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जोधपुर: जल संरक्षण के लिए ग्रामीण ने खुदवाया तालाब, सरकार ने भी की सराहना

वहीं जब इसकी जानकारी केंद्रीय जल संरक्षण टीम को भी मिली तो वहां से केन्द्रीय नोडल ऑफिसर अनुराधा प्रसाद व उनकी केंद्रीय टीम भी दाता गांव पहुंची.

जोधपुर: जल संरक्षण के लिए ग्रामीण ने खुदवाया तालाब, सरकार ने भी की सराहना
यह तालाब जिले के लिए मॉडल तालाब बन चुका है.

बबलू मीणा/जालोर: जल संरक्षण को लेकर केन्द्र व राज्य सरकार भले ही करोड़ों रुपए खर्च करती हो लेकिन धरातल पर इतना का काम होता नहीं दिखाई देता. वहीं जालोर जिले के सांचोर क्षेत्र के दाता गांव में स्वामी हरीश ने एक नई मिसाल पेश की है. उन्होनें गांव सहित आसपास के क्षेत्र को पानी मिल सके इसके लिए खुद के खर्चे से गांव में एक शानदार तालाब खुदवाया है. 

वहीं जब इसकी जानकारी केंद्रीय जल संरक्षण टीम को भी मिली तो वहां से केन्द्रीय नोडल ऑफिसर अनुराधा प्रसाद व उनकी केंद्रीय टीम भी दाता गांव पहुंची. स्वामी के द्वारा बनाए गए इस भव्य तालाब की प्रशंसा की और आगे रिपोर्ट देने की बात कही. बता दें कि हरिश ने जिसमें 100 प्रजातियों के पांच सौ से अधिक पौधे लगाकर एक हरे भरे उद्यान का निर्माण भी किया है. 

आपको बता दें सांचौर क्षेत्र के दाता गांव में स्वामी ने वर्ष 2015 में तालाब का निर्माण करवाया था, लेकिन 2015 में आई भयानक बाढ़ से यह तालाब पूरी तरह टूट गया. स्वामी के द्वारा फिर उसको मरम्मत करवाया तो 2017 में दूसरी बार आई बाढ़ ने फिर से तालाब को तोड़ दिया. लेकिन स्वामी ने हिम्मत नहीं हारी एक बार फिर से करवाया तालाब निर्माण करवाया जो आज जिले के लिए मॉडल तालाब बन चुका है.

तालाब ही नहीं स्वामी ने दाता गांव में वीरान पड़े जंगल को हरियाली में तब्दील कर दिया है. स्वामी ने इसी तालाब के उपर ही आश्रम कि कुटिया बनाई है जिसमें 100 प्रजातियों के पांच सौ से अधिक पौधे लगाकर एक हरे भरे उद्यान का निर्माण किया है. वहीं पौधों को पानी पिलाने के लिए एक वॉटर हार्वेस्टिंग टांका भी बनाया. इस टांके से वर्ष भर के लिये पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पाता था, जिसकी के लिए निजी खर्च से टैंकरों से पानी पिला रहे हैं. वहीं उन्होंने पानी की पाइल लाइन डालने को लेकर कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत करवाया लेकिन सरकार की और से किसी तरह की मदद नहीं पहुचाई गई. 

आपकों बता दें कि स्वामी ने उनकी खुद की मेहनत से ये सबकुछ किया स्वामी को पंचायत की और से किसी प्रकार की मदद नहीं दी गई. यहां तक कि पौधों को पानी देने के लिए कनेक्शन भी उपलब्ध नहीं करवाया गया तो उन्हें मजबूरन अरने पैसों से खरीद कर टैंकरों से पानी मगवाकर इस वीरान पड़े जंगल को हरियाली में तब्दील किया और तालाब के चारों ओर घास लगाकर के तालाब के सौंदर्य में चार चांद लगा दियें है. स्वामी ने बताया कि यह तालाब दाता गांव सहित आस-पास के क्षेत्र के लिए एक बड़ा जलस्रोत बनकर उभरेगा.

तालाब के पास बनाई कुटिया, जहां लगाए 500 से अधिक पौधे, कुटिया में कल्पवृक्ष, पीपल, बकायन, कदम्ब, बल्वपत्र, गूलर, जूही, चंपा, चमेली, केवडा़, तुलसी, गुलमोहर, आंवला, मोरपंख, वोजनविला, धतूरा, केर, झाल, खेजडी़, पीपली, सफेद आक, हरसिंगार, बांस, चीकु, क्रिसमस ट्री, साईकस जैसी विभिन्न प्रजाति के पौधे लगाए हैं.