close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

जोधपुर: रेगिस्तानी इलाकों में धूल भरी आंधी ने बढ़ाई किसानों की परेशानी

रेगिस्तानी इलाकों में पिछले साल बारिश ना होने की वजह से खरीफ की फसलें बर्बाद हो गई थीं. इस बार 14 लाख हेक्टेयर में फसल की बुवाई होनी थी.

जोधपुर: रेगिस्तानी इलाकों में धूल भरी आंधी ने बढ़ाई किसानों की परेशानी
कई जगह तो पानी की एक बूंद भी नहीं बरसी है.

भूपेश आचार्य/बाड़मेर: मॉनसून आने के साथ प्रदेश में अच्छी बारिश होनी तो शुरू हुई, लेकिन एक दो दिन की बारिश के बाद ही मॉनसून ने लोगों को निराश कर दिया. रेगिस्तानी इलाकों में पिछले 10 दिनों से बारिश नहीं हुई है. बारिश तो दूर की बात है, रेगिस्तानी इलाकों में धूल भरी तेज आंधिया चल रही हैं. पारा फिर से 40 पार कर चुका है. ऐसे में किसानों के लिए मुसीबत फिर से बढ़ गई है.

सरहदी जिले बाड़मेर में इस बार लोगों ने सोचा था कि इंद्रदेव जमकर मेहरबान होंगे. पिछले 20-25 दिन पहले लगातार बिन मौसम के जमकर बारिश हुई थी. जिससे लोगों को आस जगी थी कि लगातार दो साल से पड़ रहे अकाल से इस बार पीछा छूट जाएगा.लेकिन आषाढ़ महीना पूरा होने को है और लोग बारिश की एक-एक बूंद के लिए तरसते नजर आ रहे हैं.

किसानों का कहना है कि उन्हें इस बार उम्मीद थी कि अच्छी बारिश होगी, लेकिन बारिश ने धोखा दे दिया. किसानों ने अपने खेतों में बुआई भी कर दी थी. अब उन्हें उम्मीद भरी निगाहों से आसमान की तरफ देखना पड़ रहा है.

रेगिस्तानी इलाकों में पिछले साल बारिश ना होने की वजह से खरीफ की फसलें बर्बाद हो गई थीं. इस बार 14 लाख हेक्टेयर में फसल की बुवाई होनी थी. लेकिन 10 प्रतिशत खेतों में ही बुवाई हो पाई है. कई जगह तो पानी की एक बूंद भी नहीं बरसी है.

किसानों का कहना है कि अगर इस बार फिर अकाल पड़ गया तो हालात बद से बदतर हो जाएंगे. बारिश की उम्मीद लिए किसान आसमान की तरफ देख रहे हैं. किसानों के सामने पशुओं के चारे और पानी का संकट सबसे बड़ी चुनौती है. इतने दिनों तक तो ग्रामीणों ने जैसे जैसे जुगाड़ करके काम चला लिया, लेकिन आगे क्या करेंगे किसी को समझ नहीं रहा है.