़ेगा.

जब लालपुरा से चितलवाना जाने वाले रास्ते पर लूनी नदी का पानी आता है तो इस गांव के बाशिंदे कुंडकी गांव तक 5 किमी पैदल आते है. वहां से बस में बैठकर गांधव, सिवाड़ा होकर चितलवाना उपखण्ड मुख्यालय पहुंचते है जिसकी दूरी 50 किमी होती है. इस रपट को टूटे हुए कई साल हो चुके है और हर दूसरे साल लूनी नदी आती है. हर बार गांव के लिए समस्या पैदा होती है लेकिन इन समस्या की तरफ न तो कोई अधिकारी ध्यान देते है और न ही जनप्रतिनिधि. अब सोचने वाली बात यह है कि आखिर आजादी के 73 साल बाद भी इस गांव को एक पुल नसीब नहीं हुआ.

यह रास्ता केवल लालपुरा के लिए ही नहीं इस रास्ते से दर्जनों गांव उपखण्ड मुख्यालय पहुंचते है. कुंडकी, मेघावा, अगड़ावा, सेसावा, डूंगरी, वेडिया सहित दर्जनों गांवों के लोग भी उपखण्ड मुख्यालय इसी रास्ते से जाते है. गांव के बुजुर्ग लोगो का कहना है कि जब वोट आते है तो सांसद, विधायक सभी गांव में वोट के लिए आते है और बड़े-बड़े वादे करके जाते है लेकिन जीतने के बाद कोई भी इस गांव की ओर मुंह नही करते है. हमनें कई बार इस रपट को ठीक करवाने की बात कही लेकिन आज तक हमारी बात पर किसी जनप्रतिनिधि ने गौर नहीं किया.