फिर विवादों में JNU, 34 कर्मचारियों पर मेजर पेनल्टी के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही

अक्सर विवादों में घिरने वाला भारत का जाना माना शिक्षण संस्थान जवाहर लाल नेहरू विश्विद्यालय दिल्ली (JNU) फिर एक बार अपने सबसे बड़े कदम से सुर्खियों में आ गया है. 

फिर विवादों में JNU, 34 कर्मचारियों पर मेजर पेनल्टी के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही
फाइल फोटो

हिमांशु मित्तल, कोटा: अक्सर विवादों में घिरने वाला भारत का जाना माना शिक्षण संस्थान जवाहर लाल नेहरू विश्विद्यालय दिल्ली (JNU) फिर एक बार अपने सबसे बड़े कदम से सुर्खियों में आ गया है. सुजीत स्वामी की शिकायत के बाद इस बार जेएनयू दिल्ली (Jawaharlal Nehru University) ने अपने ही 34 कर्मचारियों पर कंडक्ट रूल के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करके फिर से विवादों को जन्म दिया है. 

JNU ने उन सभी कर्मचारियों के ऊपर मेजर पेनल्टी के तहत अनुशासत्मक कारवाही शुरू की है जिन्होंने एलटीसी बिलो में धोखाधड़ी करके विश्वविद्यालय को लाखों रुपये का चुना लगाया था. न केवल मेजर पेनल्टी के तहत अनुशासत्मक कार्यवाही शुरू हुई बल्कि उन सभी कर्मचारियों से एलटीसी क्लेम की उठाई गयी धन राशि ब्याज समेत वसूलने का आदेश पारित किया है.

ये भी पढ़ें: इस साल केवल इतने ही दिन हैं शादी के शुभ मुहूर्त, चूक गए तो 2021 में भी होंगे परेशान

दरअसल, कम्पट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (कैग) ऑफ़ इंडिया के DGCAE ने JNU की वर्ष 2017-18 की ऑडिट में पाया था कि विश्विद्यालय के 34 कर्मचारियों ने फर्जी एयर टिकट के बिल लीव ट्रेवल कन्सेशन(एलटीसी) के द्वारा लगाकर संस्थान से लाखों रुपये के क्लेम की धनराशि उठा ली थी. यह बिल ऑडिट की रिपोर्ट में फर्जी पाए गए थे. इन फर्जी बिलों के द्वारा संस्थान से 52 लाख रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी संस्थान के ही कर्मचारियों ने की थी. इसके अलावा 70 अन्य कर्मचारियों ने भी टेलीफोन हैंडसेट खरीद के बिल एवं मोबाइल के मासिक बिल पर पांच लाख रुपये का क्लेम उठा लिया था. जबकि वो कर्मचारी स्लिम के हकदार नहीं थे.

यह विषय जब संज्ञान में आया तो कोटा के सामाजिक कार्यकर्त्ता सुजीत स्वामी ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर, JNU के रजिस्ट्रार एवं कुलपति को अपने अधिवक्ता के द्वारा सभी दोषी कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज करने एवं सख्त एक्शन लेने के लिए ईमेल के माध्यम से 19 जून 2020 को शिकायत भेजी. उसके बाद सुजीत स्वामी ने दिल्ली पुलिस एवं जेएनयू में सुचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी कि कर्मचारियों के खिलाफ क्या एक्शन लिया गया. प्रतिउत्तर में दिल्ली पुलिस ने बताया कि उक्त शिकायत को जेएनयू के पास सीधे एक्शन लेने के लिए भेज दिया गया है साथ ही हिदायत दी गयी है की जो भी एक्शन लिया जाया उससे पुलिस को अवगत कराया जाये. 

जेएनयू प्रशासन ने बताया कि उक्त कर्मियों से एलटीसी क्लेम की पूरी धनराशि 10% वार्षिक ब्याज के साथ जिस दिन से क्लेम उठाया गया से वसूली जाएगी. जिसे कर्मचारी पांच किश्तों में जमा कर सकते हैं. अब तक 51,32,523/- रुपये दोषियों ने जमा कर दिए हैं जबकि 4,02,050/-  रुपये अभी भी जमा करना बाकि हैं. इसके अलावा दिनांक 23 जुलाई 2020 को हुई संस्थान की एग्जीक्यूटिव कौंसिल की 286वीं बैठक में सभी सदस्यों के सामने विषय को रखा, जिसमें निर्णय लिया गया कि उक्त सभी दोषी कर्मियों के खिलाफ कंडक्ट रूल्स के तहत मेजर पेनल्टी के लिए अनुशासत्मक कारवाही की जाये. जिस पर प्रशासन ने अमल करते हुए मेजर पेनल्टी के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही की प्रकिया शुरू कर दी है. कैग के द्वारा टेलीफोन हैंडसेट खरीद एवं मोबाइल मासिक बिल के ऑब्जेक्शन के ऊपर प्रशासन ने कोई कार्यवाही नहीं की है.

शिकायत दर्ज करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सुजीत स्वामी ने बताया कि पहले JNU प्रशासन ने मात्र आर्थिक दंड ही उक्त दोषियों के ऊपर कार्यवाही स्वरुप लगाया था, लेकिन मेरे द्वारा 19 जून 2020 को पुलिस कमिश्नर दिल्ली, कुलपति एवं रजिस्ट्रार JNU प्रशासन को दी गयी शिकायत के बाद विषय को एग्जीक्यूटिव कौंसिल की मीटिंग में रखा गया. जहां से सभी दोषियों के ऊपर कंडक्ट नियमों के तहत मेजर पेनल्टी के लिए अनुशासत्मक कार्यवाही किये जाने का निर्णय लिया गया. जिसकी प्रक्रिया शुरू भी हो चुकी है. 

जेएनयू के भ्रष्टाचार के ख़ुलासे के बाद अब कार्रवाई के लिए मैदान में उतरे सुजित की शिकायत पर 34 कर्मियों के खिलाफ एक साथ मेजर पेनल्टी के लिए अनुशासत्मक कार्यवाही शुरू होना अपने आप में बहुत बड़ा कदम है, लेकिन इस धोखाधड़ी पर सीधे धारा 420 के तहत मुकदमा दर्ज होना चाहिए. जनता के धन का धोखे से दुरूपयोग का ये मामला है, जिसके दुरुपयोग में ये कारिंदे कड़ी सजा के हकदार हैं. वहीं, अब सुजित मन बना चुके हैं यदि पुलिस शिकायत दर्ज नहीं की जाएगी तो कोर्ट तक का रूख करेंगे और दोषियों को सजा दिलाएंगे.

ये भी पढ़ें: राजस्थान में पटाखों की बिक्री और फोड़ने पर सरकार ने लगाई रोक, MP देवजी ने किया विरोध