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जोधपुर: खाना बर्बाद न करने को लेकर केटरर्स ने शुरू की मुहिम, किया कुछ ऐसा

शहर में मुहिम इतनी तेजी से फैली कि जोधपुर में एक महीने में ही 2 टन स्टील से ऐसी 10 हजार थालियां बनाई जा चुकी हैं. जिससे की खाने की बर्बादी को रोका जा सके.

जोधपुर: खाना बर्बाद न करने को लेकर केटरर्स ने शुरू की मुहिम, किया कुछ ऐसा
जोधपुर के जे 21 ग्रुप ने सबसे पहले इस पहल की शुरुआत की.

अरूण हर्ष/जोघपुर: राजस्थान के जोधपुर शहर में खाने को बर्बाद होने से बचाने के लिए हुई पहल एक अभियान बन गई. इस अभियान में समाज के लोगों के साथ शहर में बिजनेस कर रहे कैटरर्स ने भी साथ दे रहे हैं. शहर में एक समूह ने बड़े अक्षरों में लेजर प्रिंट से खाने की थाली पर ‘कृपया जूठा न छोड़ें’ लिखवाया.

बताया जा रहा है कि शहर में मुहिम इतनी तेजी से फैली कि जोधपुर में एक महीने में ही 2 टन स्टील से ऐसी 10 हजार थालियां बनाई जा चुकी हैं. जिससे की खाने की बर्बादी को रोका जा सके.

जोधपुर के जे 21 ग्रुप ने सबसे पहले इस पहल की शुरुआत की. जिसके बाद अन्य समाज ने भी इस सकारात्मक पहल की ओर आकर्षित हो रहे हैं. ग्रुप ने पहली बार आयोजन में थालियों पर 'जूठा ना छोड़े' का स्लोगन लिखवाना शुरू किया. अब उनकी यह पहल कैटरर्स और अन्य लोगों को भी पसंद आने लगी.

मीडिया से बातचीत में जे 21 ग्रुप के सदस्यों ने बताया कि पहली बार समदड़ी कस्बे के श्री कुंथुनाथ जैन मंदिर के जयंतीलाल पारेख ने ऐसी 1000 थालियां बनवाई थीं. 

ग्रुप के सदस्य राजेश जीरावाला ने मीडिया से बताया कि थालियों पर लिखे आग्रह का मनोवैज्ञानिक असर होता है. लोग सोच-विचार कर प्लेट में भोजन लेते हैं. यहां स्टील उद्यमियों ने जैन भोजनालय की थाली को सोशल मीडिया पर डाला था. इसके बाद लगातार ऑर्डर आने लगे. उन्होंने बताया कि एक महीने में इस तरह की 10 हजार थालियां बनाने के लिए कई कैटरर्स ने ऑर्डर दिए हैं. वहीं, सुमेरपुर और अन्य शहरों से भी ऐसी थालियों के ऑर्डर आए हैं.

जे 21 ग्रुप से जुड़े अन्य सदस्य बसंत चोपड़ा ने बताया कि उनकी इस पहल को लेकर कई समाज के लोगों ने उनसे संपर्क किया है और अब वे भी भोजन झूठा नहीं छोड़ने की मुहिम में सहयोग कर रहे हैं और उनका मकसद भी यही है कि अन्न का अनादर नहीं होना चाहिए.