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जोधपुर: कोर्ट ने दहेज के मामले में दिया लड़की वालों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश, जाने पूरा मामला

जोधपुर के इस मामले में जहां एक तरफ नववधू की ओर से ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाया है. वहीं दूसरी ओर वर पक्ष ने वधू पक्ष पर दहेज देने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करवाया है. 

जोधपुर: कोर्ट ने दहेज के मामले में दिया लड़की वालों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश, जाने पूरा मामला
कोर्ट ने दहेज देने वाले पिता पर मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं.

भवानी भाटी/जोधपुर: शादी में दहेज देना और लेना वर्षो से चली रही एक सामाजिक परम्परा कहे या बुराई समाज में व्याप्त है, जोधपुर में एक अनूठा मामला सामने आया है. जहां दहेज देने वालो के मुकदमे के बाद दहेज लेने वालों ने कोर्ट में इस्तगासा दायर कर दहेज देने वालो के खिलाफ कार्रवाई की गुहार लगाई तो महानगर मजिस्ट्रेट संख्या 5 ने एक दहेज देने वाले पिता पर मुकदमा दर्ज कर जांच के के आदेश दिए हैं. संभवतः यह प्रदेश में पहला मामला है, जब किसी दहेज देने वाले यानी लड़की के पिता पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश हुआ है. 

जोधपुर के इस मामले में जहां एक तरफ नववधू की ओर से अपने पति और ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना और छेड़छाड़ का आरोप लगाया है. वहीं दूसरी ओर वर पक्ष ने वधू पक्ष पर दहेज देने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करवाया है. दरअसल एक रिटायर्ड फौजी रामलाल ने अपनी बेटी मनीषा का विवाह साल 2017 में धूमधाम से, कैलाश प्रजापत के साथ किया. मनीषा का आरोप है कि विवाह के बाद से अब तक, कैलाश और मनीषा के बीच किसी भी तरह का संबंध नहीं बन पाया. बल्कि कैलाश के पिता उस पर बुरी नजर रखते हैं. कैलाश नोएडा में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर निजी कंपनी में कार्यरत है. 

पारिवारिक न्यायालय में मनीषा व उसके पिता रामलाल के बयान दर्ज किए गए. इन बयानों में रामलाल ने कोर्ट के समक्ष बताया कि उसने अपनी बेटी की शादी धूमधाम से की थी और यथासंभव स्त्री धन भी दिया. साथ ही उसने अपने बयानों में बताया कि उसने एक बंद लिफाफे में 100000 रूपए वर पक्ष को दिए. मनीषा के ससुर जेठमल प्रजापत पेशे से शिक्षक है और उसका आरोप है कि मनीषा व उसके पिता ने शादी का पूरा खर्च वापस लेने की नियत से, उस पर दबाव बनाने के लिए इस तरह का मुकदमा दर्ज करवाया है. 

हालांकि जेठमल का कहना है कि मैंने दहेज नहीं लिया, लेकिन क्योंकि उसके पिता यह स्वीकार करते हैं कि मैंने दहेज दिया है. जिसके चलते जेठमल ने इस्तगासा महानगर मजिस्ट्रेट संख्या 5 के समक्ष पेश कर लड़की के परिवार पर दहेज देने का आरोप लगाते हुए, दहेज निषेध कानून 1961 की घारा 3 के अन्तर्गत मुकदमा दर्ज करवाने की मांग की. जिस पर कोर्ट ने इस मामले में मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया. जेठमल के अधिवक्ता का कहना है कि दहेज लेना और देना दोनों अपराध है. तो ऐसे में एक पक्ष ही सजा क्यों भुगते. दूसरे पक्ष पर भी मुकदमा दर्ज कर उसका चालान पेश किया जाना चाहिए और संभवत प्रदेश में यह पहला मामला है, जब कोर्ट ने किसी दहेज देने वाले पिता पर मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं.

बरहाल दोनों परिवारों के रिश्ते में एक बड़ी खाई खुद चुकी है. दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर केस भी दर्ज करा दिए हैं. हालांकि समय के गर्भ में इस सवाल का जवाब है कि दोषी कौन? लेकिन यह भी तय है कि जल्द पुलिस जांच में इस सवाल का जवाब भी आ जाएगा. इस सब के बीच सवाल तो यह भी लाजमी है कि वह लड़की जिसके पिता ने बड़े अरमानों से उसकी शादी की लेकिन शादी की सहेज सजने से पहले ही सब कुछ खत्म हो गया, उसके सारे अरमान कुछ ही मिनटों में बह गए.