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Rajasthan News: पंजाब और राजस्थान के बीच समझौते के बाद हरिके बैराज का गेट खोल दिए गए थे. पीएचईडी परियोजना के अधिकारियों के अनुसार अब धीरे-धीरे पानी छोड़ा गया. नहर में छोड़ा गया पानी 18 मई तक कायलाना में पहुंचने की उम्मीद थी, लेकिन इसे 10 दिन लेट पानी छोड़ने से अब प्रदेश को कुछ विशेष फायदा नहीं हुआ है.
खासकर राजस्थान के 10 पश्चिमी जिलों में मान जा रहा था कि इसके बाद पानी की समस्या से निजात मिलेगा और गर्मी के समय जलापूर्ति बढ़ाई जा सकेगी और इस बीच डिग्गियों में भरे हुए पानी से आपूर्ति की जाएगी. दरअसल भारत-पाक तनाव के चलते नहरबंदी को खत्म करने के लिए केंद्रीय मंत्री एवं सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत ने राजस्थान सरकार को कहा था.
उसके बाद राजस्थान सरकार ने पंजाब सरकार से बात करके नहरबंदी को खत्म करने के लिए कहा. उसी के आधार पर इस बार नहरबंदी को खत्म करके बैराज के गेट खोले गए, लेकिन जो पानी 10 दिन पहले छोड़ जाना था वह लेट छोड़ा गया, जिससे पानी का जो अतिरिक्त फायदा मिलना चाहिए था वह नहीं मिल पाया.
राजस्थान में इंदिरा गांधी नहर की मरम्मत के लिए की गई नहर बंदी को समाप्त होने के बाद अब पश्चिमी राजस्थान के करीब 10 जिलों में पानी के संकट से राहत मिलने की उम्मीद थी. इससे जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर, नागौर, बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, झुंझुनूं और सीकर में पेयजल की स्थिति में सुधार होना था.
10 दिन लेट होने से अब आपूर्ति यथावत रही है, लेकिन अब शहर में क्लोजर सप्ताहिक की जगह 15 दिन कर दिया गया है. पानी को तय मापदंड पर शहर वासियों को उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन गर्मी के समय अतिरिक्त पानी की सप्लाई जल विभाग नहीं कर पा रहा है.
मुख्य अभियंता राजेंद्र मेहता ने बताया कि 23 मई की शाम को पानी की सप्लाई सुचारू रूप से होना शुरू हो चुका था. चार-पांच दिन के पानी का स्टॉक कर लिया गया है. पहले साप्ताहिक क्लोजर लिया जा रहा था, जिसे अब साप्ताहिक क्लोजर ना लेकर 15 दिनों में क्लोजर लिया जा रहा है. मानसून भी जल्दी आने की उम्मीद है जिससे पानी की सप्लाई में और राहत मिल पाएगी.
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Reporter- Rakesh Kumar Bhardwaj