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Rajasthan News: राजस्थान के बहुचर्चित एएनएम भंवरी देवी हत्याकांड से जुड़े मामले ने एक बार फिर राजस्थान हाईकोर्ट में जोरदार तरीके से गूंजा है. हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेशों का पालन न होने के कारण मृतका भंवरी देवी के वारिसों को पेंशन और सेवा परिलाभ प्रदान न किए जाने पर दायर अवमानना याचिका में अदालत ने कड़ी सख्ती बरतते हुए संबंधित पक्षों पर कार्रवाई का संकेत दिया है. यह मामला 2011 से चला आ रहा है, जब भंवरी देवी की हत्या कर दी गई थी, और हाल ही में कोर्ट ने उसके बेटे-बेटियों को बकाया लाभ देने के आदेश दिए थे, लेकिन दो साल बाद भी अमल न होने पर अवमानना नोटिस जारी किया गया.
भंवरी देवी हत्याकांड...
बहुचर्चित एएनएम भंवरी देवी हत्याकांड से जुड़ा मामला एक बार फिर राजस्थान हाईकोर्ट में चर्चा का विषय बना. हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद मृतका भंवरी देवी के वारिसान को पेंशन और सेवा परिलाभ नहीं दिए जाने पर दाखिल अवमानना याचिका में अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है. जस्टिस रेखा बोराणा की एकलपीठ ने 21 माह से आदेशों की पालना नहीं होने पर नोटिस जारी कर चिकित्सा सचिव, जोधपुर सीएमएचओ, पेंशन विभाग और एलआईसी सहित संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है.
नहीं मिल रही पेंशन
मृतका भंवरी देवी के पुत्र साहिल पेमावत और दोनों पुत्रियों की ओर से अधिवक्ता यशपाल खिलेरी ने अवमानना याचिका दायर की. याचिका में उल्लेख किया गया कि 1 सितंबर 2011 को भंवरी देवी की हत्या के बाद से अब तक उन्हें बकाया सेवा परिलाभ और नियमित पेंशन का भुगतान नहीं किया गया है. हाईकोर्ट ने 12 जनवरी 2024 को रिट याचिका स्वीकार करते हुए स्पष्ट आदेश दिया था कि मृतका के सभी बकाया सेवा परिलाभ, देय पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों की गणना कर चार माह के भीतर वारिसान को एरियर सहित भुगतान किया जाए. साथ ही अदालत ने आदेश में ब्याज सहित भुगतान का भी प्रावधान किया था और चिकित्सा विभाग को यह छूट दी थी कि वह मृतका की मृत्यु से संबंधित आवश्यक सूचना और सर्विस बुक अधीनस्थ न्यायालय से आवेदन कर प्राप्त कर सके.
भंवरी देवी को CMHO नहीं मान रहा मृत
इसके बावजूद हाईकोर्ट के आदेशों की पालना नहीं की गई. याचिका में बताया गया कि 21 माह बीत जाने के बाद भी न तो पेंशन दी गई और न ही सेवा परिलाभ का भुगतान हुआ. उल्टा, जोधपुर सीएमएचओ कार्यालय ने भंवरी देवी का मृत्यु प्रमाण पत्र न होने का हवाला देकर मामले को लंबित कर रखा है. जबकि वास्तविकता यह है कि तत्कालीन जोधपुर सीएमएचओ ने 16 जनवरी 2012 को आदेश जारी कर भंवरी देवी को मृत मानते हुए सेवा से पृथक कर दिया था. इतना ही नहीं, निदेशक चिकित्सा विभाग जयपुर ने 28 फरवरी 2012 को भंवरी देवी के पुत्र को अनुकंपा नियुक्ति भी प्रदान की थी. इन सभी तथ्यों के बावजूद वर्तमान में जोधपुर सीएमएचओ कार्यालय भंवरी देवी को मृत मानने से इनकार कर रहा है.
हाईकोर्ट के आदेशों की पालना नहीं
इसके बावजूद हाईकोर्ट के आदेशों की पालना नहीं की गई. याचिका में बताया गया कि 21 माह बीत जाने के बाद भी न तो पेंशन दी गई और न ही सेवा परिलाभ का भुगतान हुआ. उल्टा, जोधपुर सीएमएचओ कार्यालय ने भंवरी देवी का मृत्यु प्रमाण पत्र न होने का हवाला देकर मामले को लंबित कर रखा है. जबकि वास्तविकता यह है कि तत्कालीन जोधपुर सीएमएचओ ने 16 जनवरी 2012 को आदेश जारी कर भंवरी देवी को मृत मानते हुए सेवा से पृथक कर दिया था. इतना ही नहीं, निदेशक चिकित्सा विभाग जयपुर ने 28 फरवरी 2012 को भंवरी देवी के पुत्र को अनुकंपा नियुक्ति भी प्रदान की थी. इन सभी तथ्यों के बावजूद वर्तमान में जोधपुर सीएमएचओ कार्यालय भंवरी देवी को मृत मानने से इनकार कर रहा है.
एक दशक से ज्यादा समय से सुर्खियों में पिछले एक दशक से ज्यादा समय से सुर्खियों में
भंवरी देवी का मामला पिछले एक दशक से ज्यादा समय से सुर्खियों में है. 1 सितंबर 2011 को हुई उसकी हत्या ने पूरे राजस्थान को झकझोर दिया था. तब से उसका परिवार न्याय और सेवा परिलाभों के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है. अब हाईकोर्ट ने एक बार फिर अधिकारियों को कठघरे में खड़ा करते हुए जवाब तलब किया है और स्पष्ट कर दिया है कि अदालत के आदेशों की अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जाएगी. अगली सुनवाई में यह तय होगा कि भंवरी देवी के वारिसों को उनका वैधानिक हक आखिर कब तक मिलेगा. फिलहाल, अदालत के नोटिस के बाद संबंधित अधिकारियों पर जवाब देने का दबाव बढ़ गया है.
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