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जोधपुर: सूखने की कगार पर जवाई बांध, जल संकट ने किया जनता को बेहाल

गांवो के तालाब सूखे पड़े हैं वहीं कई तालाबो में पानी है लेकिन इतना खारा की एक बूंद पानी नहीं पी सकते. 

जोधपुर: सूखने की कगार पर जवाई बांध, जल संकट ने किया जनता को बेहाल
रोहट उपखण्ड क्षेत्र पिछले लम्बे समय से पेयजल के संकट से बेहाल है.

सुभाष रोहिसवाल/पाली: यूं तो पाली जिला हर बार बारिश की बेरुखी के चलते अकाल से दो दो हाथ करता आया लेकिन इस बार की स्थिति बिल्कुल अलग ही है. जवाई बांध ने अपना तल दिखा दिया तो प्रदेश के सभी कुओं ने भी जबाब दे दिया. शहर में 96 घण्टे में पानी दिया जा रहा वहीं गांवो की हालत भी बहुत दयनीय हो गई है. 7 दिन से लेकर महीनों तक गांवो में पानी नहीं आता. महिलाएं चार किलोमीटर दूर से एक मटकी पानी लाने को मज़बूर है. 

वहीं सबसे ज्यादा हालात जानवरों की खराब हो रही है. मवेशी बिन पानी के दम तोड़ रहे लेकिन प्रशासन इन सबके आगे अपाहिज नजर आ रहा है. समाजसेवी जरूर अपने स्तर पर मवेशियों के लिए पानी की व्यवस्था कर रहा लेकिन वो भी ऊंट के मुंह में जीरे के बराबर साबित हो रहा है.

पाली जिले का एक भी उपखण्ड नहीं जो पेयजल संकट से नहीं जूझ रहा हो. वहीं जिले में सबसे अधिक कोई उपखण्ड पानी के लिए तरस रहा है तो वो है रोहट उपखण्ड. रोहट उपखण्ड क्षेत्र पिछले लम्बे समय से पेयजल के संकट से बेहाल है. पिछली बार मानसून की बेरुखी से जवाई में पानी नहीं आया वहीं इस बार हालात और भी ज्यादा खराब है. गांवो में सात दिन से एक महीनें तक पानी के दर्शन तक नहीं होते. महिलाएं सुबह जल्दी उठाकर एक मटकी पानी के लिए तीन से चार किलोमीटर दूर निकलती हैं और जहां भी कुआं तालाब मिलता पानी लेकर घर आती हैं. 

पानी लाने के बाद घर का काम बच्चों के लिए रोटी बनाना फिर मजदूरी में लिए निकलना मानों हर दिन की दिनचर्या में शामिल हो गया. इस बीच पानी माफियाओं की चांदी हो गयी है. पानी माफिया मनमाने रूपयो पर एक टैंकर पानी को बेचा जा रहे हैं.

गांवो के तालाब सूखे पड़े हैं वहीं कई तालाबो में पानी है लेकिन इतना खारा की एक बूंद पानी नहीं पी सकते. रही गयी कसर पाली के प्रदूषण ने पूरी कर दी है. फेक्ट्रियों का पानी पाताल तक जा पहुंचा है जिससे कुओं का पानी भी जहरीला हो गया है. इंसान तो फिर भी पानी के लिए इधर उधर जुगाड़ कर लेता लेकिन जिले के मवेखी बिन पानी के जानवर तड़प तड़प कर मर रहे है. किसान भी अपनी आंखों के सामने मवेशियों को मरते देखने को मजबुर हैं.