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Rajasthan News: पूरा देश जहां आज रक्षाबंधन का त्यौहार मना रहा है. बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र की कामना करते हुए भाइयों की कलाइयों पर राखी बांध रही है और ईश्वर से उनकी लंबी आयु व स्वस्थ स्वास्थ्य की कामना कर रही है. वहीं, इस देश का एक तबका ऐसा भी है जो मजबूरी के चलते भारत तो पहुंच चुका है, लेकिन उनका दिल आज भी पाकिस्तान में रह रहे अपने बहन भाइयों के लिए धड़कता है. रक्षाबंधन का त्योहार जिसे हर कोई हर्षोल्लास से मना रहा है, लेकिन पाकिस्तान के अत्याचारों से परेशान हो भारत में आकर रहने वाले रिफ्यूजी इस त्योहार पर हताश नजर आ रहे है.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद जहां भारत-पाकिस्तान के बीच दूरियां बढ़ चुकी है और आने-जाने पर भी प्रतिबंध लग चुका है. इसके चलते पाकिस्तान से भारत आए पाक विस्थापित इस रक्षाबंधन के दिन अपने बहन भाइयों को खूब याद कर रहे है. यह रिफ्यूजी पाकिस्तान के अत्याचारों से परेशान हो भारत-पाक सीमा से सटे सरहदी जिले जैसलमेर में भी काफी तादाद में रह रहे हैं. रक्षाबंधन के इस पर्व पर इन पाक विस्थापितों की आंखें नम है जिसका कारण यह है कि उनके बहन-भाई उनसे दूर है. ये खुद तो भले ही जैसलमेर में आकर बस गए हैं, लेकिन अपने बहन-भाइयों के पाकिस्तान में होने के कारण उनका यह राखी का त्योहार फीका है और उन बहन-भाइयों को याद कर उनकी आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. वहीं उन्हें इस बात की भी चिंता है कि क्या वे अपने जीते जी उन बहन भाइयों को देख भी पाएंगे या नहीं. इंडिया को ये अपना वतन मानते हैं लेकिन इस रक्षाबंधन के दिन अपनो की दूरी का उन्हें मलाल है. वे सरकार से अपील कर रहे हैं कि सरकार उनकी सुध ले और पाकिस्तान में रह रहे उनके दुखी बहन भाइयों को भी इंडिया में स्थान दें.
अपनों से दूर पाक विस्थापितों का छलका दर्द, बहनों की आंखें नम
वहीं पाकिस्तान से एक साल पहले ही जैसलमेर आई कसूम्बी नामक महिला बताती है कि वह अपने बच्चो व पति के साथ भारत आ गई है. लेकिन उसके भाई आज भी पाकिस्तान में है और इस रक्षाबंधन के त्योहार पर उसे अपने भाइयों की गहरी याद आती है. कसुंबी पांच भाइयों की एक बहन है. पांचों भाई पाकिस्तान में है और आज इस रक्षाबंधन पर उसे अपने भाइयों की खूब याद आती है. जब भी वो अपने भाइयों से बात करती है तो उसका गला भर आता है.
वहीं आज से ठीक 20 साल पहले पाकिस्तान से जैसलमेर आई अकलो नामक महिला बताती है कि उसकी 9 संताने हैं, जिसमें एक सबसे बड़ी बेटी जो आज पाकिस्तान में है और उसके आठ बेटे जैसलमेर में है. बेटी से जब कभी बात होती है तो आंखें भर आती है. अकलो की बेटी जहां पाकिस्तान में है. अकलो के आठों बेटों को अपनी बहन का यहां जैसलमेर में इंतजार है. वही अकलो के दो भाई पाकिस्तान में है, जिन्हें भी अपनी बहन की राखी का इंतजार है. जिया और इलमा की भी यही कहानी है.
वही 70 वर्षीय हरचंद बताते हैं कि उन्हें पाकिस्तान से जैसलमेर आए 3 साल हुए हैं. उनकी चार बहने व एक बेटा पाकिस्तान में रहते है. हरचंद को अपनी बहनों की खूब याद आती है. आज रक्षाबंधन के त्योहार पर उनकी बहन ने जिंदा तो है, लेकिन पाकिस्तान में होने के कारण भारत में बैठे इस भाई की कलाई सुनी है.
वही 50 वर्षीय केसराराम बताते हैं कि उन्हें पाकिस्तान से जैसलमेर आए 12 साल हो गए. उन्हें भारत की नागरिकता भी मिल चुकी है. केसरा राम की तीन बेटियों के साथ ही तीन बहने भी पाकिस्तान है, जिसके कारण आज रक्षाबंधन के दिन उन्हें बेटियों के साथ ही बहनों की दूरी का दुःख सता रहा है.
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