close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

जयपुर: स्पोर्टस यूनिवर्सिटी जोधपुर शिफ्ट करने को लेकर ग्रामीणों ने किया विरोध प्रदर्शन

यूनिवर्सिटी को पहले उदयपुर और अब जोधपुर ले जाने की चर्चाओं से पूरा जिला गुस्से में है. झुंझुनूं के युवा, ग्रामीण और जनप्रतिनिधि भी सड़कों पर आ गए है.

जयपुर: स्पोर्टस यूनिवर्सिटी जोधपुर शिफ्ट करने को लेकर ग्रामीणों ने किया विरोध प्रदर्शन
झुंझुनूं के दोरासर में 2011 में खेल यूनिवर्सिटी खोले जाने की घोषणा बजट में की गई थी.

संदीप केडिया/जयपुर: जिस खेल यूनिवर्सिटी की घोषणा गहलोत सरकार ने 2011 में की थी. उस यूनिवर्सिटी की एक ईंट भी आठ साल बाद तक नहीं रख जा सकी है. जबकि इन आठ सालों में अब दूसरी बार इस यूनिवर्सिटी को जोधपुर ले जाने की चर्चा शुरू हो गई है. इस चर्चा के साथ झुंझुनूं के युवा, ग्रामीण और जनप्रतिनिधि भी सड़कों पर आ गए है. उनका कहना है कि आठ साल बाद भी यूनिवर्सिटी शुरू करने की बजाय, पहले उदयपुर और अब जोधपुर ले जाने की चर्चाओं से पूरा जिला गुस्से में है. वहीं भाजपा को भी बैठे बिठाए मुद्दा मिल गया है. 

झुंझुनूं के दोरासर में 2011 में खेल यूनिवर्सिटी खोले जाने की घोषणा बजट में की गई थी. सरकार की बजट घोषणा थी. इसलिए इसमें बिना कोई समय गंवाए प्रशासन ने दोरासर में 125 एकड़ के करीब भूमि को खेल यूनिवर्सिटी के नाम पर अलॉट भी कर दिया था. सरकार ने भी कोताही नहीं बरती और इसमें वाइस चांसलर से लेकर अन्य स्टाफ लगा दिए. तीन साल तक यह स्टाफ खाली और बंजर पड़ी जमीन पर कागजों में काम भी करता रहा और इसके बाद 2014 में इन्हें हटा दिया गया. साथ ही चर्चा हुई की यह यूनिवर्सिटी उदयपुर जाएगी. लेकिन उस वक्त भी लोगों ने विरोध किया और भाजपा सरकार ने साफ किया कि यूनिवर्सिटी कहीं नहीं जाएगी झुंझुनूं ही रहेगी.

इसके बाद यूनिवर्सिटी को खेल संस्थान में वसुंधरा राजे सरकार ने परिवर्तित किया और 31 करोड़ रुपए के बजट की भी बात कही. लेकिन यह ना तो संस्थान बना और ना ही बजट आया. इसके बाद वसुंधरा राजे सरकार भी चली गई और नई सरकार आ गई. पूर्व सांसद संतोष अहलावत ने बताया कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में खुद अशोक गहलोत ने झुंझुनूं में खेल यूनिवर्सिटी को फिर से शुरू करवाने के लिए वोट मांगे थे. अब वे अपने गृह क्षेत्र में यह यूनिवर्सिटी ले जाकर ना केवल जिले, बल्कि शेखावाटी और पास पड़ौस के जिलों के खिलाड़यों के साथ अन्याय कर रहे है.

अब झुंझुनूं के लोगों का कहना है कि यदि वर्तमान सरकार खेल यूनिवर्सिटी को लेकर मंशा नहीं रखती है. दोरासर में निर्धारित जगह पर पूर्व सरकार द्वारा तय किया गया कि 31 करोड़ रुपए का बजट जारी कर इसे स्तरीय खेल संस्थान बनाएं, ताकि खिलाडिय़ों को मौका मिले. उन्होंने कहा कि झुंझुनूं के लोग किसी भी सूरत में खेल यूनिवर्सिटी को दूसरी जगह नहीं ले जाने देंगे. इसके लिए अब आंदोलन भी शुरू हो गए है. पिछले दो दिनों में आधा दर्जन से अधिक संगठनों के बैनर तले कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन हुए है और कलेक्टर के जरिए मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि अब इंतजार नहीं, यूनिवर्सिटी का काम शुरू किया जाए.

छात्रनेताओं का भी कहना है कि झुंझुनूं जिले में कांग्रेस के चार विधायक होने के बाद भी यदि खेल यूनिवर्सिटी झुंझुनूं से जाती है तो यह उनकी विफलता है। साथ ही मांग की है कि चाहे लोकसभा हो या फिर विधानसभा, दोनों ही जगहों पर हमारे चुने हुए जनप्रतिनिधि यदि खेल यूनिवर्सिटी को लेकर नहीं बोलेंगे तो उनका भी बहिष्कार किया जाएगा। 

आपको बता दें कि झुंझुनूं की खेल यूनिवर्सिटी 2016 तक बनकर तैयार होनी थी, लेकिन विडंबना रही कि आज तक एक ईंट भी नहीं लगी. तीन साल तक वाइंस चांलसर समेत आठ जनों का स्टाफ लगाए रखा. तीन कर्मचारी संविदा भी लगाए रखे. उनको लाखों रुपए का भुगतान हुआ, लेकिन इसके बाद भी धरातल पर यूनिवर्सिटी का आया तो केवल और केवल नक्शा, जो सपनों से कम नहीं था. अब दुबारा जब यूनिवर्सिटी को दूसरी जगह स्थानान्तरित करने की बात चल पड़ी है तो इस बार आंदोलन भी जोर पकड़ रहे हैं.