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Breaking News: बाड़मेर के चौहटन में एक डीएसपी और वाहन चालक के बीच हुए विवाद ने तब तूल पकड़ा जब चालक ने डीएसपी पर थप्पड़ मारने का गंभीर आरोप लगाया. पीड़ित चालक ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि ऐसे तनावपूर्ण माहौल में वह नौकरी नहीं कर पा रहा है, क्योंकि वह पिछले 26 वर्षों से सेवापरक कार्य में लगा हुआ है और अब सेवा मुक्त कर दिया जाए.
मामला पहले तो दब सा गया था, लेकिन एक ऑडियो वायरल होने के बाद यह फिर से सुर्खियों में आ गया, जिसमें चालक की पीड़ा और थप्पड़ मारने की घटना का स्पष्ट जिक्र था. सांसद हनुमान बेनीवाल के ट्वीट के बाद यह मुद्दा और जोर पकड़ गया. शिकायत एसपी स्तर तक पहुंच चुकी थी, और अफसरों ने रात में ही दोनों पक्षों के बीच समझौता करा दिया था. हालांकि, अब इस परिस्थिति में दो अलग-अलग कहानियां सामने आ रही हैं. डीएसपी ने जी मीडिया से दूरभाष पर बातचीत में कहा कि चालक ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया था, जिसकी शिकायत उन्होंने उच्चाधिकारियों से की थी, और उसके बाद इस मामले को बेवजह तूल दिया जा रहा है.
नहीं कर सकता नौकरी...
पीड़ित हेड कांस्टेबल रामूराम ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा कि वह चौहटन डिप्टी जीवनलाल और रीडर गोपीकिशन के साथ 11 सितंबर की रात धनाऊ थाने से एक मामले की जांच के बाद चौहटन लौट रहे थे, तभी डीएसपी ने गाली-गलौज करते हुए उन्हें थप्पड़ मार दिया. पुलिस अधीक्षक नरेंद्र सिंह मीणा को जब इसकी सूचना मिली, तो उन्होंने बाड़मेर एएसपी जसाराम बोस को मौके पर भेजा, जिन्होंने समझाकर दोनों पक्षों से राजीनामा लिखवा लिया. रामूराम ने बताया कि 12 सितंबर को वह बाड़मेर एसपी के पास गया और पूरा घटनाक्रम बयान किया, लेकिन अब उनके साथ कोई खड़ा नहीं है. ऐसे तनावपूर्ण माहौल में वह नौकरी जारी नहीं रख पा रहे हैं, क्योंकि उनके अधिकारी उनका साथ नहीं दे रहे.
हनुमान बेनीवाल ने राजस्थान पुलिस से की कार्रवाई की मांग
हनुमान बेनीवाल ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि बाड़मेर जिले के चौहटन में वृताधिकारी के पद पर कार्यरत राजस्थान पुलिस के एक अधिकारी द्वारा अपने अधीनस्थ मेघवाल समाज के एक हेड कांस्टेबल के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए मारपीट करने का मामला सोशल मीडिया के माध्यम से उनके संज्ञान में आया है. एक पुलिस अधिकारी द्वारा अपने अधीनस्थ कर्मचारी के साथ ऐसा बर्ताव करना न केवल निंदनीय है, बल्कि यह सरकार की नीतियों पर भी सवालिया निशान लगाता है.
उन्होंने राजस्थान पुलिस के उच्च अधिकारियों से अपील की है कि इस मामले में संज्ञान लेते हुए उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए और बिना किसी भेदभाव के प्रताड़ित हुए दलित पुलिस कर्मी के पक्ष को सुनते हुए न्यायसंगत कार्रवाई की जाए. इस मामले में पीड़ित पुलिस कर्मी का एक ऑडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. बेनीवाल ने मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा से भी कहा कि आजादी के दशकों बाद भी राजस्थान पुलिस में कार्यरत मेघवाल समाज के एक व्यक्ति के साथ उसके उच्च अधिकारी द्वारा ऐसा व्यवहार करना न केवल उस अधिकारी की, बल्कि भाजपा की भी दलित विरोधी मानसिकता को दर्शाता है.
बाड़मेर जिले के चौहटन में वृताधिकारी के पद पर कार्यरत राजस्थान पुलिस के एक अधिकारी द्वारा अपने अधीनस्थ कार्यरत मेघवाल समाज के एक हैड कांस्टेबल के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए उसके साथ मारपीट करने का मामला सोशल मीडिया के माध्यम से संज्ञान में आया,एक पुलिस अधिकारी द्वारा खुद के…
— HANUMAN BENIWAL (@hanumanbeniwal) September 12, 2025
MLA हरीश चौधरी ने इस मामले कहा- दुर्भाग्यपूर्ण
बाड़मेर में एक पुलिस अधिकारी व हैंड कांस्टेबल के बीच ड्यूटी के दौरान घटित घटना बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण है. पुलिस अधिकारी और हैंड कांस्टेबल रामूराम मेघवाल के बीच हुआ थप्पड़ मारने का मामला केवल एक व्यक्ति के अपमान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की सोच और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है. राजस्थान पुलिस में 26 वर्षों की सेवा देने वाले स्वतंत्रता सेनानी के परिवार के सदस्य और दलित मेघवाल समाज के कार्मिक के साथ विभाग के अंदर ही भेदभाव, प्रताड़ना और शोषण की यह घटना अत्यंत गंभीर है. और इस तरीके से पीड़ित कार्मिक को लाईन हाजिर करने की सजा देना उनकी आवाज को दबाना सरकार की दलित विरोधी हीन मानसिकता को उजागर करता है. एक पुलिस अधिकारी की गरिमा तभी पूरी होती है जब वह अनुशासन में रहकर काम करे और साथ ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों के मान-सम्मान की रक्षा भी करे. यदि पुलिस बल के अंदर ही अपने सहयोगियों के साथ अन्याय होगा तो अनुशासन और विश्वास दोनों पर आंच आएगी.
यदि एक पुलिस कांस्टेबल जो खुद जनता की सुरक्षा का दायित्व निभाता है सुरक्षित और सम्मानित नहीं है, तो साधारण नागरिक की स्थिति का अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं है. यह प्रकरण सरकार और प्रशासन की संवेदनशीलता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है. सरकार को इस पूरे मामले में त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि न केवल रामूराम मेघवाल की गरिमा बहाल हो, बल्कि आम जनता का भरोसा भी शासन-प्रशासन पर कायम रह सके.
बाड़मेर में एक पुलिस अधिकारी व हैंड कांस्टेबल के बीच ड्यूटी के दौरान घटित घटना बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
— Harish Chaudhary (@Barmer_Harish) September 13, 2025
पुलिस अधिकारी और हैंड कांस्टेबल रामूराम मेघवाल के बीच हुआ थप्पड़ मारने का मामला केवल एक व्यक्ति के अपमान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की सोच और कार्यप्रणाली पर सवाल…