Jalore: टमाटर ने निकाले 'अन्नदाता के आंसू', गिरते दाम ने किसानों को बनाया कर्जदार

टमाटर की पैदावार को देखते हुए बाजार में टमाटर की कीमतें एकदम से गिर गई हैं, जिससे किसानों को इस समय बेचने पर लागत भी नहीं मिल पा रही है. 

Jalore: टमाटर ने निकाले 'अन्नदाता के आंसू', गिरते दाम ने किसानों को बनाया कर्जदार
प्रतीकात्मक तस्वीर.

Jalore: खाने की टेबल पर जब आपके पेट में टमाटर (Tomato) का सलाद पहुंचता है तो खाने का मजा और भी बढ़ जाता है. किसी सब्जी में टमाटर को डालिये तो स्वाद का जायका और भी बढ़ जाता है लेकिन उपखंड क्षेत्र में इस बार टमाटर की बंपर पैदावार के बाद भी इसके दाम किसानों को रुला रहे हैं.

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सब्जियों में लाल बादशाह कहलाने वाला टमाटर इन दिनों 4 रुपये से 6 रुपये प्रति किलो के भाव से बिकने को मजबूर है जबकि कुछ समय पूर्व टमाटर के दाम 50 से लेकर 70 रुपये प्रति किलो के हिसाब से था. जब अन्नदाता ने फसल तैयार की और बाजार में आई तब गिरते भाव को देखकर लाल बादशाह ने अन्नदाता के आंसू निकाल दिए. इस बार किसानों ने टमाटर के ऊंचे दाम देखकर क्षेत्र मे बंपर पैदावार की परन्तु आज वो इतने मजबूर हो गये कि उन्होंने बीज और बुवाई के लिए जो पैसा खर्च किया था, वो भी नहीं मिल रहा है. 

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किसानों ने बताया कि पूर्व में एक ट्रॉली 20 क्विंटल टमाटर बेचते थे तब 25 से 30 हजार रुपये प्राप्त होते थे. आज ये हाल है कि एक ट्रोली टमाटर बेचते हैं तब 15 सौ से 2 हजार रुपये प्राप्त हो रहे हैं जबकि खेती में से एक ट्रॉली टमाटर इकट्ठा करने के लिए मजदूरों की मजदूरी में 1 हजार से 15 सौ रुपये का खर्च हो जाता है. वहीं, पर ट्रैक्टर में लादकर खरीददारों के यहां पहुंचाने के लिए भी 1 हजार रुपये का खर्च होता है जबकि रानीवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के टमाटर देश भर में प्रसिद्ध होने के बावजूद भी टमाटर के दाम गिरने से किसानों की हालत बड़ी ही नाजुक है. 

किसानों की अतिवृष्टि में हुए नुकसान और दूसरा टमाटरों की खेती में हुआ नुकसान, इससे फिर किसान कर्जदार हो गया है. सस्ते दाम होने के कारण किसान पशुओं को टमाटर देने को मजबूर हैं तो कई किसान टमाटर कि खेती पर हल चलाने को भी मजबूर हैं. टमाटर कि खेती करने में अन्नदाता खून और पसीना बहाता है एवं हजारों रुपये का खर्च आता है तब लाल बादशाह तैयार होता है परन्तु गिरते दामों को देखकर किसान कर्जदार ही होता जा रहा है.

बाहर से आये हैं टमाटर के खरीददार.
उपखंड क्षेत्र में आस-पास के गांवों में टमाटरों की अच्छी फसल होने के कारण बाहर के व्यापारियों ने विभिन्न गांवों में टमाटर खरीदने के लिए कैम्प तो लगा दिए हैं बाकि टमाटर की बम्पर आवक को खरीददार नहीं खरीद पा रहे हैं क्योंकि दामों में गिरावट के कारण किसान मजबूरन टमाटर को 2 रुपये प्रति किलो देने को मजबूर है. टमाटर लेने को कोई तैयार नहीं है. जन प्रतिनिधि गिरते दामों के लिए अन्नदाता की आवाज सरकार तक पहुंचाने में नाकाम साबित हो रहे हैं एवं किसानों के लिए क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज खुलवाने में नाकाम साबित हो रहे हैं, जिसके कारण अन्नदाता कीमती फसलों का नुकसान झेल रहे हैं और दिनों-दिन कर्जदार हो रहे हैं.

कम कीमतों में भी नहीं मिल रहे खरीददार
टमाटर की पैदावार को देखते हुए बाजार में टमाटर की कीमतें एकदम से गिर गई हैं, जिससे किसानों को इस समय बेचने पर लागत भी नहीं मिल पा रही है. टमाटर की कीमतें कम होने के बाद भी थोक में किसानों से टमाटर खरीदने वाला कोई नहीं मिल रहा है. अब टमाटर पकने के बाद खेतो मे ही सड़ रहे हैं. 

क्षेत्र के किसानों का कहना है कि टमाटर की बुवाई के दौरान प्रति हैक्टेयर एक से डेढ़ लाख तक खर्च आता है. वहीं, टमाटर की फसल निकालने की मजदूरी अलग. इस समय टमाटर डेढ़ से दो रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रहे हैं. ऐसे में एक हेक्टेयर मे 50 से 60 हजार का घाटा हो रहा है, जिससे अन्नदाता कर्ज में ही डूबा रहता है. 

Reporter- Bablu Meena