सिर पर सेहरा बांधकर लड़के यहां करे पूजा, 'कुंवारे' से बन जाएंगे 'शादीशुदा'

मालादेवी मंदिर में पूजा के बाद युवकों की शादी भी जल्दी ही हो जाती है और फिर शादी के बाद युवक अपनी पत्नी के साथ ही यहां मन्नत पूरी होने पर धोक लगाने आते हैं.

सिर पर सेहरा बांधकर लड़के यहां करे पूजा, 'कुंवारे' से बन जाएंगे 'शादीशुदा'
प्रतीकात्मक तस्वीर.

Jhalawar: जिले के आवर कस्बे में स्थित मालादेवी माता (Maladevi Mata) का मंदिर प्रदेश का पहला ऐसा मंदिर है, जहां पर श्रद्धालुओं द्वारा धन-दौलत, स्वास्थ्य या कोई अन्य मन्नत या आशीर्वाद नहीं मांगा जाता है बल्कि अपने परिवार में शादी (Marriage) से वंचित कुंवारे युवकों के जल्दी शादी के बन्धन में बंधने की मन्नत मांगी जाती है.

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जी हां, यह कोई मजाक नहीं है. आवर कस्बे में स्थित प्राचीन मालादेवी मंदिर पर होली के बाद नहान की पूर्व संध्या पर होने वाले वार्षिकोत्सव को शादी महोत्सव भी कहा जाता है. इस दौरान न केवल कस्बे के बल्कि आसपास के शहरों और मध्यप्रदेश के भी शहरों से कई कुंवारे युवक यहां पर आते हैं और माता के मंदिर में धोक लगाकर अपनी शादी की मन्नत मांगते हैं. 

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हैरानी की बात है कि पूजा के बाद युवकों की शादी भी जल्दी ही हो जाती है और फिर शादी के बाद युवक अपनी पत्नी के साथ ही यहां मन्नत पूरी होने पर धोक लगाने आते हैं.

क्या कहना है यहां रहने वाले बुजुर्गों का
कस्बे के बुजुर्ग नंदकिशोर भावसार ने बताया कि आवर कस्बे में यह मंदिर सदियों पुराना है, जिसके बारे में उनके बुजुर्ग भी किवदन्तियां सुनाया करते थे. उन्हीं कहानियों, मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार आज भी माला देवी माता मंदिर पर नहान की पूर्व संध्या पर प्रतिवर्ष वार्षिक उत्सव या कहें शादी महोत्सव का आयोजन किया जाता है. उनकी मानें तो पिचहत्तर वर्ष की उम्र में उन्होंने ऐसे कई कुंवारे युवक देखे, जिनकी शादियां होना लगभग असंभव था और उन्होंने यहां पर मन्नत मांगी, तो उनकी शादियां हो गईं. 

जल्द पूरी होती है शादी की कामना
कस्बे के ही बालचन्द भावसार ने बताया कि होली के 12 दिन बाद आने वाली नहान के दिन शाम को माला देवी माता मंदिर पर पूजन-अर्चन किया जाता है. इस दौरान यहां शादी की मन्नत मांगने आये युवक सिर पर सेहरा बांध कर माता की पूजा करते हैं और शीघ्र ही अपने विवाह की कामना करते हैं. 

दूर-दूर तक फैली है देवी मां की ख्याति
दो साल पूर्व ही मालादेवी चौक व्यापार संघ द्वारा मंदिर का जीर्णोद्धार भी करवाया गया है. कुंवारों के लिए आस्था का बड़ा केंद्र बन चुके माला देवी माता मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक फैल गई है और प्रतिवर्ष नहान के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं का सैलाब लग जाता है. इनमें शामिल होते हैं वह कुंवारे जिन्हें सुंदर सुशील और अच्छे जीवन साथी की कामना होती है और माता का आशीर्वाद मिलने यानी शादी होते ही नव दंपत्ति अगले नहान पर यहां धोक लगाने भी पहुंचते हैं.

सच्चे मन से करनी होती है पूजा
मेट्रोमोनियल साइट पर अपने लिए जीवनसाथी की तलाश कर रहे युवक-युवतियों को अब एक बार झालावाड़ जिले के आवर कस्बे पहुंच कर मामा देवी माता से भी अर्जी लगाना चाहिए. बता दें कि विवाह को लेकर ये मान्यता लोगों की आस्था के चलते सदियों से चली आ रही है. 

Reporter- Mahesh Parihar