झालावाड़: 2 शिक्षकों ने सरकारी स्कूल के लिए दी एक बीघा जमीन, लोगों ने कहा...

फतेहगढ़ निवासी दो चचेरे भाई और पेशे से शिक्षक क जुझार सिंह और हरिसिंह गुर्जर ने जिन्होंने अपनी निजी 20 बिस्वा भूमि विद्यालय के नवीन भवन निर्माण हेतु दान स्वरूप विद्यालय प्रशासन को दे दी.

झालावाड़: 2 शिक्षकों ने सरकारी स्कूल के लिए दी एक बीघा जमीन, लोगों ने कहा...
विधालय में 12 कक्षाए संचालित होती हैं.

महेश परिहार/झालावाड़: किसी जमीन के टुकड़े के लिए आए दिन परिवार के लोगों की आपस मे झगड़ने की घटनाएं तो रोज सामने आती है, लेकिन किसी अच्छे कार्य के लिए भूमि दान करने वालों की भी कमी नहीं है. ऐसी ही एक नजीर पेश की झालावाड़ जिले के पिडावा उपखंड क्षेत्र निवासी दो शिक्षकों ने जिन्होंने विद्यालय भवन निर्माण हेतु आवश्यक भूमि दान स्वरूप विद्यालय प्रशासन को सौंप दी. 

खबर के मुताबिक, झालावाड़ जिले के फतेहगढ़ निवासी दो चचेरे भाई और पेशे से शिक्षक क जुझार सिंह और हरिसिंह गुर्जर ने जिन्होंने अपनी निजी 20 बिस्वा भूमि विद्यालय के नवीन भवन निर्माण हेतु दान स्वरूप विद्यालय प्रशासन को दे दी.

भूमि दान करने वाले दोनों शिक्षक भाइयों ने बताया कि उन्होंने भी इसी विद्यालय भवन में शिक्षा ग्रहण कर आज अध्यापक के पद तक मुकाम हासिल किया, लेकिन अब छात्रों की संख्या बढ़ने के साथ ही पुराने भवन में कक्षों की कमी के चलते छात्रों को बाहर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही. चूंकि फतेहगढ़ गांव के समीप कोई सरकारी भूमि नहीं है, इसलिए नवीन भवन निर्माण हेतु दोनों ही भाइयों ने 10 -10 बिस्वा यानी कुल 20 बिस्वा जमीन विद्यालय प्रशासन को दान कर दी. वहीं, अब वह चाहते हैं कि गांव का हर बच्चा पढ़ाई लिखाई कर अच्छी शिक्षा ग्रहण करें और अच्छे व्यवसाय से जुड़कर गांव का नाम रौशन करें. 

फतेहगढ़ में कहने को तो उच्च माध्यमिक विद्यालय है, लेकिन इसका भवन किसी प्राथमिक स्कूल जैसा लगता है. विधालय में 12 कक्षाए संचालित होती हैं, जिसमे 266 विद्यार्थी अध्ययन करते है. लेकिन उनके बैठने के लिए स्कूल में महज 5 ही कक्ष है, उनमें से भी दो जर्जर अवस्था है. ऐसे में शिक्षा के लिए बच्चो को बरामदे में बैठना पड़ रहा है. 

हालांकि, स्कूल में प्रिंसिपल सहित 14 शिक्षक तैनात है. पर्याप्त शिक्षको के बावजूद भी स्कूल प्रबंधन को कमरों के अभाव में कई कक्षाओं को एक साथ बैठाना मजबूरी है. स्कूल में क्लास रूम के लिये सबसे बड़ी बाधा जमीन का अभाव होना है. गांव में सरकारी जमीन नही होने से स्कूल में कमरे नहीं बन सके, जिसके चलते विद्यार्थियों को काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है.

वहीं, शिक्षकों की इस दरियादिली की लोगों ने जमकर सराहना की. तहसील कार्यालय में ही दोनों दानदाताओ का पुष्प माला पहनाकर ग्रामीणों व विद्यालय स्टाफ ने आभार जताया. जमीन मिलने के बाद राजकिय उच्च माध्यमिक विद्यालय में नए क्लास रूम का निर्माण हो सकेगा. प्रधानाचार्य ने बताया कि नए क्लास रूम के लिए जल्द ही प्रस्ताव बनाकर अति शीघ्र भिजवाया जाएगा. उधर, फतेहगढ़ गांव के ग्रामीणों ने भी दोनों भाइयो शिक्षक जुझार सिंह तथा हरिसिंह द्वारा निजी भूमि दान देने को तोड़ने का कार्य बताते हुए कहा कि यह कार्य समाज के लिए एक मिसाल का ऐसा काम करेगा और क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा के लिए आगामी दिनों में बेहतर वातावरण मिल पाएगा.