चूरू विधायक की बढ़ीं मुश्किलें! हाईकोर्ट ने केस वापसी से किया इनकार

Jodhpur News: दसवीं की तथाकथित फर्जी मार्कशीट मामले में चूरू विधायक की मुश्किलें और बढ़ गई है. हाईकोर्ट ने राज्य की केस वापसी याचिका खारिज को खारिज कर दिया है.

चूरू विधायक की बढ़ीं मुश्किलें! हाईकोर्ट ने केस वापसी से किया इनकार

Rajasthan News: राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले पर सुनवाई करते हुए चूरू विधायक हरलाल सहारण के खिलाफ लंबित आपराधिक मुकदमें को वापस लेने की राज्य सरकार की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि केवल इस आधार पर कि कोई आरोपी विधानसभा के लिए चुना गया है तो यह उनकी जनता में अच्छी छवि का प्रमाण नहीं हो सकता है. जस्टिस इन्द्रजीत सिंह व जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने राज्य सरकार की ओर से मुकदमा वापस लेने की याचिका को सुनवाई के बाद खारिज कर दिया गया.

राज्य की ओर से महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद ने चूरू विधायक हरलाल सहारण के खिलाफ कोतवाली चूरू में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471, 193 और 120-बी के तहत दर्ज किया गया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि आरोपी - हरलाल सिंह ने जिला परिषद, वार्ड संख्या 16 के सदस्य पद के लिए अपना नामांकन प्रस्तुत किया था. नामांकन पत्र के साथ उसने कक्षा 10वीं उत्तीर्ण की अंकतालिका और प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए और उन्हें असली बताकर इस्तेमाल किया. यह अच्छी तरह जानते हुए कि वे जाली थे. जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपी - हरलाल के खिलाफ आरोप पत्र प्रस्तुत किया. आपराधिक मामले के लंबित रहने के दौरान राज्य सरकार ने एक समिति गठित की, जिसने आरोपी जो चूरू विधानसभा क्षेत्र का वर्तमान विधायक है, के खिलाफ लंबित आपराधिक मामला वापस लेने का निर्णय लिया. राज्य ने अभियोजन वापस लेने के लिए सीआरपीसी की धारा 321 के तहत अनुमति मांगते हुए यह आवेदन प्रस्तुत किया है.

सरकार की रिपोर्ट पेश करते हुए एडवोकेट जनरल राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि राज्य सरकार ने 26 नवंबर 2024 की बैठक में फैसला लिया कि चूंकि हरलाल सहारण अब विधायक हैं, इसलिए उनके खिलाफ मुकदमा वापस लिया जाना चाहिए। सरकार ने हाईकोर्ट में सीआरपीसी की धारा 321 के तहत याचिका दाखिल की. इसमें एडवोकेट जनरल राजेंद्र प्रसाद ने कोर्ट में तर्क दिया कि उस मामले में सबूतों में कमी है. महाधिवक्ता ने तर्क दिया कि पुलिस चार्जशीट में धारा 120-बी लगाई गई है, जबकि इस धारा में दो या इससे अधिक आरोपी होने चाहिए, जबकि चार्जशीट सिर्फ हरलाल सहारण के खिलाफ है. इसी तरह धारा 193 के मामले में अलग प्रक्रिया होनी चाहिए. इस मामले में चुनाव अधिकारी को शिकायत दर्ज करानी चाहिए थी, न कि किसी निजी व्यक्ति को, और जिला परिषद का कार्यकाल 2020 में समाप्त हो चुका है. पुलिस ने जांच के बाद धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश सहित अन्य धाराओं में चार्जशीट पेश की. कोर्ट ने संज्ञान लेकर आरोप भी तय किए. तब हरलाल सहारण ने संज्ञान के आदेश को चुनौती दी थी, लेकिन 11 सितंबर 2023 को उनकी रिवीजन पिटिशन खारिज कर दी गई.

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मामले पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि केवल इस आधार पर कि कोई आरोपी विधानसभा के लिए चुना गया है, यह उनकी जनता में अच्छी छवि का प्रमाण नहीं हो सकता. कोर्ट ने सरकार की ओर से पेश दलीलों को खारिज करने के साथ ही फटकार लगाते हुए कहा कि वे यह साबित नहीं कर सके कि मुकदमा वापस लेने से न्याय के व्यापक हित कैसे पूरे होंगे. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आवेदन सद्भावना से नहीं बल्कि कानूनी प्रक्रिया को दबाने के लिए दिया गया लगता. हाईकोर्ट ने सरकार के सभी तर्कों को नकारते हुए कड़ी टिप्पणी की. कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर कि कोई आरोपी विधानसभा के लिए चुना गया है, यह उनकी जनता में अच्छी छवि का प्रमाण नहीं हो सकता. हाईकोर्ट के फैसले के बाद विधायक हरलाल सहारण के खिलाफ आपराधिक मुकदमा जारी रहेगा. उस मामले की सुनवाई सरदारशहर अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष सुनवाई जारी रहेगी. हरलाल सहारण की तरफ से आरोप तय करने के आदेश को चुनौती देने वाली रिवीजन पिटिशन अभी भी लंबित है, जिसमें वे अपनी बचाव की कोशिश कर सकते हैं.

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