जोधपुर में गृहमंत्री अमित शाह ने नेत्रहीन महाविद्यालय के नए भवन का किया शिलान्यास

Jodhpur News: राजस्थान के जोधपुर जिले में रविवार को एक ऐतिहासिक अवसर पर भारत सरकार के गृहमंत्री अमित शाह ने श्री पारसमल बोहरा नेत्रहीन महाविद्यालय के नए भवन का शिलान्यास किया. कार्यक्रम में सुशीला बोहरा की आत्मकथा 'मैं न थकी न हारी' का ब्रेल लिपि में विमोचन भी किया गया.

जोधपुर में गृहमंत्री अमित शाह ने नेत्रहीन महाविद्यालय के नए भवन का किया शिलान्यास
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Jodhpur News: राजस्थान के जोधपुर जिले की धरती रविवार को एक ऐतिहासिक पल की साक्षी बनी, जब भारत सरकार के गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने श्री पारसमल बोहरा नेत्रहीन महाविद्यालय के भव्य भवन का शिलान्यास किया. इस अवसर पर सुशीला बोहरा की आत्मकथा 'मैं न थकी न हारी' का विमोचन भी किया गया, जिसे ब्रेल लिपि में प्रकाशित किया गया है.

महाविद्यालय का नया भवन 3 करोड़ 46 लाख रुपये की लागत से बनेगा, जबकि गर्ल्स हॉस्टल और बॉयज हॉस्टल पर 5 करोड़ 48 लाख रुपये-5 करोड़ 48 लाख रुपये की लागत आएगी. संस्थान की स्थापना से अब तक 4626 विद्यार्थियों को शिक्षा दी जा चुकी है, 4000 से अधिक महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया गया है और 8583 विशेष योग्यजनों को विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाया गया है.

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दानदाताओं व प्रख्यात हस्तियों के उद्बोधन
कार्यक्रम में उद्योगपति मोतीलाल ओसवाल ने घोषणा की कि उनकी संस्था ने 100 करोड़ रुपये के निवेश और 87 बीघा जमीन लेकर शिक्षा और किसानों की आय बढ़ाने के लिए मॉडल तैयार किया है. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में किसानों की आमदनी 2 से 4 गुना बढ़ाने के बाद अब राजस्थान में भी किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा.

गृहमंत्री अमित शाह का संबोधन
गृहमंत्री अमित शाह ने सुशीला बोहरा को नमन करते हुए कहा कि उनकी जीवन यात्रा सेवा, त्याग और समाज के लिए समर्पण की मिसाल है। उन्होंने कहा कि अंधेरा चाहे कितना भी गहन क्यों न हो, एक दीप पूरे वातावरण को प्रकाशमय कर देता है. इसी तरह सुशीला बोहरा का योगदान सैकड़ों बच्चों के जीवन में उजियारा भर रहा है.

गृहमंत्री अमित शाह जोधपुर दौरे पर है, जहां श्री पारसमल बोहरा नेत्रहीन महाविद्यालय के नवीन भवनों का शिलान्यास समारोह आयोजित हुआ. समारोह में गृह मंत्री अमित शाह ने संबोधित करते हुए कहा कि मुझे पहले यह मालूम नहीं था कि कितने बड़े काम में शामिल होने जा रहा हूं. कितनी बड़ी शख्सियत से मिलने जा रहा हूं ? मैंने इस संस्थान में आने में शायद बहुत ज्यादा देर कर दी, मुझे यहां बहुत पहले आना चाहिए था.

मैंने यह देखा है जब जीवन में दुख आता है, तो उनके जीवन में नकारात्मक पन आ जाता है लेकिन जिस तरह से सुशीला जी का जीवन भाव है. युवा अवस्था में अपने पति को खोने के बाद लाखों लोगों के जीवन में उजाला लाने का काम किया है. 60 साल से सेवाकाल में हजारों लोगों को जीने की प्रेरणा ही नहीं दी बल्कि उनके जीवन ने अनेक लोगों को प्रेरित किया है.

समाज के सामने कई चुनौतियां
प्रभु ने दिव्यांग को छिपी हुई शक्ति दी है. उसे निखारकर जो दिव्यांगजनों को जीवन जीने की कला दी है. वास्तव में अपरिकल्पनीय है. मुझे पूरा विश्वास है कि आज जो काम शुरू हुआ है वह समय पर पूरा होगा. इससे सैकड़ों बच्चों के जीवन में बड़ा बदलाव आएगा. सुशीला बोहरा जी ने मेरे जन्म से पहले ही सेवा कार्य शुरू कर दिया था. इससे कई दिव्यांगजनों ने उच्च स्थान हासिल किया है. समाज के सामने कई चुनौतियां हैं. दिव्यांग बच्चों के जीवन में जो चुनौतियां है. उन्हें दूर करने के लिए बहुत कुछ करना बाकी है. इस तरह से जो छोटे छोटे प्रयोग होते है तो निश्चित रूप से बदलवा आता है. दिव्यांग खिलाड़ियों ने पैरा ओलंपिक में अपनी योग्यता दिखाई.

राजस्थान का यह पहला नेत्रहीन महाविद्यालय बना है. मोदी ने 2015 में पहली बार पूरे देश में विकलांग की जगह दिव्यांग शब्द बोलना शुरू किया. इससे पूरे देश में दिव्यांगजन को देखने का नजरिया बदल दिया है. यह शब्द नई पहचान और आत्मनिर्भरता जगाने का काम करता है.

अमित शाह ने देवेंद्र झाझड़िया का उदाहरण दिया. जिन्होंने देश के लिए गोल्ड जीतकर देश का मान-सम्मान बढ़ाया. कई दिव्यांग खिलाड़ियों ने पैरा ओलंपिक में अपनी योग्यता दिखाई. पिछले 3 पैरा ओलंपिक में 52 मेडल देश को मिले. यदि सरकार, समाज सभी मिलकर काम करे तो हर लक्ष्य को पूरा किया जा सकता है.

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने अपने संबोधन में कहा कि यह शिलान्यास मात्र एक इमारत का नहीं, बल्कि दिव्यांगजन को सहारा और संबल देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. उन्होंने सुशीला बोहरा की जीवन यात्रा को 'तमसो मा ज्योतिर्गमय' का प्रतीक बताते हुए कहा कि संसाधनों की कमी हमेशा संकल्प शक्ति के आगे हार जाती है.
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि यह भवन शिक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता के नए द्वार खोलेगा. उन्होंने गृहमंत्री अमित शाह का अभिनंदन करते हुए कहा कि 370, आतंकवाद, नक्सलवाद और CAA जैसे ऐतिहासिक निर्णयों से देश को नई दिशा मिली है.

सुशीला बोहरा का योगदान
कार्यक्रम में यह भी उल्लेख हुआ कि सुशीला बोहरा ने अपने पति की असमय मृत्यु के बाद जीवन को सेवा कार्य से जोड़कर विशेषकर दिव्यांगजनों की शिक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए समर्पित कर दिया. उनके प्रयासों से ही इस संस्थान ने हजारों बच्चों को नया जीवन दिया है. कार्यक्रम के अंत में गृहमंत्री अमित शाह जोधपुर से एयरफोर्स स्टेशन के लिए रवाना हुए और वहां से गुजरात के लिए प्रस्थान किया.
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