जोधपुर: साईं जन्म स्थान पर चल रहे विवाद को लेकर सामने आया बाबा का परिवार, कहा...

साईं के परिजनों के मुताबिक साईं का जन्म राजस्थान जोधपुर के फलोदी शहर के पुस्करणा ब्राम्हण कुल में हुआ था.

जोधपुर: साईं जन्म स्थान पर चल रहे विवाद को लेकर सामने आया बाबा का परिवार, कहा...
बाबा के इस परिवार को शिर्डी मंदिर ट्रस्ट से कोई लेना-देना नहीं है.

अरुण हर्ष/जोधपुर: साईं बाबा के मुस्लिम होने के विवाद के बाद जन्म स्थान पर चल रहे विवाद पर साईं के परिजनों ने फिर एक बार अपनी चुप्पी तोड़ी है. परिजनों ने कहा 'साईं मुस्लिम नहीं थे और न ही बाबा जन्मस्थान महाराष्ट्र था. बाबा फलोदी राजस्थान के ब्राम्हण परिवार से थे'.

साईं के परिजनों के मुताबिक साईं का जन्म राजस्थान जोधपुर के फलोदी शहर के पुस्करणा ब्राम्हण कुल में हुआ था. बता दें कि, कई वर्षों तक चुप्पी साधे बैठा था साईं बाबा का परिवार. तरह-तरह के सवाल उठने पर भी परिवार ने अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी थी. अब जब साईं बाबा के जन्म स्थान को लेकर विवाद पनपा तब बाबा का वास्तविक परिवार सामने आया है. 

हालांकि, बाबा के इस परिवार को शिर्डी मंदिर ट्रस्ट से कोई लेना-देना नहीं है और न हीं बाबा का परिवार कोई चाह रखता है. लेकिन साईं के जन्म स्थान पर विवाद होने पर फिर दोबारा बाबा का परिवार सामने आया है. साईं को मांस मदिरापान करने जैसी अभद्र बातों का खण्डन करने के लिए साईं बाबा का परिवार सामने आया. हम आपको बताना चाहेंगे कि साईं फलोदी के पुस्करणा ब्राम्हण थानवी परिवार के थे. साईं का नाम बागमल पुत्र हरिराम थानवी और मां का नाम अंबादेवी था. साईं 16 से 20 साल की उम्र में वैराग्य के चलते अपना घर छोडकर निकल पड़े थे. 

कई वर्षों पहले साईं बाबा के फलोदी मुल का होने की बात जोधपुर सिध्दपीठ सिध्दनाथ आश्रम के नेपाली बाबा ने भी कही थी. स्थानीय जनपथ अखबार ने इस खबर को प्रमुखता भी दी थी. तब भी साईं का परिवार आगे नहीं आया था. जानकारी के मुताबिक, वर्ष 1885 के समय फलोदी निवास कर रहे बाबा के परिजन जब महाराष्ट्र के नासिक शहर बाबा को लेने गए थे तो बाबा ने उन्हे सारे रिश्ते नाते भुलाकर वापस फलोदी चले जाने को कहा था. 

परिवार के पास बाबा के महाराष्ट्र राज्य के नासिक शहर में होने के प्रमाण है. 1985 मे जब बाबा को लेने परिजन गए थे तब की नासिक म्युनिसिपल समिति की रसीद बाबा के नासिक मे होने का खुलासा भी करती है. इतना ही नहीं बाबा के परिजनों का कहना है कि शिर्डी मंदिर में एक लोटा पड़ा है, जिसे मंदिर ट्रस्ट सार्वजनिक करें. उस बागमल थानवी लिखा है जो साईबाबा का वास्तविक नाम है. फलोदी निवासी शौधकर्ता महेश पुष्करणा ने बाबा के फलोदी निवासी होने के खुलासे किए है .