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Jalore News: जालौर जिले रामसीन थाना क्षेत्र के मोदरान में 03 मार्च 2023 को हुई मानवता को झकझोर देने वाली दोहरे हत्याकांड जिसमें कुल्हाड़ी से भाभी और अन्य व्यक्ति निर्मम हत्या हुई थी पर जिसमें, भीनमाल की अतिरिक्त सत्र न्यायालय (ADJ कोर्ट) ने फैसला सुनाया. न्यायाधीश राजेंद्र साहू ने अभियुक्त पहाड़सिंह तथा डूंगरसिंह राजपूत को धारा 302/34, 307/34 सहित विभिन्न धाराओं के अन्तर्गत दोषी करार देते हुए मृत्युदंड (फांसी) की सज़ा सुनाई. कोर्ट ने इस अपराधिक कृत्य को रेयरस्ट ऑफ द रेयर (बहुत दुर्लभ व कष्टदायी अपराध) माना.
जान से मारने की नियत से हमला किया गया था
अभियुक्तों ने कथित रूप से गांव में लड़की के विवाह प्रस्ताव को ठुकराए जाने के बाद 2023 में भाभी इन्द्रा कंवर तथा उनके पति हरिसिंह पर कुल्हाड़ी से हमला किया. उस समय मौके पर पहुंचे अन्य पड़ोसी और एक किनारे खड़े परिवार के सदस्य जैसे बालक व एक एएसआई सरेंडर को भी जान से मारने की नियत से हमला किया गया था. कोर्ट ने पाया कि यह कोई आवेग में किया गया अपराध नहीं था, बल्कि पूर्वनियोजित, क्रूर और अति हिंसक था, जिससे पीड़ित परिवार की स्थिरता स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हुई.
जीवन-कैद सज़ा पर्याप्त न लगे
दोनों अभियुक्त फांसी की सजा, साथ में 10 लाख रुपये अर्थदण्ड. पीड़ित परिवारों (हरिसिंह व इन्द्रा कंवर के परिजनों) को प्रत्येक 7-7 लाख रुपये मुआवजा. जान बचाने वाले एएसआई सुरेंद्रसिंह व अन्य बचावकर्त्ताओं को 1.51 लाख रुपये सहायता राशि. फांसी की प्रक्रिया शुरू करने, सजा वारंट जारी करने व उच्च न्यायालय को पुष्टि हेतु भेजने के निर्देश दिए गए भारत में मृत्युदंड तभी दी जाती है जब अपराध की भयावहता, क्रूरता, और समाज पर असर ऐसा हो कि जीवन-कैद सज़ा पर्याप्त न लगे.
क्या मानना है कोर्ट का
कोर्ट ने पाया कि इस घटना में जीवन के मूल्यों, पारिवारिक संरचना, महिलाओं की सुरक्षा और समाज की नैतिक आधारभूत मर्यादा पर हमला हुआ है, जो केवल कठोर सज़ा के लिए पर्याप्त नहीं, बल्कि सर्वोच्च सज़ा न्यायोचित बनाती है. अभियुक्तों की ओर से बचाव पक्ष ने स्थिर जीवन, पहले से कोई अपराधिक रिकॉर्ड न होना और पारिवारिक जिम्मेदारियां होने जैसी दलीलें रखी, पर न्यायालय ने अपराध की भयावहता और पुनरावृत्ति की संभावना के आधार पर उन्हें घटलित नहीं माना.
फैसले से पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता मिलेगी, जिससे वे अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित बना सकें. साथ ही,न्यायालय द्वारा सख्त दण्ड देने से समाज में स्पष्ट संदेश गया कि ऐसे जघन्य अपराधों के लिए जीवन-कैद ही नहीं, बल्कि फांसी तक का रास्ता है.स्थानीय लोग इसे सरकार न्याय व्यवस्था और आमजन के बीच एक मजबूत विश्वास का संकेत मान रहे हैं. विशेष रूप से, महिलाओं और परिवारों की सुरक्षा के लिए यह फैसला एक Precedent बनेगा.
मोदरान हत्याकांड के लिए न्याय का प्रतीक
यह ऐतिहासिक फैसला न सिर्फ मोदरान हत्याकांड के लिए न्याय का प्रतीक है, बल्कि यह यह साफ करता है कि जब हत्या, बलात्कार, अत्याचार जैसी हद पार करती है, अब क्लीयर पनिशमेंट देना न्यायालयों का दायित्व है. 'रेयरस्ट ऑफ द रेयर' की श्रेणी में आए ऐसे अपराधों पर फांसी जैसे सर्वोच्च दंड को अपनाना, सामाजिक मर्यादा और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत कदम माना जा रहा है.
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