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Ashok Gehlot : अशोक गहलोत जिनका जन्म मिथुन लग्न में हुआ है, गजकेसरी योग और शनि की दृष्टि से इनकी कुंडली में राजयोग का निर्माण हुआ और भाग्य स्थान के स्वामी शनि चौथे भाव में विराजमान होकर जनता का कारक बनते हैं, जिससे जनसमर्थन हमेशा उनके साथ रहता है.
पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी के अनुसार हालांकि नवंबर में राहु की उपस्थिति सांप्रदायिक तनाव आंतरिक चुनौतियों का संकेत देती है, 2028 उसके बाद से उनकी लोकप्रियता का ग्राफ वापस एक बार ऊपर की ओर चलेगा, हालांकि विरोधी और शत्रु भी इसके साथ ही सक्रिय रहेंगे. इस समय बृहस्पति का अतिचार परिभ्रमण कहीं न कहीं स्वास्थ्य में परेशानियां देगा दशा की दृष्टिकोण से अगर देखें तो कुछ खास पता चलते है.
पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी बताते हैं कि दरअसल इनकी कुंडली में सूर्य मंगल का योग और अस्त्र मंगल हमेशा विरोधी और शत्रुओं को षड्यंत्र रखेगा. राजनीतिक ध्रुवीकरण में ये टिंबाहु आयोग उनके लिए लाभप्रद साबित होगा. परंतु अस्त मंगल के कारण कहीं ना कहीं शत्रु भी सक्रिय रहेंगे, हालांकि राहु की महादशा में बुद्ध का अंतर जो जून 2027 से दिसंबर 2019 के मध्य चलेगा. वहीं कहीं ना कहीं उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति में सहायक साबित हो सकता है.
अशोक गहलोत, मिथुन लग्न और लग्नेश बुध की अंतर्दशा राजनीति में एक बार पुनः इनको सक्रिय करेगी, हालांकि स्वास्थ्य पर जरूर ध्यान देने की आवश्यकता ह. इनकी कुंडली में शुक्र द्वादशेश से द्वादश स्थान में स्वैग रही है. जो विपरीत राजयोग भी बना रहा है वहीं उच्च का सूर्य राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति में सहायक बनता है.
पंडित रमेश भोजराज द्विवेदी, जोधपुर
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