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जोधपुर: मूलभूत सुविधाओं को तरसते सरकारी स्कूल, शिक्षा विभाग बेखबर

जोधपुर के कालीबेरी स्थित स्कूल में आज की तारीख में 173 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन स्कूल का भवन जर्जर हालत में होने के कारण बच्चे हर वक्त खौफ के साए में  शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. 

जोधपुर: मूलभूत सुविधाओं को तरसते सरकारी स्कूल, शिक्षा विभाग बेखबर
स्कूल का भवन भी काफी जर्जर अवस्था में है.

अरुण हर्ष/जोधपुर: पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में भुखमरी और भेदभाव से परेशान होकर भारत आए पाक विस्थापित नागरिकों को भारत आने के बाद अब उनके बच्चों को शिक्षा की आस जगी है. जोधपुर में वैसे तो स्कूलों में प्रवेश उत्सव 31 जुलाई तक है लेकिन इससे पहले कई स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ रही है. पाकिस्तान से प्रताड़ित होकर आए हिंदू परिवारों के बच्चे भी इन दिनों सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के लिए आ रहे हैं. लेकिन सरकारी स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं नहीं होने के कारण से इन बच्चों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से आए हिंदू पाक विस्थापित जोधपुर में काफी संख्या में रहते हैं. पाकिस्तान में उत्पीड़न का शिकार होने के बाद सैंकड़ों पाक विस्थापित परिवार जोधपुर आकर रहने लगे. कई पाक विस्थापित नागरिकों को यहां की नागरिकता भी दी गई है. अब इन पाक विस्थापितों को अपने बच्चों को शिक्षा से जोड़ने की उम्मीद जगी है. जोधपुर के कालीबेरी स्थित स्कूल में आज की तारीख में 173 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन स्कूल का भवन जर्जर हालत में होने के कारण हर वक्त खौफ के साए में बच्चे अर्जित कर रहे हैं. 

पाक विस्थापित के लिए काम करने वाले संगठन हिंदू सिंह सोढा का कहना है कि पाकिस्तान में प्रताड़ित होकर आए परिवारों के बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने को लेकर काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. यहां तक कि सरकार ने शिक्षा विभाग के लेकर पिछले 1 साल से कोई मीटिंग नहीं की है. सरकार को बच्चों की शिक्षा के बारे में गंभीरता पूर्वक सोचना चाहिए.

वहीं कालीबेरी स्थित स्कूल में 173 बच्चे होने के बावजूद सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे स्कूल चल रही है. स्कूल का भवन भी काफी जर्जर अवस्था में होने के कारण से शिक्षक और छात्रों में खौफ है. आसपास पत्थर की खदानों में होने वाले धमाकों की वजह से बिल्डिंग मैं काफी दरारे आ चुकी है. समय रहते अगर सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो भविष्य में कोई बड़ी जनहानि भी हो सकती है. इसलिए सरकार को इन पाक विस्थापित बच्चों के लिए बनाई गई स्कूल का सही ढंग से संभाल करनी चाहिए. 

वही कालीबेरी स्थित हायर स्कूल को पाक विस्थापितों की स्कूल का नोडल इंचार्ज बनाया गया है. नोडल अधिकारी श्रवण राम जांगिड़ का कहना है कि पाक हिंदू स्थापित बच्चों को किसी भी तरह की असुविधा नहीं हो इसके लिए उन्होंने सरकार से विशेष दिशा-निर्देश लेकर इन बच्चों को पढ़ने के लिए सारी सुविधाएं हैं जो प्रदान कर रहे हैं. यहां तक कि इन पाक विस्थापित बच्चों की शिक्षा में कोई भी डॉक्यूमेंट हो वह लेकर उन्हें शिक्षा से जोड़ने का काम किया जा रहा है.

निश्चित रूप से विस्थापित परिवारों के लिए बच्चों को शिक्षा देना किसी वरदान से कम नहीं होगा. लेकिन इन परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा की यह डगर काफी मुश्किल नजर आ रही है. अब देखना होगा कि इस गंभीर मामले पर राज्य सरकार कितनी संवेदनशीलता के साथ कार्य करती है.