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Jaisalmer News: मंगोलिया, चीन और कजाकिस्तान से हर साल शीतकालीन प्रवास पर लाठी क्षेत्र में आने वाले मेहमान पक्षी कुरजां ने खीचन में दस्तक दे दी है. दरअसल, कुरजां को क्षेत्र के देगराय ओरण में आकाश में सुबह स्वच्छंद विचरण करते हुए देखा गया था.
पहले जत्थे ने देगराय पहुंचकर अपने प्रवास स्थलों की पहचान की लाठी क्षेत्र में कुरजां की दस्तक के साथ ही गांव के पक्षी प्रेमियों के चेहरों पर खुशी नजर आई. पक्षी प्रेमी सुमेर सिंह भाटी ने बताया कि कुरजां की आवाज गूंजी, तो छत पर जाकर देखा, इस दौरान आकाश में
अत्यधिक ऊंचाई पर करीब 150 से 200 पक्षियों का एक समूह दिखाई दिया.
वन्यजीव प्रेमी सुमेर सिंह भाटी ने बताया कि कुरजां का ये समूह दिनभर देगराय ओरण पर मंडराता रहा था लोग कुरजां की एक झलक पाने का काफी उत्सुक नजर आए.
कुरजां के लाठी क्षेत्र में पंहुचने के बावजूद पक्षी कुछ दिन तक नीचे नहीं उतरेंगे तथा दिन व रात में आकाश में उड़ते हुए ही सुरक्षा के लिहाज से पूरी जांच पड़ताल करेंगे. उसके बाद ही पक्षी नीचे उतरेंगे तथा पक्षियों की दिनचर्या शुरू होगी. तापमान में गिरावट के साथ ही क्षेत्र में पक्षियों की संख्या में वृद्धि होगी. फिर क्षेत्र में रात्रि विश्राम के बाद पक्षी प्रतिदिन क्षेत्र के पास स्थित खुले मैदान में पंहुचकर चुग्गा लेना शुरू करेंगे.
खुले मैदान में डालते हैं डेरा
भाटी ने बताया कि प्रवासी पक्षी कुरजां का वजन करीब दो से ढाई किलो होता है.यह पानी के आसपास खुले मैदान और समतल जमीन पर ही अपना अस्थाई डेरा डालकर रहते हैं. इन पक्षियों का मुख्य भोजन वैसे तो मोतिया घास होती है और पानी के पास पास पैदा होने वाले कीड़े मकोड़े खाकर अपना पेट भरते हैं.
क्षेत्र में अच्छी बारिश होने पर खेतों में होने वाले मतीरे की फसल भी इनका पंसदीदा भोजना माना जाता है. यहां वे लाठी सहित,देगराय ओरण खेतोलाई,भादरिया चाचा,धोलिया,डेलासर,लोहटा गांव के पास स्थित तालाब व खडीनो पर देखे जा सकते हैं.
ऐसे आती है कुरजां
कुरजां एक खूबसूरत पक्षी है जो सर्दियों में साइबेरिया से ब्लैक समुद्र से लेकर मंगोलिया तक फैले प्रदेश से हिमालय की ऊंचाइयों को पार करता हुआ हमारे देश में आता है. सर्दियां हमारे मैदानों और तालाबों के करीब गुजारने के बाद वापस अपने मूल देश में लौट जाता है. अपने लंबे सफर के दौरान यह पांच से आठ किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ता है.
राजस्थान में हर साल लगभग पचास स्थानों पर कुरजां पक्षी आते हैं. लेकिन इनकी सबसे बड़ी संख्या लाठी क्षेत्र में ही दिखाई देती है. कुरजां यहां के परिवेश में इतना घुलमिल गया है कि इस पर कई लोकगीत बन चुके है. यहां इनके बच्चे होते है. और उनके बड़े होते ही ये उड़ान भर लेते हैं.
6 माह का होगा प्रवास
कुरजां प्रतिवर्ष सितम्बर माह के प्रथम सप्ताह में लाठी क्षेत्र पहुंच जाती है और मार्च में वतन वापसी की उड़ान भरती है. इस दौरान छह माह के शीतकालीन प्रवास में ये पक्षी यहां हजारों की तादाद में एकत्रित होकर क्षेत्र को पर्यटक स्थल का रूप दे देते हैं. उल्लेखनीय है कि प्रवासी पक्षी कुरजां के आगमन के साथ ही लाठी क्षेत्र में देसी-विदेशी पर्यटकों की चहल-पहल बढ़ जाती है.
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